जयपुर, जेएनएन। राजस्थान विधानसभा में मंगलवार को बजरी खनन के मामले में जम कर हंगामा हुआ। सरकार के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने पूरक सवाल पूछने चाहे तो स्पीकर सी.पी.जोषी ने संबंधित सवाल ही पूछने की बात कह कर उपनेता प्रतिपक्ष को रोक दिया। इस पर प्रतिपक्ष के सदस्यों ने हंगामा कर दिया और वैल में आ कर काफी देर तक नारेबाजी की और यह कहते हुए बहिगर्मन कर गए कि यदि हम प्रश्‍न ही नहीं पूछ सकते तो हम प्रश्‍नकाल का बहिष्कार करेंगे, हालांकि बाद में उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड ने कहा कि हम इस बारे में स्पीकर से बात करेंगे और यदि उनका यही रवैया जारी रहा तो हम प्रश्‍नकाल में अपना विरोध जारी रखेंगे।

विधानसभा में मंगलवार को उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड ने प्रदेश में बजरी के अवैध खनन के बारे में सवाल पूछा था। इसका जवाब देते हुए खान मंत्री प्रमोद जैन भाया ने बताया कि बजरी खनन के लिए अभी दस लीज डीड दी गई है। इसके अलावा सरकार बजरी संकट से निपटने के लिए मैन्युफेक्चर्ड सैंड की नीति पर भी विचार कर रही हैै। इस बारे में हम जल्द ही नीति जारी करेंगे। इसके साथ ही बजरी खनन पर लगी रोक को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील से पैरवाी कराई जाएगी।

सरकार के जवाब के बाद उपनेता प्रतिपक्ष ने पूरक प्रश्‍न के तौर पर यह जानना चाहा कि अक्टूबर 2012 से मार्च 2013 के बीच किस आधार पर खनन पटटे जारी किए गए और इससे कितनी आय हुई। इसी दौरान स्पीकर सी.पी. जोषी ने राठौड को यह कहते हुए रोक दिया कि वे अपने सवाल से जुडा हुआ ही पूरक प्रश्‍न पूछें।

राठौड ने कहा कि यदि इस तरह चलेगा तो हम सवाल पूछना ही बंद कर देंगे। इस बात को लेकर राठौड और स्पीकर के बीच बहस भी हो गई। इसी दौरान स्पीकर ने अगला सवाल पुकार लिया। इस पर प्रतिपक्ष के सदस्य विरोध करते हुए वैल में आ गए और सरकार को बचाना बंद करो, लोकतंत्र की हत्या नहीं सहेंगे जैसे नारे लगाते हुए सुनाई दिए।

इस दौरान प्रश्‍नकाल की कार्रवाई चलती रही और प्रतिपक्ष के सदस्यों के सवालों के जवाब नहीं आ पाए। इस बीच प्रश्‍नकाल का समय समाप्त हो गया और नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया व प्रतिपक्ष के सदस्य यह कहते हुए वाॅकआउट कर गए कि यदि हम प्रश्‍न ही नहीं पूछ सकते तो हम प्रश्‍नकाल का बहिष्कार करेंगे। 

बाद में सदन के बाहर मीडिया से बात करते हुए उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड ने कहा कि उन्होंने बजरी के अवैध खनन का सवाल उठाया था और सरकार के पास इसका कोई जवाब नहीं था। ऐसा लग रहा था कि सरकार बजरी का अवैध खनन रोकने के लिए गम्भीर नहीं है, लेकिन हमें पूरक सवाल नहीं पूछने दिया गया। उन्होंने कहा कि हमने तय किया है कि हम स्पीकर से मुलाकात करेंगे और यदि उनका यही रवैया जारी रहा तो हम प्रश्‍नकाल में हमारा विरोध जारी रखेंगे।  

Posted By: Preeti jha

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