नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। उन्नाव दुष्कर्म मामले में तीस हजारी कोर्ट में मंगलवार को कुलदीप सिंह को सजा देने के मामले पर बहस होगी। अदालत ने सजा पर बहस के लिए 19 दिसंबर का दिन तय किया था, लेकिन दोषी के वकील ने मंगलवार को ही बहस करने की अपील की। अदालत ने इसे मान लिया है।

तीस हजारी अदालत ने जांच में कई पहलुओं पर लापरवाही बरतने के लिए सीबीआइ को लताड़ लगाई। कोर्ट ने कहा कि सीबीआइ ने साबित किया कि पीड़िता नाबालिग थी और सेंगर पर पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा सही चलाया गया था। पीड़िता द्वारा उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखने के बाद उसके परिवार के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए और उनमें सेंगर की भूमिका भी देखी गई।

बता दें कि अदालत ने कुलदीप सेंगर को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (दुष्कर्म) और पोक्सो एक्ट की धारा 5 सी (लोक सेवक द्वारा बच्चे के खिलाफ भयावह यौन उत्पीड़न) और 6 (जो बच्चे के खिलाफ भयावह यौन उत्पीड़न करे उसे कम से 10 साल और अधिकतम उम्रकैद और जुर्माना अदा करने की सजा) के तहत दोषी करार दिया है।

न्यायाधीश धर्मेश शर्मा की अदालत ने पीडि़ता को नाबालिग मानते हुए सेंगर को पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी पाया। सह आरोपित शशि सिंह को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। फैसला सुनाए जाने के दौरान शशि रोने लगी और बेहोश हो गई। दोषी करार दिए जाने पर कुलदीप सेंगर भी कोर्ट रूम में रोने लगा।

कोर्ट के फैसले के बाद पीड़िता के वकील धर्मेंद्र कुमार मिश्रा ने कहा कि इस केस को लड़ने के लिए कई चुनौतियों का सामना किया है। यह सच की जीत है और पीड़िता को इंसाफ मिलने की शुरुआत है। वहीं दोषी के वकील सेंगर के वकील तनवीर अहमद मीर ने कहा कि हम फैसले के खिलाफ अपील करेंगे। यह केस यहीं खत्म नहीं हो गया है।

इन धाराओं के तहत दोषी 

(कुलदीप ने आवास पर किया दुष्कर्म)

सीबीआइ के आरोपपत्र के मुताबिक नाबालिग के साथ 4 जून 2017 को कुलदीप सेंगर ने अपने आवास पर दुष्कर्म किया था। शशि सिंह पर आरोप था कि वह पीडि़ता को नौकरी दिलाने के बहाने सेंगर के घर लेकर गई थी।

रोजाना हुई सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मामले को दिल्ली की तीस हजारी अदालत में स्थानांतरित किया गया। गत 5 अगस्त से इस पर रोजाना सुनवाई हुई। कई बार सरकारी छुट्टी के दिन भी केस सुना गया। यहां तक कि पीडि़ता की नाजुक हालत को देखते हुए तीन दिन तक एम्स में भी अदालत लगी।

कई मामले अभी विचाराधीन

उन्नाव कांड से जुड़ा सामूहिक दुष्कर्म मामला, पीडि़ता के पिता की हत्या और पीडि़ता को ट्रक से कुचलने की कोशिश के मामले अभी विचाराधीन हैं।

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