नई दिल्ली, प्रेट्र, जेएनएन। 2016 JNU sedition case: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को कहा कि जेएनयू में देशद्रोही नारेबाजी के मामले में आरोपितों के खिलाफ मुकदमा चलाने को लेकर दिल्ली सरकार ने अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार का गृह विभाग सभी जानकारी लेने के बाद उचित निर्णय लेगा। केजरीवाल ने कहा कि इस मामले पर राजनीति नहीं होना चाहिए।

उधर, भाजपा ने केजरीवाल सरकार पर टुकड़े-टुकड़े गैंग का साथ देने का आरोप लगाया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने आरोप लगाया कि केजरीवाल सरकार जेएनयू में देश विरोधी नारे लगाने के आरोपित कन्हैया कुमार और अन्य के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं दे रही है। मनोज तिवारी ने कहा कि दिल्ली सरकार टुकड़े-टुकड़े गैंग के साथ है। उन्होंने कहा कि इस मामले में पार्टी विरोध प्रदर्शन करेगी।

मीडिया में चल रही खबरों का केजरीवाल ने किया खंडन
मीडिया में चल खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि ये सब अफवाह है। दरअसल, मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि दिल्ली सरकार के गृह मंत्रालय ने कथित तौर पर माना है कि जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार देशद्रोही नहीं है। गृह विभाग द्वारा तैयार किए गए नोट में कहा गया है कि जेएनयू में देश विरोधी नारे लगाने के प्रकरण में यह साबित नहीं हो पाया है कि नारे कन्हैया कुमार ने लगाए थे। नोट गृह विभाग की तरफ से दिल्ली सरकार को भेजा जाएगा।

बता दें कि जेएनयू में देश विरोधी नारे लगाने वाले प्रकरण में कन्हैया कुमार के खिलाफ दायर की गई चार्जशीट दिल्ली सरकार की अनुमति के बिना पेश की गई थी। चार्जशीट दायर करने को अनुमति देने के मामले में दिल्ली सरकार ने कहा था कि वह इसकी जांच कराएंगे और कानूनी राय लेंगे। इसके बाद सरकार इस मामले में निर्णय लेगी।
फाइनल रिपोर्ट तैयार 
सूत्रों का कहना है कि कानूनी राय लेने के लिए इस मामले को दिल्ली सरकार ने लॉ विभाग के पास भेजा था। लॉ विभाग ने अपनी राय गृह विभाग को भेज दी। पुलिस से मामला जुड़ा होने के कारण यह मामला गृह विभाग को भेजा गया था। लॉ विभाग से मिली राय को गृह विभाग ने सही मानते हुए फाइनल रिपोर्ट तैयार कर दी है। जिसमें कहा गया है कि कन्हैया कुमार पर देशद्रोह का मामला नहीं बनता है।

वहीं, यह भी साबित नहीं हुआ है कि कन्हैया ने देश विरोधी नारे लगाए थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह दो छात्र राजनैतिक गुटों का मामला था। दोनों ने एक दूसरे को उकसाने के लिए नारेबाजी की थी। जो नारे वहां लगाए गए थे, वह कन्हैया कुमार ने लगाए, यह कहीं से भी साबित नहीं हो सका है।

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Posted By: Mangal Yadav

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