अटारी (अमृतसर), जेएनएन। पाकिस्तान स्थित गुरुधामों के दर्शन के लिए जाने यहां पहुंचे 130 श्रद्धालुओं को वीजा होने के बावजूद नहीं जाने दिया गया। ये श्रद्धालु एसजीपीसी के माध्‍यम से नहीं जा रहे थे और इसी कारण इनको अटारी रेलवे स्‍टेशन पर दाखिल नहीं होने दिया गया। सिख श्रद्धालुओं को एसजीपीसी की निगरानी और उसकी अगुवाई में ही पाकिस्‍तान जाने दिया जाता है। श्रद्धालुओं के इस जत्‍थे में देश के विभिन्‍न राज्‍यों के 130 सिख श्रद्धालु हैं। पाकिस्‍तान जाने न‍हीं देने पर श्रद्धालुओं ने अटारी रेलवे स्‍टेशन के बाहर नारेबाजी की।

शुक्रवार को भारत के विभिन्न राज्यों से 130 सिख श्रद्धालुओं का जत्था पाकिस्तान जाने के लिए अटारी रेलवे स्टेशन पर पहुंचा। इन श्रद्धालुओं के पास सात दिन का वीजा होने के बावजूद उनको अटारी रेलवे स्टेशन पर नहीं जाने दिया गया। उनको इस दौरान काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

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जत्थे की अगुवाई कर रहे परमजीत सिंह जिजेआनी ने बताया कि श्री गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी दिवस पर गुरुधामों के दर्शन के लिए पाकिस्तानी दूतावास द्वारा 130 श्रद्धालुओं को वीजा दिया गया था। इन श्रद्धालुओं को स्पेशल ट्रेन के जरिए पाकिस्तान जाने की मंजूरी मिली थी। परमजीत के अनुसार, भारत सरकार द्वारा सुरक्षा का हवाला देते हुए स्‍पेशल ट्रेन को भारत में दाखिल नहीं होने दिया गया। जत्थे में बच्चे और 60 से 70 वर्ष के बुजुर्ग भी थे। उनके लिए सुबह से ही खाने पीने तक का कोई प्रबंध नहीं किया गया।

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श्रद्धालुओं को अटारी रेलवे स्टेशन के भीतर नहीं जाने दिया गया। इस कारण वे मेन गेट के बाहर सड़क पर बैठकर ट्रेन का इंतजार करने लगे। इस दौरान जीआरपी, आरपीएफ व कई सुरक्षा एजेसिंयों के जवानों का सख्त पहरा गेट के बाहर लगाया गया था। अटारी रेलवे स्टेशन के चारों तरफ सख्त सुरक्षा प्रबंध किए गए थे ताकि श्रद्धालु भीतर न जा सकें।

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जिजेआनी मुताबिक सिख श्रद्धालुओं को बिना वजह परेशान किया गया है। उन्होंने कहा कि सिखों को संघर्ष करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। श्रद्धालुओं को भारत की तरफ से पाकिस्तानी ट्रेन को आने की मंजूरी नहीं मिलने का पता चला तो उन्होंने स्टेशन के बाहर नारेबाजी कर अपना गुस्‍सा जताया। अटारी रेलवे स्टेशन के कुछ अधिकारियों ने श्रद्धालुओं को शांत करने के लिए कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय अटारी सीमा पर बनी इंटरग्रेटिड चेकपोस्ट के रास्ते जा सकते है। जब श्रद्धालु चेकपोस्ट पर पहुंचे तो उन्‍हें वहां भी निराशा हाथ लगी। वहां के अधिकारियों ने कहा कि उनका वीजा वाघा बार्डर रास्ते का नहीं, ट्रेन के रास्ते जाने का है।

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Edited By: Sunil Kumar Jha

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