लखनऊ [अजय जायसवाल]। चंद रोज में ही दुनियाभर में कहर ढाने वाले कोरोना वायरस का असर अब आपकी जेब पर भी पडऩे वाला है। इसके संक्रमण से सरकारी खजाने को करीब दस हजार करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन है।

कोरोना वायरस के संक्रमण के दौरान इसके इलाज के रूप में जनता को महंगाई की कड़वी दवा पीनी पड़ सकती है। घटती कमाई और बढ़ते खर्चों के मद्देनजर राज्य सरकार न चाहते हुए भी अपने कर राजस्व में इजाफे के लिए टैक्स बढ़ाने के रास्ते तलाशने में जुट गई है।

लॉकडाउन में दरअसल, 40 दिन के शराब की बिक्री बंद होने से ही सरकार को प्रतिदिन लगभग 100 करोड़ रुपये यानी 40 दिनों में कुल 4000 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान हो रहा है। कारोबार प्रभावित होने से जीएसटी और वाणिज्य कर पर भी बड़ा प्रभाव पड़ रहा है। सरकार का मानना है कि जीएसटी व वाणिज्य कर से भी उसे चार-पांच हजार करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।

इसी तरह निर्माण कार्य रुकने आदि से भूतत्व एवं खनिकर्म के 200-300 करोड़, यात्री परिवहन ठप होने से 100 करोड़ रुपये व अन्य विभिन्न मदों से 500 से एक हजार करोड़ रुपये का राजस्व न मिलने की आशंका है। दूसरी तरफ चिकित्सा सुविधाओं व अन्य व्यवस्था के लिए 1139 करोड़ रुपये देने के अलावा श्रमिकों आदि को दिए गए एक हजार रुपये के हिसाब से लगभग सवा दो सौ करोड़ रुपये बांटे जा चुके हैं। सौ करोड़ रुपये का खाद्यान्न भी गरीबों व श्रमिकों को दिया जा चुका है।

वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के मुताबिक कोरोना से निपटने में धन का संकट नहीं आड़े आने दिया जाएगा। वह कहते हैं कि सरकार के सामने इन दिनों दोहरी चुनौती है। एक तरफ जहां लॉकडाउन से सभी गतिविधियों के ठप होने के कारणकर व करेत्तर राजस्व पर जबरदस्त प्रभाव पड़ा है, वहीं बेहतर चिकित्सा सुविधा और गरीबों को राहत देने का खर्च भी बढ़ा है। नुकसान के अनुमान के सवाल पर खन्ना कहते हैं कि अभी वास्तविक अनुमान लगाना मुश्किल है लेकिन, मोटे तौर पर दस हजार करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान तो हो ही सकता है।

पेट्रोल-डीजल के दाम बढऩा लगभग तय

टैक्स बढ़ाकर जनता से नुकसान की भरपाई करने पर वित्त मंत्री साफतौर पर कहते हैं कि राजस्व आय बढ़ाने के लिए सरकार को न चाहते हुए भी कुछ कड़े फैसले लेने पड़ सकते है। वह बताते हैैं कि खर्चों में कटौती करने के साथ ही फिलहाल नए काम भी नहीं किए जाएंगे। वह बताते हैं कि पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड के अलावा महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना जैसे राज्यों से सूबे में पेट्रोल-डीजल सस्ता है। सूत्रों के अनुसार ऐसे में पेट्रोल-डीजल पर वैट बढ़ाकर सरकार चार-पांच हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व जुटाने का रास्ता निकालने जा रही है। उल्लेखनीय है कि प्रति लीटर एक रुपये पेट्रोल-डीजल महंगा होने से 1600 करोड़ रुपये सालाना राजस्व बढ़ जाता है। इसमें सिर्फ डीजल की बिक्री से ही 1130 करोड़ रुपये बढ़ जाते हैं।  

Posted By: Dharmendra Pandey

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