नई दिल्ली [सुशील गंभीर]। नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में सजा सुनाने के लिए कुलदीप सेंगर को जब अदालत में लाया गया तो उसकी आंखें नम थीं। चेहरे पर थकान और माथे पर शिकन साफ दिखाई दे रही थी। सेंगर के परिवार से भी कई लोग कोर्ट रूम में मौजूद थे। दोनों पक्षों की बहस के दौरान सेंगर कुर्सी पर मुंह लटकाए बैठा रहा।

ब्रेक के बाद जब न्यायाधीश ने अंतिम सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई तो सेंगर सहित उसके परिवार की आंखों से आंसू बहने लगे। कुछ देर बाद कोर्ट कर्मचारी ने अदालत के आदेश की प्रति देने के लिए सेंगर को बुलाया। सेंगर ने कंपकपाते हाथों से फैसले की प्रति पकड़ी और काफी देर तक पन्ने पलटता रहा।

तिहाड़ जेल भेजा गया सेंगर

फैसला सुनाए जाने के समय कोर्ट रूम के बाहर मौजूद सेंगर के परिजनों में से कुछ अंदर आ गए थे। सेंगर की बेटी, बहन और कुछ अन्य रिश्तेदार कोर्ट रूम में ही बैठे थे। शुक्रवार सुबह से ही अदालत में माहौल तनावपूर्ण था। सजा कितनी होगी, इसे लेकर हर तरफ चर्चा हो रही थी। कोई 10 साल, कोई 20 साल और कोई उम्रकैद होने की बातें कर रहा था।

पहले 12 बजे से लेकर सवा एक बजे तक बहस हुई और उसके बाद करीब सवा बजे सेंगर को सजा सुनाई गई। अदालत परिसर में सेंगर के समर्थक भी बड़ी संख्या में आए हुए थे। ऐसे में सुरक्षा भी बढ़ाई गई थी। सजा पाने के बाद काफी देर तक सेंगर को कोर्ट रूम में ही रखा गया और जब भीड़ थोड़ी छंट गई तो उसे कोर्ट लॉकअप में ले जाया गया और वहां से तिहाड़ जेल के लिए रवाना किया गया।

पीड़ित परिवार ने किया फैसले का स्वागत

कोर्ट के फैसले का पीड़ित परिवार ने स्वागत किया है। पीड़िता ने अदालत का धन्यवाद देते हुए अपने वकील से कहा कि आप जैसे भाईयों की जरूरत है। वहीं पीड़िता की बहन ने कहा कि दुष्कर्म मामले में पावरफुल इनसान को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। बता दें कि दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने कुलदीप सेंगर को नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई है। जबकि 25 लाख जुर्माना भी लगाया है। 

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