प्रयागराज, जेएनएन। विदेशी जमातियों को शहर में गैर कानूनी तरीके से शरण दिलाने वाले इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मो. शाहिद के ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआइएमआइएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी से करीबी रिश्ते हैैं। खुफिया एजेंसियों को जांच में यह जानकारी भी मिली है कि प्रोफेसर और ओवैसी के बीच दो महीने में करीब 70 बार फोन पर बात हुई है। कोरोना वायरस के संक्रमण के दौर में दिल्ली के निजामुद्दीन में चार दिन तक तब्लीगी जमात में शामिल होकर प्रयागराज लौटे प्रोफेसर मोहम्मद शाहिद का पोसपोर्ट जब्त कर प्रशासन ने उनके तीन बैैंक खातों की जांच के लिए भी लिखापढ़ी की है।

निजामुद्दीन की मरकज में तब्लीगी जमात से हिस्सा लेकर बिहार के गया जा रहे विदेशी जमातियों को वीजा नियमों का उल्लंघन कर प्रयागराज में रुकवाने के बाद से ही प्रोफेसर खुफिया एजेंसियों के निशाने पर आ गए थे। प्रोफेसर ने तब्लीगी जमात में खुद के जाने की बात भी पुलिस से छिपाई थी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर उन्हें सलाखों के पीछे भेजा तो खुफिया एजेंसियों ने जांच तेज कर दी। लगभग दो हफ्ते से पड़ताल में जुटीं खुफिया एजेंसियों को पता चला है कि प्रोफेसर तुर्की, इंडोनिशाई व थाइलैैंड की भाषा भी बोलते हैैं। बांग्ला, कन्नड़ और मराठी भी बोलते हैैं। उर्दू के साथ ही अरबी व अंग्रेजी में भी वह लिखापढ़ी करते हैैं। 

प्रोफेसर मो. शाहिद की कॉल डिटेल खंगालने में जुटी सर्विलांस टीमों को पता चला है कि एआइएमआइएम प्रमुख से दिल्ली और हैदराबाद के नंबरों पर प्रोफेसर की अक्सर बात होती रहती है। उनसे प्रोफेसर का मिलना जुलना भी है। मार्च में तीन दफा हैदराबाद से इनकमिंग कॉल आई है। ओवैसी के करीबी के नाम पर उस मोबाइल नंबर का कनेक्शन है। यह भी पता चला है कि कुछ वर्ष पहले करेली में एक चुनावी सभा के दौरान ओवैसी आने वाले थे। उस सभा के आयोजकों में प्रोफेसर का भी नाम था। हालांकि, अनुमति न मिलने पर वह सभा निरस्त हो गई थी।

एडीएम सिटी अशोक कुमार कनौजिया ने बताया कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मो. शाहिद के खिलाफ पुलिस ने आठ अप्रैल को मुकदमा दर्ज किया और तीन दिन पहले उन्हें सेंट्रल जेल नैनी भेजा गया। पुलिस समेत कई एजेंसियां प्रोफेसर की गतिविधियों समेत अन्य बिंदुओं पर जांच कर रही हैैं। जो सूचनाएं मिल रही हैैं, उस पर पुलिस की ओर से आगे की कार्रवाई होगी।

विदेशी भाषा का ज्ञान

विदेशी जमातियों को प्रयागराज में गैर कानूनी तरीके से शरण देने वाले इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मो. शाहिद कई विदेशी विदेशी भाषाओं के ज्ञाता हैं।वह कई दक्षिण भारतीय भाषा भी बोल लेते हैं। दिल्ली के निजामुद्दीन के तब्लीगी जमात में शामिल होकर घर लौटे प्रोफेसर ने विदेशी जमातियों को यहां पर गैर कानूनी ढंग से शरण दी थी। इसी कारण ही उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया और फिर दो दिन पहले उन्हें जेल भेजा गया। प्रोफेसर के साथ रुके 16 विदेशी जमातियों तथा कई स्थानीय लोगों को भी जेल भेजा गया है। प्रोफेसर के मामले में पुलिस की सर्विलांस टीमें और खुफिया एजेंसियां जांच कर रही हैं। 

इस्‍लाम पर लेक्‍चर देने अक्‍सर जाते थे विदेश

वह अक्सर इस्लाम पर लेक्चर देने विदेशों में आयोजित कॉन्फ्रेंस में जाते रहे हैं। मुस्लिम देशों में अपना वक्त बिताते थे। वह विभाग में पढ़ाई के अलावा किसी शिक्षक से भी ज्यादा बात नहीं करते थे। इविवि सूत्रों की मानें तो मुस्लिम छात्र-छात्राओं के प्रति उनका लगाव अधिक रहता था। यदि समुदाय का कोई शोधार्थी आता तो वह उसे फौरन ले लेते थे। इसके अलावा एएमयू, जेएनयू और जम्मू विवि में इनकी पकड़ काफी मजबूत मानी जाती है। वहां के शिक्षकों को अक्सर वह बुलाते भी थे। प्रो. शाहिद के बड़े भाई प्रो. एसए अंसारी वाणिज्य विभाग में और भांजा डॉ. कासिफ उर्दू विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं।

जमाती प्राफेसर ने जेएनयू से किया है शोध

मूलरूप से मऊ जनपद के दक्षिण टोला कोतवाली स्थित बुलाकी का पूरा निवासी प्रोफेसर मो. शाहिद वर्ष 1988 में इविवि के राजनीति विज्ञान विभाग में लेक्चरर नियुक्त हुए थे। 2003 में जेएनयू से पीएचडी की उपाधि हासिल करने के बाद वह 2004 में रीडर के पद पर पदोन्नत हुए थे। इसके बाद 2015 में प्रोफेसर नियुक्त किए गए। साउथ एशियन पॉलिटिकल सिस्टम, इंटरनेशनल रिलेशन, इस्लामिक पॉलिटिकल थॉट, इस्लामिक डायस्पोरा इन द वर्ल्ड के क्षेत्र में उनकी अच्छी पकड़ है। अब तक वह कई विदेश यात्राएं कर चुके हैं।

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