लखनऊ, जेएनएन। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती ने फिर दोहराया है कि नागरिकता संशोधन विधेयक पूरी तरह से विभाजनकारी और असंवैधानिक है। उनका कहना है कि इसीलिये बीएसपी ने नागरिकता संशोधन बिल का संसद के दोनों सदन में जबर्दस्त विरोध किया व इसके विरुद्ध वोट भी दिया। 

मायावती ने शुक्रवार को ट्वीट कर कहा कि नागरिकता संशोधन बिल को पास कराने के लिए केंद्र सरकार ने जितनी जल्दबाजी दिखाई है, यदि उतनी ही देश में महिला उत्पीड़न, दुष्कर्म और हत्या आदि पर अंकुश लगाने के लिए सख्त कानून बनाने पर भी दिखाई होती, तो ज्यादा बेहतर होता। बसपा सुप्रीमों ने आगे कहा कि इस मुद्दे पर राज्यों को केवल पत्र लिखने की खानापूर्ति करने से इसका कोई सार्थक हल निकलने वाला नहीं है।

कांग्रेस ने दिया दलित विरोधी सोच का परिचय

इससे पहले आरक्षण के मुद्दे पर राज्यसभा में भूमिका को लेकर बसपा प्रमुख मायावती ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने ट्वीट किया कि 'संविधान के 126वें संशोधित बिल में एससी-एसटी आरक्षण को दस वर्ष बढ़ाने की व्यवस्था है, जिसके राज्यसभा में पारित होने में बाधा डालकर कांग्रेस ने अपनी दलित विरोधी सोच का परिचय दिया है। हालांकि सभापति के आग्रह पर वे सदन में वापस आए और तब विलंब से यह बिल पास हो पाया।' बता दें कि एससी-एसटी आरक्षण को 10 वर्ष बढ़ाने वाला 126वां संशोधन बिल गुरुवार को राज्यसभा से पास हो गया है।

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