राज्य ब्यूरो, रांची। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त होने से झारखंड जदयू को भी काफी उम्मीदें हैं। प्रदेश में लगातार जनाधार खोने वाली इस पार्टी के स्थानीय नेता शीर्ष नेतृत्व पर लगातार उम्मीद लगाए हुए हैं कि वे झारखंड के लिए भी समय दें। पार्टी के शीर्ष स्तर के नेताओं का यहां लगातार कार्यक्रम हो।

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी व्यस्तता के कारण झारखंड के लिए समय नहीं निकाल पाते। प्रशांत किशोर उनकी कमी को दूर कर सकते हैं। उनके पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए जाने से प्रदेश पार्टी के नेताओं ने पूर्व मंत्री सुधा चौधरी, वरिष्ठ नेता कृष्णानंद मिश्र, प्रदेश महासचिव श्रवण कुमार, संजय सहाय ने खुशी जाहिर की है। वहीं, महासचिव सह प्रवक्ता जफर कमाल कहते हैं, उनकी कार्यकुशलता का लाभ झारखंड जदयू को भी मिलेगा और पार्टी यहां मजबूत उपस्थिति दर्ज कराएगी।

गौरतलब है कि राज्य में जदयू का जनाधार लगातार कम होता गया है। राज्य गठन के बाद 2005 में इस पार्टी ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की थी। 2009 के विधानसभा चुनाव में यह संख्या घटकर दो हो गई। एनडीए से अलग होने के बाद 2014 में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी का खाता भी नहीं खुला। हालांकि हाल के दिनों में प्रदेश प्रभारी रामसेवक सिंह तथा सह प्रभारी अरुण कुमार सिंह लगातार जिलों का दौरा कर पार्टी संगठन को फिर से खड़ा करने का प्रयास किया है। लेकिन पार्टी के शीर्ष नेताओं के यहां कार्यक्रम नहीं होना यहां के नेताओं के लिए खलता रहा है।

भाजपा से गठबंधन का भी हो सकता है प्रयास

बिहार में भाजपा के साथ जदयू के फिर से गठबंधन होने के बाद प्रदेश पार्टी के नेताओं में उम्मीद जगी थी कि झारखंड में भी भाजपा के साथ गठबंधन होने से यहां लगभग मृतप्राय हो चुकी पार्टी को नई ऊर्जा मिल जाएगी। लेकिन भाजपा ने अभी तक जदयू को कोई भाव ही नहीं दिया।

अब तो प्रदेश प्रभारी राम सेवक सिंह व पूर्व प्रदेश प्रभारी श्रवण कुमार भी कहने लगे हैं कि झारखंड में भाजपा के साथ जदयू का गठबंधन नहीं है। पार्टी सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। अब प्रशांत किशोर झारखंड में भी भाजपा के साथ गठबंधन को लेकर बात आगे बढ़ा सकते हैं।

 

Posted By: Sachin Mishra

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