अमृतसर, जागरण संवाददाता : गुरुनानक देव अस्पताल में पीपीई किट्स की खरीद के बाद उपजा विवाद या यूं कहिए घोटाला बहुचर्चित रहा है। 2020 में सांसद निधि फंड से खरीदी गई दो हजार पीपीई किट्स की लागत 42.43 लाख रुपये बताई गई थी। घटिया क्वालिटी की ये किट्स डाक्टर व स्वास्थ्य कर्मियों के पहनते ही फट जाती थीं। लिहाजा डाक्टरों के विरोध के बाद इनकी जांच करवाई गई थी। जांच में यह फेल पाई गईं। जिन तीन कंपनियों से ये किट्स खरीदी गई थीं उनमें से एक कंपनी ने 12 लाख रुपये का चेक लौटा दिया है।

तीन अलग-अलग कंपनियों से ली गई थीं किट 

दरअसल, 2020 मे जब यह कोरोना वायरस चरमावस्था में था, तब पंजाब सरकार ने सरकारी अस्पतालों को अपने स्तर पर पीपीई किट्स खरीदने को कहा था। मरीजों के जीवनरक्षण में जुटे डाक्टरों व स्वास्थ्य कर्मियों को वायरस से बचाने के लिए सरकार ने ऐसा किया। मेडिकल कालेज गुरुनानक देव अस्पताल प्रशासन ने एक करोड़ रुपये की सांसद निधि में से 42.43 लाख रुपये की पीपीई किट्स खरीदी थीं। ये किट्स तीन अलग अलग कंपनियों से ली गई थीं। इसके बाद सरकार ने मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की। इसके अलावा इन किट्स के सैंपल जांच के लिए रक्षा एवं अनुसंधान विभाग नई दिल्ली में भेजे गए थे।

आप सरकार ने ओमप्रकाश सोनी पर विजिलेंस जांच शुरू की

जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि ये किट्स असुरक्षित है और कोरोना से बचाव करने में अक्षम हैं। वास्तविकता है कि पीपीई किट्स की खरीद तत्कालीन उपमुख्यमंत्री व मेडिकल शिक्षा तथा खोज विभाग के मंत्री ओमप्रकाश सोनी के कार्यकाल में की गई थी। आप सरकार ने ओमप्रकाश सोनी पर विजिलेंस जांच शुरू की है। उनकी संपत्ति के दस्तावेज भी मांगे गए थे।

यही पीपीई किट है जो पहनते ही फट जाती थी 

दो कंपनियों को नहीं किया गया था भुगतान गुरुनानक देव अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डा. कर्मजीत सिंह का कहना है कि कंपनी ने बारह लाख रुपये का चेक दिया है। बाकी दो अन्य कंपनियों का भुगतान हमने तभी रोक लिया था जब पीपीई किट्स घटिया क्वालिटी की पाई गई थीं। पटियाला मेडिकल कालेज के डाक्टर कर रहे हैं जांच इस मामले की जांच अब आम आदमी पार्टी की सरकर ने पुन: शुरू करवाई है। इसके लिए पटियाला मेडिकल कालेज के दो डाक्टरों को जिम्मा सौंपा है।

जांच टीम पिछले सप्ताह मेडिकल कालेज में आकर जांच कर चुकी है। हालांकि इस दौरान खरीद से संबंधित कई रिकार्ड गायब पाया गया था। खास बात यह है कि जिन अधिकारियों की निगरानी में इन घटिया पीपीई किट्स की खरीद की गई थी वे सभी सेवानिवृत्त हो चुके हैं और सेवानिवृत्ति से संबंधित सभी लाभ सरकार से ले चुके हैं।

Edited By: Nidhi Vinodiya

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