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शरद पवार के ट्रस्ट को उद्धव सरकार ने कौड़ि‍यों के भाव दी जमीन, जानें क्‍या है पूरा मामला

राकांपा अध्यक्ष शरद पवार की अध्यक्षता वाले एक ट्रस्ट को उद्धव सरकार ने करोड़ों की कीमत वाली 51 एकड़ जमीन कौड़ि‍यों के मोल में आवंटित कर दी है।

By Arun Kumar SinghEdited By: Thu, 06 Feb 2020 10:08 PM (IST)
शरद पवार के ट्रस्ट को उद्धव सरकार ने कौड़ि‍यों के भाव दी जमीन, जानें क्‍या है पूरा मामला

राज्य ब्यूरो, मुंबई। राकांपा अध्यक्ष शरद पवार की अध्यक्षता वाले एक ट्रस्ट को उद्धव सरकार ने करोड़ों की कीमत वाली 51 एकड़ जमीन कौड़ि‍यों के मोल में आवंटित कर दी है। सरकार बनने के बाद ही उद्धव ने इस संस्थान का दौरा किया था।

51 एकड़ का भूखंड किया आवंटित

उद्धव मंत्रिमंडल ने बुधवार को सरकार के ही दो विभागों की आपत्तियों को दरकिनार कर जालना स्थित 51 एकड़ का भूखंड वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट (वीएसआइ) को आवंटित करने का निर्णय किया। इस भूखंड की बाजार भाव पर कीमत करीब 10 करोड़ आंकी गई है। उद्धव सरकार ने 'विशेष मामला' बताते हुए यह आवंटन किया है। उसने राजस्व विभाग को कानून विभाग से सलाह कर इस आवंटन की शर्तें तय करने का निर्देश दिया है। इस ट्रस्ट में वर्तमान महाराष्ट्र विकास अघाड़ी के और भी कई वरिष्ठ मंत्री सदस्य हैं। इनमें उप मुख्यमंत्री अजीत पवार सहित राकांपा कोटे के मंत्री दिलीप वलसे पाटिल, जयंत पाटिल एवं राजेश टोपे तथा कांग्रेस कोटे के मंत्री बालासाहब थोराट एवं सतेज पाटिल शामिल हैं।

उद्धव सरकार ने बताया 'विशेष मामला'

जालना स्थित यह भूखंड कृषि विभाग ने अधिगृहीत किया था। 1975 में बने वीएसआइ को यह भूखंड आवंटित करने का प्रस्ताव 2013 में तत्कालीन कांग्रेस-राकांपा गठबंधन सरकार के समय ही पेश किया गया था। 2014 में फडणवीस सरकार आने के बाद यह भूखंड कृषि विभाग ने राजस्व विभाग को सौंप दिया था। नवंबर, 2019 में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में कांग्रेस-राकांपा-शिवसेना गठबंधन सरकार बनने के कुछ ही दिन बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट का दौरा किया था। माना जाता है कि उसी दौरान ट्रस्ट ने उनसे यह भूखंड सस्ती दरों पर ट्रस्ट को सौंपने का आग्रह किया था। ट्रस्ट का कहना है कि उसके द्वारा इस भूखंड पर गन्ने की विभिन्न प्रजातियों पर शोध करके यहां तैयार गन्ना किसानों को दिए जाएंगे। हालांकि राज्य के महाधिवक्ता एवं वित्त विभाग की तरफ से इस भूखंड के आवंटन पर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं, लेकिन उद्धव सरकार ने 'विशेष मामला' बताते हुए इसे ट्रस्ट को आवंटित करने का निर्णय कर लिया है।