नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। निर्भया कांड में फांसी की सजा पाए चार दोषियों में से तीन ने जेल प्रशासन को नोटिस का उत्तर भेजा है। अक्षय, विनय व पवन की ओर से जेल प्रशासन को बताया गया है कि अब उनके पास दया याचिका से पूर्व क्यूरेटिव (पुर्नीक्षण) याचिका दायर करने का विकल्प बचा है। क्यूरेटिव याचिका दायर करने के बाद जो नतीजे आएंगे, उसके आधार पर आगे क्या करना है, यह तय करेंगे।

दोषियों में मुकेश की ओर से अब तक जेल प्रशासन को जवाब नहीं दिया गया है। मुकेश अपना जवाब बृहस्पतिवार तक जमा कर सकता है। तिहाड़ जेल के अतिरिक्त महानिरीक्षक राजकुमार ने बताया कि अब कोर्ट को इसकी पूरी जानकारी दी जाएगी।

गौरतलब है कि पटियाला हाउस कोर्ट से मिले निर्देश के बाद तिहाड़ जेल प्रशासन की ओर से निर्भया के दोषियों को नोटिस जारी किया गया था। नोटिस में उन्हें सात दिन का वक्त देते हुए कहा गया था कि दोषी अक्षय द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी गई है। अब चारों दोषी मौत की सजा के खिलाफ राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दाखिल कर सकते हैं।

दिल्ली जेल नियमावली 2018 के नियम 837 के तहत यदि आपने दया याचिका दायर नहीं की है तो सात दिनों के भीतर आप राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दाखिल कर सकते हैं। अधिवक्ता अजय वर्मा बताते हैं कि क्यूरेटिव याचिका में याचिकाकर्ता की ओर से तकनीकी पहलुओं पर भी ध्यान दिलाया जाता है। यह याचिका वरिष्ठ अधिवक्ता की सिफारिश पर ही दाखिल की जा सकती है।

याचिका से क्या होगा

क्यूरेटिव याचिका के नियम सख्त हैं। सामान्य तौर पर क्यूरेटिव याचिका पर भी सुनवाई न्यायाधीश सर्कुलेशन के जरिये चैंबर में ही करते हैं। इस याचिका पर सुनवाई करने वाली पीठ में तीन वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं और बाकी फैसला देने वाले न्यायाधीश होते हैं। मसलन, अगर दो न्यायाधीशों का फैसला है तो उस मामले में क्यूरेटिव याचिका पर तीन वरिष्ठतम न्यायाधीश और दो फैसला देने वाले न्यायाधीश समेत कुल पांच न्यायाधीश सुनवाई करेंगे।

 

Posted By: Mangal Yadav

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