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नितिन धीमान, अमृतसर

मरीजों को इंजेक्शन लगाने वाले सरकारी डॉक्टरों का अब टीकाकरण होगा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों व सहयोगी स्टाफ को हैपेटाइटिस-बी यानी पीलिया जैसी खतरनाक बीमारी से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने वैक्सीनेशन करने की रूपरेखा तैयार की है। स्वास्थ्य विभाग की डायरेक्टर डॉ. जसपाल कौर ने प्रदेश के सभी सिविल सर्जनों को पत्र जारी कर सरकारी अस्पतालों व लेब रूम में कार्यरत डॉक्टरों तथा स्टाफ के नामों की सूची मांगी है। स्वास्थ्य विभाग सभी डॉक्टरों व स्टाफ की संख्या के अनुपात में हैप-बी वैक्सीन का स्टॉक भेजेगा।

दरअसल, पंजाब में हैपेटाइटिस रोग से पीड़ित मरीजों की संख्या अप्रत्याशित ढंग से बढ़ रही है। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक संक्रमण के जरिए फैलने वाला यह रोग हर साल मौत का चक्रव्यूह रच रहा है। यही वजह है कि सरकारी अस्पतालों में हैपेटाइटिस-बी से प्रभावित मरीजों उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इन मरीजों से डॉक्टरों व सहयोगी स्टाफ को संक्रमण का खतरा है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने सुनियोजित ढंग से डॉक्टरों व स्टाफ को हैप-बी का इंजेक्शन लगाने का निर्णय लिया है। यानी कि अब सरकारी डॉक्टरों को भी इंजेक्शन की चुभन सहनी पड़ेगी। एचबीवी वायरस है हैपेटाइटिस-बी का कारण

हैपेटाइटिस-बी एचबीवी वायरस के कारण होता है। यह इंसान के लीवर पर सीधा प्रहार करता है और इसे क्षतिग्रस्त तक कर सकता है। यह बीमारी एचआईवी एड्स की तरह ही फैलता है। मसलन, संक्रमित खून के चढ़ने, असुरक्षित यौन संबंध, एक ही सी¨रज का बारबार इस्तेमाल करना, संक्रमित मां द्वारा उसकी गर्भ में पल रहे शिशु को हो सकती है। हैपेटाइटिस-बी इसलिए भी खतरनाक है क्योंकि यह तेजी से एक इंसान से दूसरे इंसान तक पहुंचने में सक्षम है। जागरूकता के अभाव में संक्रमित व्यक्ति ही अनजाने में यह रोग दूसरे को बांट देते हैं।

डॉक्टरों को संक्रमण होने का खतरा अधिक : डॉ. घई

सिविल सर्जन डॉ. हरदीप ¨सह घई ने कहा कि हर वक्त मरीजों से घिरे रहने वाले डॉक्टरों को संक्रमण जल्दी हो सकता है। इसी कारण इन्हें वैक्सीनेट करना जरूरी है। उन्होंने स्टाफ को हिदायत की है कि वे हैपेटाइटिस-बी से पीड़ित मरीज का पता लगते ही तत्काल सिविल सर्जन कार्यालय को रिपोर्ट करें। इसके अतिरिक्त मरीज का उपचार करते समय ग्लब्ज व मास्क पहनकर रखें।

Posted By: Jagran

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