राज्य ब्यूरो, कोलकाता : गृह मंत्री अमित शाह द्वारा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर प्रवासी श्रमिकों को लेकर आने वाली ट्रेनों को यहां नहीं आने देने के आरोपों के बाद तृणमूल कांग्रेस ने शनिवार को पलटवार करते हुए कहा कि इस तरह की विभाजनकारी राजनीति करना भाजपा के डीएनए में है। तृणमूल के राष्ट्रीय प्रवक्ता व राज्यसभा सदस्य डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि वैश्विक महामारी के समय में भी इस तरह की विभाजनकारी राजनीति भाजपा ही कर सकती है और ऐसा करना आपके (शाह के) डीएनए में है। तृणमूल नेता ने शाह को नसीहत दी कि इस नेशनल इमरजेंसी के समय आपको आराम करना चाहिए। बंगाल एक सेंसटिव स्टेट है, लेकिन आप राजनीति कर रहे हैं। 

ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में डेरेक ने कहा, 'गृह मंत्री ने आज एक पत्र भेजा है। आखिर वह ऐसा क्यों कर रहे हैं। क्यों आप बंगाल के लिए परेशानी खड़ी कर रहे हैं। आपने गुजरात में डॉक्टर भेजे, लेकिन यहां आप सीआरपीएफ और इंटर मिनिस्ट्रियल टीम भेज रहे हैं क्यों? इस कठिन समय में जब हमारा लक्ष्य एकसाथ मिलकर कोरोना से लड़ने का है, आप क्यों बांग्लादेशी मुद्दे को उठा रहे हैं? आप जब पत्र लिख रहे थे तो क्या उस समय नींद में थे और सारे फैक्ट्स गलत हैं। इस तरह की विभाजनकारी राजनीति करना आपके डीएनए में है।' उल्लेखनीय है कि गृह मंत्री शाह ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिख कर कहा कि बंगाल सरकार प्रवासी मजदूरों को लेकर जानेवाली ट्रेनों को राज्य पहुंचने की अनुमति नहीं दे रही है, जिससे श्रमिकों के लिए और दिक्कतें खड़ी हो सकती हैं। देश के विभिन्न हिस्सों से अलग-अलग गंतव्य स्थानों तक प्रवासी मजदूरों को ले जाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा चलायी जा रही ‘श्रमिक स्पेशल’ ट्रेनों का संदर्भ देते हुए गृह मंत्री ने पत्र में कहा कि केंद्र ने दो लाख से ज्यादा प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने की सुविधा प्रदान की है। 

बंगाल को बदनाम करने के लिए अपनाए जा रहे हैं तरह-तरह के हथकंडे : काकोली 

वहीं, गृह मंत्री की चिट्ठी को लेकर तृणमूल की लोकसभा सांसद डॉक्टर काकोली घोष दस्तीदार ने भी निशाना साधते हुए कहा कि बंगाल सरकार को अपमानित व बदनाम करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाये जा रहे हैं।‌ उन्होंने कहा कि प्रवासी मजदूरों के हित की बात शाह की ओर से पहले नहीं की गई और न ही उनके घर वापसी से लिए कदम उठाये गए। केंद्र सरकार खुद गरीबों और अमीरों में भेदभाव कर रही है। उन्होंने कहा, 'विदेशों से जहां अमीर लोगों को हवाई जहाज से लाने की व्यवस्था की गई, वहीं प्रवासी श्रमिक सैकड़ों किलोमीटर धूप में खाली पेट पैदल चलने को मजबूर हैं। सरकार को उनकी कोई चिंता नहीं है। औरंगाबाद में ट्रेन से कटकर 16 प्रवासी श्रमिकों की मौत हो गई। इसकी जिम्मेदारी केंद्र सरकार को लेनी चाहिए।'

तृणमूल सांसद ने कहा कि कम से कम झूठ का सहारा लेकर जनता को गुमराह करना सही नहीं है। उन्होंने कहा, ममता बनर्जी ही देश की पहली मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने सर्वप्रथम 18 राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र भेजकर प्रवासी मजदूरों का ख्याल रखने की अपील की थी।‌ बंगाल में भी दूसरे राज्यों के प्रवासी मजदूरों के लिए 711 शिविर लगाये गये, जो दो लाख से ज्यादा मजदूरों का सहारा बना हुआ है। मौजूदा समय में कोरोना के प्रकोप से लड़ने की जरुरत है, न कि राजनीति करने की।

Posted By: Vijay Kumar

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