नितिन धीमान, अमृतसर

इंसानों पर चुपके से हमला करने वाला डेंगू मच्छर अब अब सीना तानकर खड़ा हो गया है। सितंबर महीने में तापमान में आई गिरावट के बाद शहर में भारी तादाद में डेंगू मच्छर पैदा हो चुका है। डेंगू मच्छर के काटने से 230 से अधिक मरीज संदिग्ध बुखार से तड़प रहे हैं, जबकि 49 लोगों को डेंगू रोग की पुष्टि हो चुकी है। यह सरकारी आंकड़ा है, लेकिन निजी लेबोरेट्रीज की रिपोर्ट कुछ और ही बयां कर रही है।

डेंगू मच्छर इंसान को बुखार चढ़ाकर अस्पताल के बिस्तर तक पहुंचाने में सक्षम है। अमृतसर में संदिग्ध बुखार से पीड़ित मरीज लगातार रिपोर्ट हो रहे हैं। निजी लेबोरेट्री की रिपो‌र्ट्स को मानें तो डेंगू पॉजिटिव मरीजों की संख्या 200 से अधिक पहुंच चुकी है, जबकि सरकारी आंकड़ों में महज 49 मरीजों को पॉजिटिव बताया जा रहा है।

वास्तविक स्थिति यह है कि शहर की निजी लेबोरेट्रीज में डेंगू टे¨स्टग के लिए आरसीटी यानी रेपिड कार्ड टेस्ट किया जाता है। स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन के अनुसार आरसीटी टेस्ट मान्य नहीं। विभागीय अधिकारी कहते हैं कि यदि किसी व्यक्ति को पांच दिन लगातार बुखार है तो उसका एनएस1 टेस्ट होगा। यदि बुखार पांच दिन से अधिक समय तक रहता है तो आईजीएम टेस्ट करवाया जाएगा। ये टेस्ट सिर्फ सरकारी मेडिकल कॉलेज में ही होते हैं।

वर्ष 2016 में आरसीटी टेस्ट की रिपोर्ट में भारी खामियां पाए जाने पर केंद्र सरकार ने इसे अमान्य कर दिया था। हालांकि शहर में कुछ निजी लेबोरेट्री वाले आरटीसी टेस्ट कर रहे हैं, लेकिन वे रिपोर्ट में प्रत्यक्ष रूप से डेंगू पॉजिटिव लिख रहे हैं। नियमानुसार यदि निजी लेबोरेट्री संचालकों को मरीज में डेंगू के लक्षण दिखते हैं तो वे रिपोर्ट पर डेंगू संभावित है, लिख सकते हैं। दूसरी तरफ मरीजों को अस्पताल के बिस्तर तक पहुंचाने के लिए कुछ लेबोरेट्री संचालक इस तरह का घिनौना कृत्य कर रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता रा¨जदर शर्मा राजू के अनुसार डॉक्टरों और लेबोरेट्री संचालकों के बीच कमीशन का खेल चल रहा है। डॉक्टर के कहने पर लेबोरेट्री संचालक संदिग्ध बुखार से पीड़ित मरीज को डेंगू पॉजिटिव बता रहे हैं। इसके बाद मरीज को अस्पताल में एडमिट होकर हजारों रुपये खर्च कर डेंगू का उपचार करवाना पड़ता है, जो असल में उसे है ही नहीं।

जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. मदन मोहन के अनुसार आरटीसी अमान्य टेस्ट है। निजी लेबोरेट्री में यदि आरटीसी की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो यह जानकारी तत्काल स्वास्थ्य विभाग को देनी होगी। इसके बाद सरकारी मेडिकल कॉलेज स्थित इंफ्लुएजा लैब से मरीज का एनएस1 व आईजीएम टेस्ट करवाकर इसकी पुष्टि की जाती है। जो लेबोरेट्री संचालक गलत रिपोर्ट जारी कर रहे हैं उनके खिलाफ विभाग कड़ी कार्रवाई करेगा। निजी लेबोरेट्री में मरीजों का आर्थिक शोषण

सरकारी गाइडलाइन के मुताबिक कोई भी निजी लेबोरेट्री संचालक आरटीसी टेस्ट की एवज में मरीज से 600 से अधिक राशि न ली जाए, पर कुछ लेबोरेट्री मालिक 1200 रुपये तक वसूल रहे हैं। केंद्र सरकार ने निजी लेबोरेट्री में एमबीबीएस डॉक्टर की तैनाती के निर्देश जारी किए हैं। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि टेस्ट रिपोर्ट की जांच करने के बाद डॉक्टर इस पर हस्ताक्षर कर सत्यापित करे। दुखद पहलू है कि लेबोरेट्री संचालकों द्वारा एमबीबीएस डॉक्टर नहीं रखे गए। लेबोरेट्री अटेंडेंट ही रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।

मादा मच्छर को पसंद है पुरुषों का खून

डेंगू रोग की जड़ एडीज इंजिप्टी मच्छर है। एडीज इंजिप्टी की मादा मच्छर इंसान के खून से प्रोटीन निकालकर खुद को पोषित करती है। रोचक पहलू यह है कि इस मादा ने जिन 49 लोगों को अपना शिकार बनाया है, उनमें से ज्यादातर पुरुष हैं। मेडिकल कॉलेज से मिले आंकड़ों के अनुसार 49 में से 30 पुरुष, जबकि 19 महिलाएं हैं। इससे स्पष्ट है कि मादा मच्छर को पुरुषों का खून ज्यादा पसंद है। वैसे नर मच्छर शाकाहारी है, जो फूलों की पंखुड़ियों से रस चूसता है।

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डेंगू के लक्षण

डेंगू बुखार एक संक्रमण है, जो एडीज इंजिप्टी मच्छर के काटने से होता है। इंसान के रक्त से प्रोटीन निकालने वाला यह मच्छर संक्रमण छोड़ देता है, जिससे तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पिछले हिस्से में दर्द होता है। मरीज के रक्त से प्लेट्लेट्स का लेवल तेजी से गिरने लगता है। डेंगू से बचने का एकमात्र उपाय है? कि मच्छरों की उत्पत्ति को रोका जाए। इस मौसम में पूरे कपड़े पहनकर रखें। घर में एंटी मास्किटो क्वाइल का प्रयोग करें। डेंगू के लक्षण दिखने पर तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टरी परामर्श के बगैर दवा का सेवन न करें।

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