लखनऊ, जेएनएन। उत्तर प्रदेश के बिजलीकर्मियों के पीएफ घोटाला में गिरफ्तारी का दौर जारी है। उत्तर प्रदेश के इस बड़े घोटाले की जांच कर रही आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू)नेशुक्रवार को दो चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) को गिरफ्तार किया है।

ईओडब्ल्यू ने यूपीपीसीएल के पीएफ घोटाले में अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें डीएचएफएल के पूर्व रीजनल सेल्स मैनेजर अमित प्रकाश भी हैं।

उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों के करोड़ों के भविष्य निधि घोटाले के मामले में आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) ने दो और चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) को गिरफ्तार किया है। इनकी भूमिका ब्रोकर फर्म के जरिये कमीशन की रकम ठिकाने लगवाने में सामने आई है। दोनों सीए आरोपित सचिव ट्रस्ट पीके गुप्ता के बेटे अभिनव गुप्ता के से जुड़े थे।

डीजी ईओडब्ल्यू डॉ.आरपी सिंह ने बताया कि जांच में अहम साक्ष्य सामने आने पर ईओडब्ल्यू ने सीए इशांत अग्रवाल व मनोज गोयल को गिरफ्तार किया है। कुछ अन्य आरोपितों की भूमिका की भी जांच कराई जा रही है। पीएफ घोटाले में ईओडब्ल्यू इससे पूर्व कुल 12 आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिसमें सीए श्याम अग्रवाल भी शामिल है। अब आरोपितों की संख्या 14 हो गई है, जिनमें तीन सीए हैं। उल्लेखनीय है कि 4122.70 करोड़ के भविष्य निधि घोटाले में हजरतगंज कोतवाली में एफआइआर दर्ज कराई गई थी। शासन के आदेश पर इस मुकदमे की विवेचना ईओडब्ल्यू की रही है। डीजी ईओडब्ल्यू के स्तर से प्रकरण में चल रही विवेचना की लगातार मानीटङ्क्षरग की जा रही है। ईओडब्ल्यू ब्रोकर फर्मों से जुड़े कई बैंक खातों की भी पड़ताल कर रही है।

ईओडब्ल्यू ने यूपीपीसीएल के पीएफ घोटाले में शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए डीएचएफएल के पूर्व रीजनल सेल्स मैनेजर अमित प्रकाश समेत सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इन लोगों में ब्रोकर फर्मो के संचालक और चार्टड एकाउन्टेंट भी शामिल हैं। पकड़े गए इन लोगों के कुछ दिन पहले ईओडब्ल्यू ने बयान लिये थे, फिर कई पुख्ता सुबूत हाथ लगने के बाद यह कार्रवाई की। इस मामले में अब तक 12 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। ईओडब्ल्यू के डीजी आरपी सिंह के मुताबिक जब डीएचएफएल में यूपीपीसीएल ने गलत तरीके से निवेश किया था, तब अमित प्रकाश लखनऊ शाखा के तत्कालीन रीजनल सेल्स मैनेजर थे।

कई कथित फर्मों को ब्रोकर फर्मो के रूप में रजिस्टर्ड कराने में अमित प्रकाश ने अहम भूमिका निभायी थी। इस काम में अमित ने सचिव प्रवीण गुप्ता और उनके बेटे अभिनव से साठगांठ कर रखी थी। इनके अलावा दो ब्रोकर फर्मो के संचालक मनोज कुमार अग्रवाल, विकास चावला, विकास का सीए श्याम अग्रवाल, फर्जी फर्म बनाने वाले संजय कुमार, पंकज कुमार गिरि उर्फ नीशू और कमीशन की बंदरबांट करने वाले अरुण जैन भी गिरफ्तार हुए हैं। इन सभी ने 22 अरब रुपये के घोटाले में अलग-अलग भूमिका निभाई।

अब तक 12 लोग गिरफ्तार

इस मामले में पूर्व एमडी एपी मिश्र, निदेशक वित्त सुधांशु कुमार त्रिवेदी, सचिव प्रवीण कुमार गुप्ता, इनका बेटा अभिनव गुप्ता, अभिनव का साथी आशीष चौधरी पहले की पकड़े जा चुके हैं। सबसे पहले निदेशक और सचिव की गिरफ्तारी हुई थी। इसके बाद इस घोटाले की रोजाना पर्ते खुलती गई। फिर सबसे बड़ी गिरफ्तारी पूर्व एमडी एपी मिश्र के रूप में हुई। कुछ दिन पहले ही इस मामले में तत्कालीन सीएमडी संजय अग्रवाल से भी दिल्ली में ईओडब्ल्यू ने पूछताछ की थी। अभी कुछ और लोगों से भी पूछताछ होनी है। दावा किया जा रहा है कि जल्दी ही कुछ और लोग पकड़े जाएंगे। 

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