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'सतलुज' विवाद के बीच IT एक्ट में संशोधन पर विचार, सेंसर बोर्ड से नकारे जाने के बावजूद गुरुद्वारों में दिखाई जा रही फिल्म

Published: Fri, 10 Jul 2026 11:49 PM (IST)Updated: Fri, 10 Jul 2026 11:50 PM (IST)

सेंसर बोर्ड से अस्वीकृत फिल्म 'सतलुज' को गुरुद्वारों में दिखाए जाने के बाद सरकार आईटी एक्ट में संशोधन पर विचार कर रही है।

'सतलुज' : क्रडिट IMDB

'सतलुज' : क्रडिट IMDB

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सेंसर बोर्ड से नकारे जाने के बावजूद गुरुद्वारों में विवादित फिल्म 'सतलुज' को दिखाए जाने के बाद सरकारी स्तर पर विचार शुरू हो गया है कि किसी भी मंच पर फिल्म दिखाने के लिए लाइसेंस की जरूरत होनी चाहिए। यानी सिनेमाघर और ओटीटी ही नहीं किसी छोटे, निजी, धार्मिक मंच पर भी सार्वजनिक रूप से नहीं दिखाया जा सकता है।

दरअसल, 2022 में ही इस फिल्म पर सेंसर बोर्ड की ओर से आपत्ति जताई गई थी, जिसमें पंजाब में चले आतंकवाद के दौर को एकतरफा पुलिस बर्बरता के रूप में दिखाने की कोशिश हुई थी।

सवा सौ से अधिक कट करने को कहे गए थे, जिसके बाद फिल्म निर्माता बांबे हाई कोर्ट गए थे, लेकिन 2025 में कोर्ट के रुख को देखते हुए याचिका वापस ले ली गई थी। यानी एक तरह से यह मामला बंद माना गया था, लेकिन चुपके से फिल्म ओटीटी जी-5 पर रिलीज कर दी गई।

गुरुद्वारों में दिखाओ जा रही है फिल्म 'सतलुज'

सरकारी आदेश के बाद देश में ओटीटी पर तो फिल्म प्रतिबंधित हो गई, लेकिन पंजाब में एसजीपीसी, कट्टरपंथी अमृतपाल की पार्टी वारिस पंजाब दे और शिरोमणि अकाली दल की ओर से गुरुद्वारों में यह प्रतिबंधित फिल्म दिखाई जा रही है।

पंजाब में अगले कुछ महीनों में चुनाव हैं। दिलजीत दोसांझ की इस फिल्म में पुलिस बर्बरता को प्रमुख रूप से दर्शाया गया है और आतंकवाद की भेंट चढ़े पूर्व कांग्रेस मुख्यमंत्री बेअंत सिंह को ही बर्बरता के नायक के रूप में दिखाने का प्रयास किया गया है। इस फिल्म ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। जब यह फिल्म सेंसर बोर्ड के सामने लाई गई थी तो इसका नाम गल्लूघरा था। यानी नरसंहार।

सरकार कर रही आईटी एक्ट में संशोधन पर विचार 

इस फिल्म को आज भी सेंसर बोर्ड से अनुमति नहीं मिली है, लेकिन सिर्फ नाम बदलकर दिखाया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि सरकार में मंथन चल रहा है कि आईटी एक्ट की धारा 69 ए में संशोधन कर यह भी शामिल किया जाना चाहिए कि किसी भी मंच पर कोई भी फिल्म दिखाने के लिए सेंसर बोर्ड की अनुमति चाहिए। उनके अनुसार, दुनिया के सभी देशों में ऐसी व्यवस्था है।

सूत्रों के अनुसार, यह फिल्म आईटी एक्ट की धारा 69 ए का उल्लंघन है, क्योंकि सेंसर बोर्ड ने पाया था कि फिल्म देश की संप्रभुता और सुरक्षा को भी नुकसान पहुंचाती है। बताते हैं कि सेंसर बोर्ड के सामने आई फिल्म में पंजाब के अंतरराष्ट्रीयकरण की भी कोशिश हुई थी।

फिल्म में बिना किसी ठोस तथ्य के 25 हजार से अधिक मौत की बात की गई थी। सेंसर बोर्ड ने इसे भी हटाने को कहा था। राजनीतिक रूप से यह फिल्म कांग्रेस को कठघरे में खड़ा करती है, क्योंकि उस वक्त उसी की सरकार थी। लेकिन मुख्य रूप से कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए बेअंत सिंह के पोते रवनीत सिंह बिट्टू के लिए परेशानी का सबब बन गई है।

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