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हैदराबाद, पीटीआइ। कर्नाटक में हुए विधानसभा चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में वहां राष्ट्रपति शासन लागू करना ही बेहतर विकल्प साबित होता। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएस कृष्णमूर्ति ने कहा है कि राज्य में किसी भी पार्टी को सरकार बनाने लायक बहुमत नहीं मिला।

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा, 'कर्नाटक में जो स्थिति है उसमें यदि कोई भी पार्टी सरकार बनाने की स्थिति में नहीं थी तो वैसी स्थिति में राष्ट्रपति शासन लागू करना ही बेहतर रहता।' उन्होंने उल्लेख किया कि तीनों पार्टियों भाजपा, कांग्रेस और जदएस ने बहुमत हासिल नहीं किया। ऐसे में राज्यपाल वजुभाई वाला को तीन महीनों के लिए राष्ट्रपति शासन लागू कर देना चाहिए था। यदि इस समय सीमा में भी सरकार का गठन नहीं हो पाता तो उसके बाद वह विधानसभा भंग करने की सिफारिश कर देते और फिर से चुनाव कराया जाता।

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा, 'मैं यह नहीं कह रहा हूं कि राष्ट्रपति शासन ही समाधान है। लेकिन इससे समय और पैसे की बर्बादी, विधायकों की खरीद-फरोख्त और मंत्रिपद के लिए सौदेबाजी जैसी अन्य चीजों को टाला जा सकता था।' उन्होंने मौजूदा चुनाव प्रणाली को भी बदलने की वकालत की।

कांग्रेस विधायक ने ही खोली पार्टी के दावों की पोल
कर्नाटक में सियासी उठा-पटक थमने का नाम नहीं ले रही है। कांग्रेस ने भाजपा पर कर्नाटक में सरकार बनाने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्‍त की आंशका जताई थी। कांग्रेस द्वारा ऑडियो क्लिप भी जारी की गई, जिसमें कथित तौर पर कांग्रेस विधायकों की पत्नियों को पैसों का ऑफर दिया गया। लेकिन कांग्रेस के विधायक शिवराम हेब्‍बर ने ही पार्टी के इन दावों को झूठा करार दे दिया है। कर्नाटक की येल्लापुर विधानसभा से कांग्रेस के विधायक शिवराम हेब्बर ने एक कथित स्टिंग का जिक्र करते हुए दावा किया है कि इसमें उनकी पत्नी की आवाज नहीं है। उन्‍होंने फेसबुक के जरिए अपनी पूरी बात जनता के सामने रखी है।

भाजपा का कांग्रेस पर जोरदार हमला
भाजपा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अमित शाह ने कर्नाटक चुनाव के नतीजे का मामला उठाते हुए कांग्रेस पर जोरदार हमला किया। उन्‍होंने कर्नाटक की जनता और कार्यकर्ताओं का आभार जताया और कहा, ‘कर्नाटक की जनता ने कांग्रेस के खिलाफ जाकर भाजपा को जनादेश दिया।' शाह ने कहा कि हम पर हार्स ट्रेडिंग का आरोप लगा, लेकिन कांग्रेस ने पूरा अस्तबल बेच खाया है। हमारे पास अधिकार था इसलिए हमने सरकार बनाने का दावा पेश किया था। गोवा और मणिपुर में कांग्रेस ने पहले सरकार बनाने का दावा नहीं किया था। कांग्रेसी आराम कर रहे थे, तब हमने दावा किया। हम अगर खरीद-फरोख्‍त करते तो क्‍या ऐसा हाल होता?

 

Posted By: Tilak Raj

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