नई दिल्ली [सुशील गंभीर]। बहुचर्चित दीपक भारद्वाज हत्याकांड के सभी आरोपितों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। दिल्ली की पटियाला हाउस की एक अदालत ने पूर्व बसपा नेता दीपक भारद्वाज के बेटे सहित सभी सात आरोपितों को बरी करने का आदेश दिया है।

पुलिस के मुताबिक, 2013 में पांच करोड़ रुपये की सुपारी देकर दीपक भारद्वाज की हत्या हुई थी। एनसीआर में रियल एस्टेट के बड़े कारोबारी दीपक भारद्वाज ने 2009 में बसपा की टिकट पर पश्चिम दिल्ली से लोकसभा चुनाव लड़ा था। उन्होंने शपथपत्र में करीब छह अरब रुपये की संपत्ति का ब्योरा दिया था और सबसे अमीर प्रत्याशियों की सूची में पहले नंबर पर थे। दीपक सोनीपत, हरियाणा के रहने वाले थे, लेकिन अर्से से पश्चिम दिल्ली के लाजवंती गार्डन में रह रहे थे।

पुलिस की तरफ से दायर आरोपपत्र के मुताबिक 26 मार्च, 2013 को दीपक के वसंत कुंज स्थित फार्म हाउस पर उनकी हत्या कर दी गई थी। गोलियां शूटर सुनील और पुरुषोत्तम ने चलाई थी। दोनों जिस गाड़ी से गए, वह अमित चला रहा था। आरोपपत्र के मुताबिक हत्याकांड को दीपक के छोटे बेटे नीतेश के कहने पर अंजाम दिया गया था। नीतेश पिता के परिवार के प्रति व्यवहार से आहत था। नीतेश ने प्रॉपर्टी डीलर बलजीत सहरावत की मदद ली।

बलजीत सहरावत ने स्वामी प्रतिभानंद की मदद से शूटर सुनील और पुरुषोत्तम का इंतजाम कराया। बलजीत सहरावत को चुनाव लड़ने के लिए और प्रतिभानंद को आश्रम बनाने के लिए पैसा चाहिए था। शूटर स्वामी के चेले थे और यह हत्याकांड पांच करोड़ रुपये की सुपारी लेकर अंजाम दिया गया था। पुलिस के मुताबिक सुपारी नीतेश ने दी थी। प्रतिभानंद की गिरफ्तारी डेढ़ साल पहले हुई थी, जबकि अन्य आरोपित शुरूआत में ही गिरफ्तार हो गए थे।

मुकेश कालिया (नीतेश के वकील) के मुताबिक, पुलिस ने जो भी गवाह बनाए थे, सभी बयान से पलट गए। पुलिस इस हत्या का न तो मकसद साबित कर सकी और न ही नीतेश के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य था।

सुमित वर्मा (प्रतिभानंद के वकील) का कहना है कि पुलिस ने जो कहानी बताई, वह साबित नहीं हो सकी। प्रतिभानंद पर आरोप था कि आठ अलग-अलग मोबाइल से शूटर और अन्य इंतजाम किए, लेकिन रिकवरी नहीं हुई।

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Posted By: JP Yadav

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