जयपुर, नरेन्द्र शर्मा । राजस्थान के पर्यटन मंत्री  पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह अपने विभाग व्याप्त भ्रष्टाचार से परेशान है । विश्वेंद्र सिंह चाहते हैं कि राजस्थान पर्यटन विकास निगम अर्थात आरटीडीसी में व्याप्त भ्रष्टाचार की जांच एक स्वतंत्र संस्था द्वारा कराई जानी चाहिए।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को लिखे पत्र में विश्वेंद्र सिंह ने अपने विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार पर पीड़ा जताते हुए कहा कि वित्तीय अनियमितता व भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति स्थापित करने के लिए विस्तृत जांच होनी चाहिए । प्रदेश में भ्रष्टाचार की जांच करने वाले राज्य पुलिस में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो पर विश्वेंद्र सिंह को विश्वास नहीं है। इस कारण वे चाहते हैँ कि डिलॉयट इंडिया,के.पी.जे.एम,पी.डब्लयू.सी एवं अर्नेस्ट एंड यंग आदि में से किसी एक संस्था से आरटीडीसी में व्याप्त भ्रष्टाचार की जांच कराई जानी चाहिए।

मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि कोविड-19 के कारण राज्य के पर्यटन उधोग को क्षति उठानी पड़ रही है। राज्य को पर्यटन से मिलने वाले राजस्व में कमी आई है। ऐसे में आरटीडीसी सहित सभी सरकारी विभागों व स्वायत्तशासी संस्थाओं का दायित्व बनता है कि वे अपने खर्चों में कमी करे। आरटीडीसी में वित्तीय अनियमितता के आरोप समय-समय पर लगते रहे हैँ। उन्होंने कहा कि मुझ तक आरटीडीसी में भ्रष्टाचार की शिकायत पहुंचती है। अत: यह आवश्यक है कि आरटीडीसी की वित्तीय गतिविधियों की एक स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए।

विश्वेंद्र सिंह ने दैनिक जागरण से बातचीत में सीएम को लिखे पत्र की पुष्टि करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ मेरा अभियान जारी रहेगा। आरटीडीसी सरकार की एक स्वायत्त संस्था है,जिसका मैं मंत्री होने के नाते वित्तीय अनियमितता नहीं होने दे सकता।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी विश्वेंद्र सिंह ने पर्यटन विभाग में 45 करोड़ के लाइट एंड साउंड का ठेका एक कंपनी को दिए जाने को लेकर नाराजगी जताई थी। पर्यटन विभाग के तत्कालीन निदेशक पद पर तैनात आईएएस अधिकारी के.बी.पंड्या के साथ उनका लंबा विवाद चला था। इस मामले में विश्वेंद्र सिंह की नाराजगी इस बात को लेकर थी कि अधिकारियों ने उनकी स्वीकृति के बिना लाइट एंड साउंड के पांच कार्यों के लिए एकल निविदा जारी कर दी थी।

भरतपुर पूर्व राजपरिवार के सदस्य विश्वेंद्र सिंह अपनी बेबाक बयानबाजी को लेकर हमेशा चर्चा में रहते हैं । पिछले दिनों भरतपुर के सरकारी अस्पताल में एक प्रसुता का इलाज नहीं होने पर उन्होंने अपने ही साथी चिकित्सा राज्यमंत्री सुभाष गर्ग को घेरा था। 

Posted By: Preeti jha

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