नई दिल्ली, प्रेट्र। अगर तैयारियां पूरी हुई तभी चार राज्यों के साथ तेलंगाना के विधानसभा चुनाव होंगे। ऐसी स्थिति में राज्य में जनवरी या फरवरी में चुनाव कराए जा सकते हैं, क्योंकि पांच मार्च 2019 तक हर हाल में वहां नई विधानसभा का गठन सुनिश्चित करना होगा।

यह बात मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओपी रावत ने बुधवार को कही। राज्य में जल्द चुनाव कराने के लिए सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति ने पिछले सप्ताह विधानसभा भंग कर दी थी।

छह महीने में राज्य में नई विधानसभा के गठन की बाध्यता पर रावत ने कहा कि ऐसा कोई कानून नहीं है। छह महीने की बाध्यता सुप्रीम कोर्ट के एक कानून के आधार पर है। बता दें कि शीर्ष कोर्ट का कहना है कि राज्य विधानसभा के विघटन छह महीने में वहां दूसरी विधानसभा का गठन कर हो जाना चाहिए।

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तेलंगाना में चुनावी कार्यक्रमों के संबंध में रावत ने कहा कि जैसे ही राज्य में विधानसभा भंग हुई हमने वहां के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) से तुरंत तैयारियां शुरू करने को कहा। यह ठीक है कि सीईओ ने तैयारियों के संबंध में सकारात्मक रिपोर्ट दी है, लेकिन हम वहां भेजी गई टीम की रिपोर्ट का इंतजार करेंगे।

जब उनसे चार राज्यों के साथ तेलंगाना में चुनाव के संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हम यह नहीं कह सकते हैं। क्योंकि चार राज्यों में चुनावी तैयारियां दो महीने पहले से चल रही हैं। दिसंबर मध्य में चुनाव कराने पर रावत ने कहा कि इससे वहां चुनाव परिणाम प्रभावित हो सकते हैं।

दिसंबर के दूसरे सप्ताह में पांच राज्यों में एक साथ होंगे चुनाव 
चुनाव आयोग से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक मध्य प्रदेश, मिजोरम, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में एक साथ दिसंबर के दूसरे सप्ताह में चुनाव कराए जा सकते हैं। पिछले चुनाव कार्यक्रमों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में जहां दो चरणों में चुनाव होने थे वहीं बाकी राज्यों में एक ही चरण में चुनाव पूरे होते।

बता दें कि तेलंगाना में विधानसभा चुनावों की तैयारियों के सिलसिले में शनिवार को चुनाव आयोग ने वहां अंतिम मतदाता सूची आठ अक्टूबर को प्रकाशित करने की बात कही थी।

 

Posted By: Arun Kumar Singh