जागरण संवाददाता, अमृतसर : अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व चेयरमैन त्रिलोचन सिंह ने कहा कि भाई वीर सिंह ने अपने समय में कठिन हालतों में सिख पंथ के अंदर नव चेतना पैदा करने के साथ-साथ सिखी के प्रचार व प्रसार के लिए विशेष यत्न किए। वह चीफ खालसा दीवान द्वारा भाई वीर सिंह के जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम में सेमिनार में संबोधित कर रहे थे। त्रिलोचन सिंह ने कहा कि बाल जीवन में प्राप्त धर्म की शिक्षा सारा जीवन व्यक्ति की अगुआई करती है। इसी पर भाई वीर सिंह बल देते थे। आज भाई वीर सिंह की रचनाओं को नजर अंदाज किया जा रहा है। स्कूल-कालेजों और विश्वविद्यालयों द्वारा भाई साहिब की रचनाओं को पूरी तरह भुला दिया गया है। सिख पंथ और विरसे को संभालने के लिए पंथ प्रदर्शक भाई वीर सिंह को हमेशा याद रखा जाना जरूरी है। सिखी के प्रचार व प्रसार के लिए सिख संस्थाओं द्वारा विशेष यत्न किए जाने चाहिए।

चीफ खालसा दीवान के आनरेरी सचिव अजीत सिंह बसरा ने कार्यक्रम में पहुंचे प्रतिनिधियों का स्वागत किया। कहा कि भाई वीर सिंह को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि उनके साहित्य का प्रचार व प्रसार सारी दुनिया में किया जाए। इस दौरान उनकी तरप से दीवान के अध्यक्ष निर्मल सिंह का संदेश पढ़कर सुनाया गया। क्योंकि दीवान अध्यक्ष इस समय अस्वस्थ चले आ रहे है। दीवान की धर्म प्रचार कमेटी के सदस्य हरि सिंह ने दीवान की तरफ से सिखी प्रचार के लिए श्री गुरु हरगोबिद साहिब जी और गुरु तेग बहादुर साहिब जी के जीवन से संबंधित तैयार की टैली फिल्म और किताब के संबंध में जानकारी को साझा किया। इस दौरान डा जसबीर सिंह साबर ने भी अपने विचार पेश किए।

दीवान की पत्रिका खालसा एडवोकेट का भी विशेष अंक जारी किया। यह पत्रिका भाई वीर सिंह की तरफ से शुरू की गई थी। इस मौके पर दीवान के अधिकारी जसपाल सिंह ढिल्लों, प्रो. वरियाम सिंह, हरमनजीत सिंह, गुरबख्श सिंह बेदी, नवजेत सिंह नारंग, प्रो. हरि सिंह, रजिदर सिंह मरवाह, मनमोहन सिंह, मोहनजी सिंह भल्ला, जोगिदर सिंह अरोड़ा, डा. कुलवंत सिंह, इकबाल सिंह, जसबीर सिंह, अमरदीप सिंह, जसबीर सिंह अजनाला, स्वराज सिंह, डा. धर्मवीर सिंह व हरभजन सिंह आदि मौजूद थे।

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