रामपुर, जेएनएन। उत्तर प्रदेश की 11 विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर सभी दलों ने अपनी-अपनी तैयारी शुरू कर दी है। बसपा ने सभी 11 सीट पर प्रत्याशी का नाम घोषित कर दिया है तो कांग्रेस ने भी पांच प्रत्याशियों का नाम फाइनल कर दिया है। रामपुर सदर सीट पर अभी भी कांग्रेस, भाजपा तथा समाजवादी पार्टी ने प्रत्याशी तय किया है।

आजम खां के रामपुर लोकसभा का चुनाव जीतने के बाद खाली रामपुर सदर सीट समाजवादी पार्टी के साथ आजम खां के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न है। इसी कारण उनकी पत्नी तथा राज्यसभा सदस्य के लिए शुक्रवार को नामांकन पत्र खरीदा गया है। यहां से समाजवादी पार्टी ने अभी किसी का भी नाम फाइनल नहीं किया है। अगर यहां से डॉ. तजीन फात्मा चुनाव लड़ती हैं तो फिर उनको राज्यसभा की सदस्यता छोडऩी पड़ेगी। तजीन के पर्चा खरीदने से कयास लगाए जा रहे हैं कि वह चुनाव लड़ेंगी।

रामपुर की सीट आजम खां के सांसद बनने से खाली हुई है,  लेकिन वह इस पर अपना कब्जा बनाए रखना चाहते हैं। साथ ही तजीन की राज्यसभा सदस्यता में भी अब एक साल का ही समय शेष है। उनका कार्यकाल नवंबर 2020 तक ही है। ऐसे में यदि तजीन उपचुनाव लड़ती हैं और जीत जाती हैं तो उन्हें राज्यसभा की सदस्यता छोडऩी होगी। आजम खां रामपुर शहर से नौ बार विधायक रहे हैं। चुनाव भी वह भारी मतों के अंतर से जीतते रहे। इस बार आजम पहली बार लोकसभा चुनाव लड़े और सांसद बन गए। सांसद बनने के बाद विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा तो दे दिया, लेकिन वह इस सीट पर कब्जा बरकरार रखना चाहते हैं। उनकी पत्नी डॉ. तजीन फात्मा अब विधानसभा चुनाव लड़ सकती हैं। उनके लिए पर्चा भी खरीद लिया गया है।

अभी संशय, फाइनल नहीं है : अब्दुल्ला आजम

डॉ. तजीन फात्मा के नाम से नामांकन पत्र लेने पर आजम खां के विधायक पुत्र अब्दुल्ला आजम खां ने कहा कि कई लोगों ने पर्चा खरीदा है, लेकिन अभी यह तय नहीं है कि चुनाव कौन लड़ेगा। यहां पर उम्मीदवार को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं से मशवरा किया जा रहा है। जैसी वह लोग राय देंगे उसी के मुताबिक उम्मीदवार तय किया जाएगा।

दिलचस्प होगा मुकाबला

आजम खां की पत्नी तजीन फात्मा के लिए पर्चा खरीदे जाने से चुनाव में सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। पांच माह पहले हुए लोकसभा चुनाव में भी रामपुर सुर्खियों में रहा था। उस चुनाव में आजम के मुकाबले भाजपा की जया प्रदा थीं। दोनों ने एक दूसरे के खिलाफ जमकर सियासी तीर चलाए थे। आजम के खिलाफ तो आचार संहिता उल्लंघन और आपत्तिजनक भाषण देने में 15 मुकदमे लिखे गए। जया प्रदा के खिलाफ भी चार मुकदमे हुए और इन सभी में चार्जशीट भी लग चुकी है। चुनाव के दौरान आजम खां पर दो बार पाबंदी भी लगी लेकिन, अब आजम खां रामपुर से ही बाहर हैं। उनके खिलाफ कई मुकदमे दर्ज हुए हैं। उपचुनाव में भी भाजपा से जया प्रदा का नाम चर्चा में है। अगर ऐसा हुआ तो मुकाबला दिलचस्प होगा और रामपुर मीडिया की सुर्खियों में रहेगा।  

Posted By: Dharmendra Pandey

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