सोनीपत [संजय निधि]। हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसानों के बीच सीमा विवाद एक बार फिर गरमाने लगा है। दोनों प्रदेश के अधिकारी सर्वे ऑफ इंडिया के अधिकारियों के साथ मिलकर इस विवाद का स्थायी हल निकालने की दिशा में काम कर रहे हैं, लेकिन इस विवाद के पीछे सबसे बड़ा कारण है, यमुना की धारा बदलना। यमुना दोनों प्रदेश के बीचों-बीच बहती है और एक तरह से इसे ही हरियाणा-उत्तर प्रदेश की सीमा मानी जाती है।

सीमा विवाद निपटाने के लिए वर्ष 1967 में तत्कालीन गृह मंत्री उमा शंकर दीक्षित के नेतृत्व में एक कमेटी बनी थी। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर दोनों प्रदेशों के बीच सीमा का निर्धारण किया गया था और दोनों प्रदेशों की सीमा पर यमुना किनारे पिलर गड़वाए गए थे। यमुना के अंदर दोनों ओर से होने वाले बेतरतीब खनन और अन्य प्राकृतिक कारणों से यमुना अपनी धार बदलती रहती है।

यमुना की धारा बदलने से हरियाणा के किसानों की जमीन उत्तर प्रदेश में चली गई और उत्तर प्रदेश के किसानों की जमीन हरियाणा की सीमा में चली आई। भूमि कटाव और अन्य कारणों से अवार्ड के तहत लगे पिलर भी गायब होते चले गए। इसको लेकर दोनों प्रदेश के किसान सुप्रीम कोर्ट में गए और अब कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखते हुए पैमाइश के बाद सेटलमेंट के आदेश दिए हैं। इस आदेश को लेकर सोनीपत प्रशासन ने खुर्रमपुर गांव की सीमा में उत्तर प्रदेश के किसानों के कब्जे से कुछ जमीन मुक्त भी कराई, जिसके बाद फिर से विवाद शुरू हो गया।

सीमा पर लगाए गए पिलरों की शुरू हुई खोज

दीक्षित अवार्ड के बाद लगाए गए पिलरों की खोज अब शुरू की गई है। सुप्रीम कोर्ट के पैमाइश के आदेश के बाद सर्वे ऑफ इंडिया के साथ मिलकर दोनों प्रदेश के अधिकारियों ने पिलरों की खोज और उसकी जांच के लिए महिम शुरू की है। इसमें पता चला कि उत्तर प्रदेश के बागपत की सीमा में करीब 236 पिलर लगाए गए थे, जबकि हरियाणा की सीमा में सोनीपत और पानीपत की सीमा में लगभग 472 पिलर गाड़े गए थे। जांच टीम में शामिल अधिकारी के अनुसार इनमें से अधिकांश पिलर गायब हो गए हैं।

वहीं, यूपी-हरियाणा सीमा विवाद के निस्तारण के मकसद से हो रहे संयुक्त सर्वे के तीसरे दिन बागपत समेत दोनों राज्यों के आठ गांवों का सर्वे हुआ। टीम को मात्र तीन पिलर मिले, जिनमें से एक जमीन से उखड़ा हुआ था। सोनीपत के राजस्व विभाग की टीम नहीं पहुंची तो यहां की टीम ने सर्वे शुरू कर दिया। सबसे पहले झुंडपुर खादर में खेवड़ा गांव के किसान राजे के खेत में बाउंड्री पिलर (नंबर-1220) मिला। थोड़ा आगे चलने पर दिल्ली के मुंडका के किसान राकेश के खेत में दूसरा बाउंड्री पिलर (नंबर-1218) मिला। इसी गांव के खादर में एक पिलर जमीन से उखड़ा हुआ मिला, जिसको हरियाणा के किसान ने इंजन के फाउंडेशन के रूप में इस्तेमाल कर रखा था।

सर्वे के तीसरे दिन तीन और पिलर मिले

वर्तमान रेवेन्यू रिकॉर्ड के अनुसार यथास्थिति बनाए रखने के आदेश हैं। खुर्रमपुर पंचायत की जमीन से उत्तर प्रदेश के किसानों का कब्जा हटाया गया था। यह जमीन पंचायत के नाम है और इसकी गिरदावरी गांव के जिन किसानों के नाम पर है, उन्हें कब्जा दिलाया गया।

विजय कुमार (उपमंडल अधिकारी, सोनीपत) के मुताबिक, अब दोनों प्रदेश के तहसील अधिकारी व अन्य सर्वे ऑफ इंडिया के साथ मिलकर पिलरों की खोज करने के साथ ही पैमाइश कर सीमांकन का कार्य करेंगे।

 

Posted By: JP Yadav

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