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फैशन डिजाइनर से मंत्री तक... बंगाल सरकार में शामिल हुईं अग्निमित्रा पॉल की कहानी

Published: Sat, 09 May 2026 10:50 PM (IST)

पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के बाद अग्निमित्रा पॉल ने मंत्री पद की शपथ ली। फैशन डिजाइनर ...और पढ़ें

बंगाल सरकार में शामिल हुईं अग्निमित्रा पॉल की कहानी (फाइल फोटो)

बंगाल सरकार में शामिल हुईं अग्निमित्रा पॉल की कहानी (फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की पहली सरकार बनने के बाद शनिवार को कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री के रूप में सुवेंदु अधिकारी ने शपथ ली। उनके साथ पांच अन्य नेताओं ने भी मंत्री पद की शपथ ली, जिनमें अग्निमित्रा पॉल, दिलीप घोष, अशोक कीर्तनिया, खुदीराम टुडू और निशिथ प्रमाणिक शामिल हैं।

अग्निमित्रा पॉल भाजपा की प्रमुख महिला नेताओं में गिनी जाती हैं। वह आसनसोल दक्षिण से भाजपा विधायक और पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। राजनीति में आने से पहले वह एक जानी-मानी फैशन डिजाइनर थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अग्निमित्रा पॉल 2019 लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुई थीं। इसके बाद वह तेजी से पार्टी की सक्रिय और उभरती हुई नेता के रूप में सामने आईं।

फैशन डिजाइनिंग से राजनीति तक का सफर

अग्निमित्रा पॉल का जन्म आसनसोल में हुआ था। उनके पिता डॉ. अशोक राय शिशु रोग विशेषज्ञ हैं, जबकि उनके पति पार्थ पॉल व्यवसायी हैं। उनके दो बेटे हैं। उन्होंने बर्दवान विश्वविद्यालय से संबद्ध बनवारी लाल भालोटिया कॉलेज से वनस्पति विज्ञान की पढ़ाई की। इसके बाद बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ लिबरल आर्ट्स एंड मैनेजमेंट साइंस से फैशन टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा किया। उन्होंने मैनेजमेंट की पढ़ाई भी की है।

अग्निमित्रा पॉल ने 2026 विधानसभा चुनाव में आसनसोल दक्षिण सीट से तृणमूल कांग्रेस के तापस बनर्जी को 40 हजार से अधिक वोटों से हराया। इससे पहले उन्होंने 2024 लोकसभा चुनाव में मेदिनीपुर सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन तृणमूल कांग्रेस की जून मालिया से हार गई थीं।

अग्निमित्रा पॉल पर दर्ज हैं 23 मामले

चुनावी हलफनामे के अनुसार अग्निमित्रा पॉल के खिलाफ 23 फौजदारी मामले दर्ज हैं। इनमें विरोध प्रदर्शन, बिना अनुमति रैली निकालना, सरकारी आदेशों का उल्लंघन, शांति भंग और विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी या दुर्भावना बढ़ाने जैसे आरोप शामिल हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने भी मंत्री पद की शपथ ली। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में उनका नाम भी चर्चा में था।

दिलीप घोष को पश्चिम बंगाल में भाजपा का मजबूत संगठन खड़ा करने का श्रेय दिया जाता है। उनके नेतृत्व में भाजपा ने 2019 लोकसभा चुनाव में राज्य में बड़ी राजनीतिक ताकत के रूप में अपनी पहचान बनाई थी। उनका संबंध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से रहा।

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