पटना, जेएनएन। चुनावी रणनीतिकार (Election Strategist) व जनता दल यूनाइटेड के पूर्व राष्‍ट्रीय उपाध्‍यक्ष (Ex JDU Vice President) प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। इन दिनों वे कंटेंट चोरी (Content Theft) और जालसाजी (Forgery) के आरोपों से घिरे हैं। इस मामले में उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे में कोर्ट ने उन्‍हें न तो अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) दी, न ही उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई।

प्रशांत किशोर की मुश्किलें इन दिनों बढ़ गईं हैं। राष्‍ट्रीय नागरिकता रजिस्‍टर (NRC), राष्‍ट्रीय जनसंख्‍या रजिस्‍टर (NPR) व नागरिकता संशोधन कानून (CAA) पर पार्टी लाइन से हटकर अपने स्‍टैंड के कारण जेडीयू ने उन्‍हें बाहर का रास्‍ता दिखा दिया। इसके बाद कांग्रेस (Congress) नेता शाश्‍वत गौतम (Sashwat Gautam) ने कंटेंट चोरी व जालसाजी का आरोप लगाया।

कोर्ट ने खारिज की अग्रिम जमानत याचिका

कंटेंट चोरी व जालसाजी के मुकदमे में जिला एवं सत्र न्यायाधीश रुद्र प्रकाश मिश्रा ने मंगलवार को दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद आरोपित प्रशांत किशोर को अग्रिम जमानत देने से इन्कार कर दिया। कोर्ट ने प्रशांत किशोर की गिरफ्तारी पर रोक लगाने से भी इन्कार कर दिया।

अग्रिम जमानत आवेदन का विरोध करते हुए जिला लोक अभियोजक विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि प्रशांत किशोर ने दूसरे के आइडिया को चुराकर आर्थिक और राजनीतिक लाभ प्राप्त किया है। अगर उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगती है, तब वे साक्ष्य मिटाने का प्रयास करेंगे। वहीं, प्रशांत किशोर की ओर से कोर्ट से अग्रिम जमानत आवेदन का निष्पादन होने तक गिरफ्तारी पर रोक लगाने का आग्रह किया गया।

अग्रिम जमानत पर अब सात मार्च को सुनवाई

कोर्ट ने पाटलिपुत्र थाना से मुकदमे से संबंधित केस डायरी की मांग की। इसके बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए मुकदमे को अपर जिला व सत्र न्‍यायाधीश 12 (ADJ -12) के पास भेज दिया, जहां सात मार्च को अग्रिम जमानत आवेदन पर सुनवाई होगी।

पीके पर कंटेंट व आइडिया चुराने का आरोप

विदित हो कि शाश्वत गौतम ने प्रशांत किशोर (PK) पर आरोप लगाया है कि उनका 'बात बिहार की' (Baat Bihar Ke) का कॉन्सेप्ट नकली है। उन्होंने 'बिहार की बात' (Bihar Ke Baat) से मिलता-जुलता 'बात बिहार की' डोमेन नेम बनाकर कंअेंट व आइडिया चुराया है। शाश्वत के अनुसार उन्होंने 'बिहार की बात' नाम से एक प्रोजेक्ट बनाया था और इसे लॉन्च करने ही वाले थे कि इससे जुड़े उनके कर्मचारी ओसामा ने इस्तीफा देकर सारा कंटेंट प्रशांत किशोर को दे दिया। इसके बाद प्रशांत किशोर ने प्रदेश के युवाओं को राजनीति से जोड़ने के लिए 'बात बिहार की' नाम से एक कैंपेन शुरू किया है।

शाश्‍वत ने दर्ज की जालसाजी की एफआइआर

शाश्‍वत ने प्रशांत किशोर के खिलाफ कंटेंट चोरी व जालसाजी की एफआइआर (FIR) भी पटना के पाटलिपुत्र थाने में दर्ज करायी। इसके खिलाफ प्रशांत किशोर ने कोर्ट में अग्रिम जमानत की गुहार लगाई, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।

प्रशांत किशोर ने आरोपों को किया खारिज

आरोपों की बाबत प्रतिक्रिया में ओसामा ने शाश्वत गौतम से सबूत मांगे हैं। ओसामा ने बताया कि उनकी प्रशांत किशोर से मुलाकात पटना यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव के दौरान तब हुई थी, जब उन्‍होंने चुनाव में अहम भूमिका निभाई थी। ओसामा के अनुसार वे 26 अक्टूबर 2019 से ही 'बिहार की बात' को चला रहे हैं। इस नाम से कई फेसबुक पेज भी हैं। ऐसे में कोई इस कॉन्‍सेप्‍ट पर अपना दावा नहीं कर सकता। प्रशांत किशोर ने भी कहा कि शाश्वत गौतम ने सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए ऐसा किया है।

Posted By: Amit Alok

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