नई दिल्ली, जेएनएन। Jammu&Kashmir Reorganization Bill 2019: संसद से जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल पास होने पर दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद मनोज तिवारी ने खुशी जाहिर की है। मनोज तिवारी ने मंगलवार को ट्विटर पर लिखा, ' लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के विकास में बाधक Article 370 को हटाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को बधाई'।

मनोज तिवारी ने पांच जुलाई सुबह 11 बजे से 6 जुलाई शाम 7:22 बजे तक संसद में व्यतीत किए गए क्षण को गौरवान्वित पल बताया और कहा कि मैं बेहद प्रसन्न हूं कि इस अद्भुत क्षण का साक्षी बना।

इसके अलावा दिल्ली भाजपा ने भी जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल पास होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया है। दिल्ली भाजपा ने ट्वीट किया, ' एक देश में दो विधान, दो प्रधान, दो निशान' नहीं चलेंगे'।

इससे पहले सोमवार को दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा था कि 5 अगस्त, 2019 का दिन एतिहासिक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने वो कर दिया जिसे देशवासियों को वर्षों से इंतजार था। पूरा देश जश्न मना रहा है। सदन और बाहर समर्थन देने वालों का धन्यवाद।

बता दें कि सोमवार को जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल राज्यसभा से पास हो गया था। राज्यसभा में प्रस्ताव पेश करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 370(3) के अंतर्गत जिस दिन से राष्ट्रपति द्वारा इस सरकारी गैजेट को स्वीकार किया जाएगा, उस दिन से अनुच्छेद 370 (1) के अलावा अनुच्छेद 370 के कोई भी खंड लागू नहीं होंगे। इसमें सिर्फ एक खंड रहेगा। अनुच्‍छेद 370 हटाने के अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बन गए हैं।

जम्‍मू कश्‍मीर में ये होंगे बदलाव
- इसका अलग झंडा नहीं होगा
-कश्‍मीर में अन्‍य राज्‍यों से लोग ले सकेंगे जमीन
-दोहरी नागरिकता होगी खत्‍म

लोकसभा में अमित शाह ने कांग्रेस को घेरा
अनुच्छेद 370 पर लोकसभा में जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि इतने सालों के बाद आज सदन इस एतिहासिक भूल को सुधारने जा रहा है। कांग्रेस पर हमला बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि अगर हमारी सेनाओं को तब रोका नहीं गया होता तो आज पीओके (POK) भी हमारा होता। अमित शाह ने मनीष तिवारी से सवाल करते हुए कहा कि जब हमारी सेना कश्मीर में आगे बढ़ रही थी और पाकिस्तानी सेना और कबीलाइयों को खदेड़ रही थी तब अचानक युद्ध विराम किसने किया, वो नेहरू ने किया और उसी के कारण आज पीओके है। अगर सेनाओं को उस वक्त छूट दी गई होती तो पूरा पीओके भारत का हिस्सा होता।

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