नितिन धीमान, अमृतसर

प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक यानी गर्भ में ¨लग की पहचान करने वाले अल्ट्रासाउंड सेंटरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नई रणनीति तैयार की है। जिले के अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर अब डॉक्टर, डिस्ट्रिक्ट अटार्नी व पुलिस की संयुक्त टीमें छापामारी करेंगी। ¨लग निर्धारण टेस्ट करने वाले सेंटरों का भंडाफोड़ करने के बाद पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत कार्रवाई भी करेंगी।

दरअसल, पिछले तीन सालों में जिला परिवार भलाई अधिकारी की ओर से कुछेक अल्ट्रासाउंड सेंटरों का निरीक्षण किया गया, लेकिन ¨लग निर्धारण टेस्ट का कहीं कोई मामला उजागर नहीं किया गया। दूसरी तरफ जिले में लड़का-लड़की के जन्मदर का आंकड़ा इस बात की ओर स्पष्ट इंगित करता है कि सरकारी मिलीभगत एवं उदासीनता के चलते जिले में ¨लग निर्धारण टेस्ट धड़ल्ले से हो रहा है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित अल्ट्रासाउंड सेंटर इस घिनौने कृत्य में जुटे हैं। पच्चीस से तीस हजार रुपये लेकर कोख में पल रहे शिशु का ¨लग निर्धारण करने वाले इन सेंटरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही। दुखद पहलू यह भी है कि स्वास्थ्य विभाग यह छुपाता रहा है कि पिछले तीन सालों में अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर कार्रवाई की या नहीं।

विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली का अंदाजा इस बात से भी लगा सकते हैं कि कन्या भ्रूण हत्या के संदर्भ में छह माह पूर्व सूचना अधिकार एक्ट के तहत मांगी गई जानकारी आज तक उपलब्ध नहीं करवाई गई। यकीनन, जिले के कुछ अल्ट्रासाउंड सेंटरों में ¨लग निर्धारण टेस्ट हो रहा है और निश्चित ही कोख में बेटियां भी मारी जा रही हैं। इसे छुपाने के लिए विभाग सूचना देने को में आनाकानी कर रहा है। विश्वसनीय सूत्र बताते हैं कि अल्ट्रासाउंड मशीनों की जांच का काम गुपचुप ढंग से किया जाता रहा है। किस सेंटर में अल्ट्रासाउंड मशीन में क्या अनियमितता पाई गई, इसका खुलासा नहीं किया जाता। यही वजह है कि सिविल सर्जन डॉ. हरदीप ¨सह घई ने अल्ट्रासाउंड मशीन की छापामारी के लिए नई टीम का गठन किया है। डीसी की फटकार के बाद भी नहीं हुआ सुधार

दैनिक जागरण द्वारा की गई पड़ताल में लड़का-लड़की की जन्मदर का अनुपात में भारी अंतर देखने को मिला है। वर्ष 2013-14 में 1000 लड़कों की तुलना में 905 लड़कियों का जन्म हुआ। वर्ष 2012-13 में 902 और 2011-12 में 846 तथा 2010-11 में 814 लड़कियों को जीवन मिल पाया। ये आंकड़े बेशक कुछ वर्ष पुराने हैं, लेकिन कन्या भ्रूण हत्या का घिनौना सच उजागर कर रहे हैं। 2015 से 2017 तक का आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग देने को तैयार नहीं। पिछले वर्ष डिप्टी कमिश्नर डॉ. कमलदीप ¨सह संघा ने तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. न¨रदर कौर को फटकार लगाई थी कि जिले में अल्ट्रासाउंड मशीनों की जांच का काम प्रॉपर ढंग से क्यों नहीं हो रहा। उस दौरान तरसिक्का, मानांवाला ब्लॉकों में ¨लग अनुपात में भारी असमानताएं पाई गई थीं।

महिला ने दो अल्ट्रासाउंड सेंटर पकड़वाए, सेहत विभाग अपनी पीठ थपथपाई

वर्ष 2017 में ढाब खटिकां स्थित एक निजी नर्सिंग होम में ¨लग निर्धारण टेस्ट का खुलासा हुआ था। यह जान कर ताज्जुब होगा कि इस गोरखधंधे को उजागर करने में स्वास्थ्य विभाग की कोई भूमिका न थी। तरनतारन की एक महिला रमनदीप कौर ने एक दाई के कहने पर इस नर्सिंग होम से अल्ट्रासाउंड करवाया था। उससे 14,500 रुपये टेस्ट के लिए गए और टेस्ट के बाद अबॉर्शन करवाने के लिए 85,00 रुपये में बात तय हुई।

जांच के बाद डॉक्टरों ने उसे बताया था कि उसकी कोख में बेटा है या बेटी। इसी लड़की ने स्वास्थ्य विभाग को फोन कर सूचित किया था और फिर विभाग की टीम ने यहां छापामारी कर अल्ट्रासाउंड मशीन सील की थी। नर्सिंग होम का मालिक मौके से फरार हो गया। ठीक इसी प्रकार पिछले वर्ष ही रमनदीप कौर ने ही जंडियाला गुरु में एक नर्सिंग होम में ¨लग निर्धारण टेस्ट का भंडाफोड़ किया था। इन दो बड़े खुलासों में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने अपनी पीठ थपथपाई। इसके अलावा पिछले तीन सालों में विभाग की ओर से जिले में किसी भी अल्ट्रासाउंड मशीन को सील नहीं किया गया।

बॉक्स.छापेमारी टीम में भी बदलाव

सिविल सर्जन डॉ. हरदीप ¨सह घई का कहना है कि छापामार दल में कुछ बदलाव किया गया है। ये टीमें अब फील्ड में उतर चुकी हैं। अल्ट्रासाउंड सेंटरों की तेजी से जांच की जा रही है। ¨लग निर्धारण टेस्ट करवाने वाले सेंटरों के खिलाफ सख्त कारवाई होगी।

Posted By: Jagran