भारत में हर साल 77 हजार महिलाओं की जान ले रहा सर्वाइकल कैंसर, समय पर जांच और टीकाकरण से रोकी जा सकती मौत
भारत में सर्वाइकल कैंसर हर साल 77,000 महिलाओं की जान लेता है, जो वैश्विक मामलों का पांचवां हिस्सा है। स्टेट ...और पढ़ें

देश में हर साल करीब 1.24 लाख नए मामले दर्ज होते हैं।
HighLights
भारत में हर साल 77 हजार महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर से मौत।
एचपीवी संक्रमण मुख्य कारण, समय पर पैप स्मीयर जांच महत्वपूर्ण।
9-14 वर्ष की लड़कियों के लिए एचपीवी टीकाकरण प्रभावी उपाय।
जागरण संवाददाता, अमृतसर। गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर उन बीमारियों में शामिल है, जिनसे अब महिलाओं की जान नहीं जानी चाहिए, क्योंकि समय पर जांच और सही उपचार से इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है। इसके बावजूद जागरूकता की कमी और देर से पहचान के कारण यह आज भी महिलाओं की मौत का बड़ा कारण बनी हुई है।
यह जानकारी अमृतसर स्थित स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के नोडल अधिकारी एवं जीएमसी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मनराज सिंह कंग ने दी। उन्होंने बताया कि गर्भाशय ग्रीवा कैंसर दुनिया भर में महिलाओं में होने वाला चौथा सबसे आम कैंसर है। हर वर्ष लगभग 6.6 लाख महिलाएं इससे प्रभावित होती हैं, जबकि करीब 3.5 लाख महिलाओं की मौत इस बीमारी से हो जाती है।
भारत में स्थिति और भी चिंताजनक है, क्योंकि विश्व के कुल सर्वाइकल कैंसर मामलों का लगभग पांचवां हिस्सा अकेले भारत से सामने आता है। देश में हर साल करीब 1.24 लाख नए मामले दर्ज होते हैं और 77 हजार से अधिक महिलाओं की जान चली जाती है।
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डॉ. मनराज सिंह कंग।
एसपीवी संक्रमण है ये
डॉ. कंग ने बताया कि इस कैंसर का प्रमुख कारण ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) संक्रमण है। इसके अलावा कम उम्र में विवाह या यौन जीवन की शुरुआत, कई यौन साथी, अधिक संतान, धूम्रपान, गरीबी और सीमित स्वास्थ्य सुविधाएं भी इसके जोखिम को बढ़ाती हैं। डॉक्टरों तक समय पर न पहुंच पाना समस्या को और गंभीर बना देता है।
उन्होंने कहा कि यदि बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में हो जाए तो इसे पूरी तरह रोका जा सकता है। नियमित जांच, विशेषकर पैप स्मीयर टेस्ट, गर्भाशय ग्रीवा में होने वाले शुरुआती असामान्य बदलावों को पकड़ने में मदद करता है।
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35-45 वर्ष की महिलाएं करवाएं जांच
विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिश है कि प्रत्येक महिला को 35 और 45 वर्ष की उम्र में कम से कम एक-एक बार जांच जरूर करानी चाहिए। डॉ. कंग ने बताया कि एचपीवी टीकाकरण सर्वाइकल कैंसर को खत्म करने की दिशा में सबसे प्रभावी कदम है। भारत में 9 से 14 वर्ष की लड़कियों के लिए टीकाकरण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। यह टीका शादी या किसी भी यौन संपर्क से पहले लगवाने पर सबसे अधिक प्रभावी होता है।
