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अमृतसर, [विपिन कुमार राणा/नितिन धीमान]। आखिरकार वही हुआ जिसका डर था। आतंकी हमले की साजिश की सूचना के बाद पंजाब पुलिस हाई अलर्ट पर थी। इसके बावजूद गांव अदलीवाल के निरंकारी भवन में ग्रेनेड धमाका सबको दहला गया। वास्‍तव में यह आतंकी हमला बड़े खतरे का संकेत है। यह पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ की नापाक हरकत है या खालिस्तानी साजिश यह तो जांच में पता चलेगा, लेकिन पंजाब और केंद्र की सुरक्षा व खुफिया एजेंसियां यहां बुरी तरह से नाकाम साबित हुई हैं।

मूसा व जैश ए मोहम्मद के सात आतंकियों के घुसने के इनपुट के बावजूद पंजाब पुलिस ठीक से सक्रिय नहीं हुई

एजेंसियों को पता था कि कश्मीर से आतंकी जाकिर मूसा अमृतसर में दिखाई दिया है। जैश-ए-मोहम्मद के सात आतंकियों के फिरोजपुर में घुसपैठ करने की सूचनाएं भी लगातार सामने आती रही हैैं। इसके बावजूद पंजाब पुलिस ने हाई अलर्ट की औपचारिकता ही रखी और रुटीन की तरह से उनकी गतिविधियां ट्रैफिक चालानों तक ही सीमित रही।

पंजाब में हाईअलर्ट के बावजूद हमले ने खोली केंद्र व पंजाब की सुरक्षा एजेंसियों के सतर्क होने के दावों की पोल

पिछले कुछ समय से पंजाब सहित उत्तर भारत के कुछ राज्यों में आतंकी हमले की आशंका जताई जा रही थी। पंजाब पुलिस के इंटेलिजेंस विभाग ने राज्य में जाकिर मूसा और जैश-ए-मोहम्मद के सात आतंकियों के घुसने की जानकारी भी दी, जिसके बाद राज्य में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया। उनके पोस्टर अमृतसर सहित कई शहरों में लगे।

आशंका जताई जा रही है कि इस हमले में जाकिर मूसा और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों का हाथ हो लेकिन पंजाब पुलिस ऐसी किसी भी बात से इंकार कर रही है। इससे पहले संदिग्ध लोगों ने पठानकोट-जम्मू कश्मीर सीमा पर किराये पर ली इनोवा गाड़ी छीनी और फरार हो गए। जो अभी तक पकड़े नहीं जा सके। गृह मंत्रालय पंजाब ने पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, फरीदकोट, फिरोजपुर व अबोहर को हाई अलर्ट पर रखकर अपनी ड्यूटी तो निभा दी, पर अमृतसर हमले को रोक न पाई।

खालिस्तानी समर्थकों को उकसाती है आइएसआइ

दूसरी तरफ ग्रेनेड हमले में खालिस्तान का हाथ होने की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता। पाकिस्तान की बदनाम खुफिया एजेंसी आईएसआइ खालिस्तानी आतंकियों की मदद से भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने के काम में जुटी है। इस संदर्भ में गृह मंत्रालय को भी पुख्ता जानकारी है। आइएसआइ द्वारा खालिस्तान समर्थक समूहों को आर्थिक मदद प्रदान की जा रही है।

अमेरिका, यूके और कनाडा में मौजूद खालिस्तान समर्थकों को भारत के खिलाफ उकसाया जाता है। विदेशों की धरती पर खालिस्तान समर्थकों को तैयार कर आईएसआइ भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल करने की साजिश रचती रही है। निरंकारी भवन अमृतसर में हुए ग्रेनेड हमला इस साजिश का हिस्सा भी हो सकता है।

सियासी दबाव में जूनियर्स के हवाले थाने

अमृतसर देहाती के अदलीवाल में हुई घटना के बाद अभी तक संदिग्धों के पकड़े न जाने से सीमा क्षेत्र में खतरा बना हुआ है। विडंबना ही कहेंगे कि सियासी दबाव में ही सही देहात के ज्यादातर थाने जूनियर्स के हवाले है यानी वहां इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी नहीं लगाए गए हैं। राजासांसी जहां यह घटना हुई, वहां के थाना प्रभारी भी एएसआइ सुखजिंदर सिंह है। इसके अलावा देहात के 17 थानों में 7 के थाना एडीशनल एसएचओ एएसआइ स्तर के अधिकारियों को लगाया गया है, जबकि 7 में एसआइ स्तर के अधिकारी काम देख रहे हैं। मात्र तीन थानों में ही इंस्पेक्टर को एसएचओ लगाया गया है।

- अमृतसर, एयरपोर्ट और बार्डर बेल्ट की सुरक्षा को लेकर खड़े हो रहे सवाल  

- राजासांसी के छोटे से गांव अदलीवाल में स्थित निरंकारी भवन श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से महज 2.5 किलोमीटर दूरी पर है।

- ग्रेनेड हमला करने वाले आतंकी किस रास्ते से आए और घटना को अंजाम देने के बाद किस ओर गए, यह भी पुलिस पता नहीं लगा पाई।

- असल में राजासांसी से अदलीवाल को जोडऩे के लिए एक ङ्क्षलक सड़क है। वहीं अदलीवाल से फतेहगढ़ चूडिय़ां को भी एक लिंक सड़क जोड़ती है।

- एक रास्ता एयरपोर्ट रोड भी है, जो अमृतसर तक जाता है।

- यदि आतंकी लिंक सड़कों के जरिए सीमावर्ती गांवों में घुसपैठ करते हैं तो वहां भी किसी अप्रिय घटना को अंजाम दे सकते हैं।

- अगर अमृतसर की ओर आए हैं तो भी यह बड़ा खतरा है। हालांकि अपुष्ट जानकारी यह भी है कि आतंकी राजासांसी रोड की तरफ गए हैं।

- यदि ऐसा है तो साफ है कि वे सीमावर्ती गांवों में दहशत का खेल खेल सकते हैं।

- पुलिस इन हमलावरों को पकड़ने के लिए अब एड़ी चोटी का जोर लगा रही हैं। पुलिस ने सभी लिंक रास्तों को सील कर दिया है।

- सीमावर्ती गांवों में अलर्ट जारी किया गया है। हर वाहन को रोक कर तलाशी ली जा रही है।

- पुलिस फोर्स के अलावा बीएसएफ भी सर्च अभियान चला रही है।

Posted By: Sunil Kumar Jha

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