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बैन रहेगी दिलजीत दोसांझ की 'सतलुज'? केंद्रीय समिति की सिफारिश, राष्ट्रीय सुरक्षा व व्यवस्था के लिए रोक जरूरी

Published: Sat, 11 Jul 2026 04:59 PM (GMT+05:30)

दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म पर गठित केंद्र की समिति ने ऑनलाइन प्रदर्शन पर लगी रोक जारी रखने की सिफारिश की ...और पढ़ें

फिल्म सतलुज का पोस्टर।

फिल्म सतलुज का पोस्टर।

HighLights

  1. 'सतलुज' फिल्म पर ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्रतिबंध जारी रहेगा।

  2. अंतर-विभागीय समिति ने प्रतिबंध को उचित बताया।

  3. राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था का हवाला दिया गया।

डिजिटल डेस्क, अमृतसर। अभिनेता दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म 'सतलुज' को लेकर विवाद अभी थमता नजर नहीं आ रहा है। केंद्र सरकार की ओर से गठित अंतर-विभागीय समिति ने फिल्म की विस्तृत समीक्षा के बाद इसकी ऑनलाइन स्ट्रीमिंग पर लगी रोक को फिलहाल जारी रखने की सिफारिश की है। सरकारी सूत्रों के अनुसार समिति का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में लगाया गया प्रतिबंध उचित है और इसे हटाना अभी उचित नहीं होगा।

यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित बताई जाती है। फिल्म में पंजाब में उग्रवाद के दौर के दौरान वर्ष 1984 से 1994 के बीच अज्ञात शवों के कथित अंतिम संस्कार की जांच और उसके बाद वर्ष 1995 में उनके अपहरण एवं हत्या की घटनाओं को दिखाया गया है।

फिल्म तीन जुलाई को एक ऑनलाइन मंच पर प्रदर्शित की गई थी, लेकिन भारत में प्रदर्शन के दो दिन बाद ही सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए इसकी उपलब्धता पर रोक लगा दी थी। इसके बाद मामले की विस्तृत समीक्षा के लिए सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के तहत एक अंतर-विभागीय समिति का गठन किया गया था।

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फिल्म के प्रस्तुतीकरण पर उठे सवाल

सरकारी सूत्रों के अनुसार समिति ने अपनी समीक्षा में माना कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए के तहत लगाया गया प्रतिबंध उचित था। इस धारा के तहत सरकार को भारत की संप्रभुता, अखंडता, राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था तथा अन्य संवेदनशील आधारों पर ऑनलाइन सामग्री को प्रतिबंधित करने का अधिकार प्राप्त है।

सूत्रों के मुताबिक समिति का यह भी मत है कि फिल्म का प्रस्तुतिकरण संतुलित नहीं है। समिति के अनुसार फिल्म में सुरक्षा बलों की कथित ज्यादतियों को प्रमुखता से दिखाया गया है, जबकि उग्रवाद से जुड़े घटनाक्रमों और हिंसा के अन्य पक्षों को पर्याप्त संतुलन के साथ प्रस्तुत नहीं किया गया। इसी आधार पर समिति ने प्रतिबंध जारी रखने की सिफारिश की है।

समिति की रिपोर्ट से बढ़ी हलचल

इस अंतर-विभागीय समिति में सूचना एवं प्रसारण, गृह, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी, महिला एवं बाल विकास, विदेश, रक्षा तथा विधि एवं न्याय सहित कई मंत्रालयों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया था। समिति ने फिल्म की सामग्री का विभिन्न पहलुओं से परीक्षण करने के बाद अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी है। फिल्म पर लगी रोक को लेकर पंजाब में राजनीतिक और धार्मिक स्तर पर भी बहस तेज हो गई है।

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एसजीपीसी कर चुकी प्रतिबंध हटाने की मांग

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने प्रतिबंध हटाने की मांग की है, जबकि शिरोमणि अकाली दल ने राज्यभर में फिल्म के विशेष प्रदर्शन कराने की घोषणा की है। दूसरी ओर केंद्र सरकार की समिति की सिफारिश के बाद यह मामला और चर्चा में आ गया है।

अब अंतिम निर्णय केंद्र सरकार के स्तर पर लिया जाएगा। हालांकि समिति की सिफारिश के बाद यह संकेत जरूर मिले हैं कि फिलहाल फिल्म पर लगी रोक हटने की संभावना कम दिखाई दे रही है। आने वाले दिनों में सरकार के औपचारिक निर्णय पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

(इनपुट-पीटीआई)

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