जासं, अमृतसर: चाइना डोर से पतंग उड़ाने वाले लोग इंसानों और परिदों को लहूलुहान कर रहे हैं। इस खतरनाक चाइना डोर से हर साल अनेकों इंसान जख्मी होते हैं और पक्षियों की भी मौत हो जाती है। गले की फांस बन चुकी इस डोर को पंजाब में 2017 में प्रतिबंधित किया गया, पर अफसोस निचले स्तर के अधिकारियों ने इसकी बिक्री और प्रयोग पर अंकुश लगाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाया।

अब पतंगबाजी का सीजन शुरू होने वाला है और इस डोर ने अमृतसर में शनिवार को एक राहगीर को अपना शिकार भी बना दिया है। ऐसे में शासन-प्रशासन को जगाने के लिए एंटी क्राइम एंड एनिमल प्रोटेक्शन एसोसिएशन ने रविवार को हाल गेट में अनूठे ढंग से प्रदर्शन किया। संस्था के सदस्य जख्मी पक्षी की वेशभूषा में पहुंचे। उन्होंने पक्षी का दर्द बयां करते हुए कहा, हमीं से है यह संसार, न करो हम पर अत्याचार। संस्था ने संदेश दिया कि चाइना डोर का बहिष्कार करते हुए बेजुबानों पर अत्याचार बंद किया जाए।

एसोसिशन के अध्यक्ष डा. रोहण मेहरा ने कहा कि ट्रैफिक पुलिस के एजुकेशन सेल की ओर से यह जागरूकता मुहिम चलाई गई है। इस दौरान जहां संस्था के सदस्यों ने पक्षियों का दर्द बयां किया, वहीं लोगों को भारतीय डोर बांटकर चाइना डोर का बहिष्कार करने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि युवा व बच्चे चाइना डोर की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इस डोर से व्यक्ति की जान जा सकती है। अमृतसर में हर साल सौ से अधिक लोग इस डोर की चपेट में आकर जख्मी हो जाते हैं। ऐसे में उनकी बच्चों के माता-पिता और युवाओं से अपील है कि वे इस डोर का इस्तेमाल न करें। इस अवसर पर ट्रैफिक एजुकेशन सेल के सलवंत सिंह, संस्था के पदाधिकारी अजय शिगारी, हरप्रीत सिंह बाबा, रिधिमा नैयर, विशाल शर्मा, अमन महाजन, हनी मेहरा, सुमन नैयर, राखी बेदी, साजन कुमार, गोपी, प्रशांत बेदी, दविदर कुमार, लक्ष्य शिगारी, डा. दविदर सिंह, डा. तरुण, हरविदर सिंह आदि उपस्थित थे। फ्लाईओवर पर स्कूटर सवार का चेहरा चाइना डोर से कटा, 60 टांके लगाए

ताजा घटना शनिवार को हुई है। यह इस सीजन में पहला मामला है। तरनतारन रोड के फ्लाईओवर पर चाइना डोर की चपेट में आने से स्कूटर सवार मनजीत सिंह का चेहरा बुरी तरह कट गया। आपरेशन के दौरान घायल मनजीत सिंह के साठ टांके लगाए गए। डा. रोहण मेहरा ने कहा कि इस घटना से उन्हें काफी दुख हुआ है। यही नहीं, इस जानलेवा डोर से अब तक घायल होने वाले पक्षियों की मौतों का आंकड़ा तो बहुत बड़ा है। पर लोगों को जागरूक होना होगा।

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