लखनऊ, जेएनएन। अयोध्या में रामलला का बुधवार को दर्शन करने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती अयोध्या के विवादित ढांचा विध्वंस प्रकरण में आज लखनऊ में सीबीआई की विशेष कोर्ट में पेश हुईं। कोर्ट में उमा भारती ने बयान दर्ज कराने के बाद विध्वंस मामले में किसी भी प्रकार की कोई टिप्पणी करने से साफ इन्कार कर दिया है। उन्होंने कहा कि मैं भारतीय कानून को वेद की तरह मानती हूं और अदालत को मंदिर।

भाजपा की फायरब्रांड नेता उमा भारती ने कहा कि अयोध्या में विवादित ढांचा विध्वंस के मामले में भूमिका होने के बारे में कुछ भी नहीं कहना है। मामला कोर्ट में है और इसकी सुनवाई चल रही है। उन्होंने कहा कि कोर्ट पर कोई टिप्पणी नहीं करनी है। कोर्ट हमारे लिए मंदिर हैं और जज भगवान का रूप हैं।

उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि मैं 500 वर्ष पहले के इस अभियान में हिस्सा बनी। अयोध्या में रामलला के जन्मस्थान को लेकर काफी लम्बी लड़ाई चली। इतना बड़ा शायद कोई अभियान चला हो। पांच शताब्दी के इस अभियान का फल बेहद सुखदायी रहा। माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को देश ने सहर्ष स्वीकार किया। देश ने कोर्ट के इस फैसले को जिस तरह स्वीकार किया उससे विश्व में भारत की छवि काफी बेहतर हो गई है। विश्व इसको अलग नजरिया से देख रहा था, लेकिन अब वह मान गया कि भारत ने राम मंदिर पर कोर्ट के निर्णय को जिस तरह से माना है वह गौरवशाली परंपरा का निर्वहन जैसा है। 

उमा भारती ने कहा कि जहां पर हमारी बात है तो हम तो राम भक्त हैं। हम तो गंगा, तिरंगा, गऊ, गरीब, नारी व श्रीराम के लिए अपनी जान भी देने को तैयार हैं। अब तो बस यही हमारा ध्येय है। इससे पहले भाजपा की फायरब्रांड नेता उमा भारती लखनऊ में आज विशेष सीबीआई अदालत में पेश हुईं। वह अयोध्या प्रकरण में कोर्ट में अपने बयान दर्ज कराने वाली वह 19वीं अभियुक्त हैं। विशेष सीबीआई अदालत छह दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में अभियुक्त 32 लोगों के बयान दर्ज कर रही है। 

अयोध्या में विवादित ढांचा विध्वंस के मामले में आरोपित पूर्व मंत्री उमा भारती को लखनऊ में सीबीआई की विशेष कोर्ट में मंगलवार को पेश होना था, वकील के कोरोना संक्रमित होने के कारण कोर्ट दो दिन बंद रहा। इसी बीच उमा भारती ने लखनऊ में हनुमान सेतु मंदिर में दर्शन करने के बाद बुधवार को अयोध्या का रुख किया। वहां पर उन्होंने रामलला का दर्शन किया। अयोध्या में विवादित ढांचा विध्वंस के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई की विशेष अदालत को इस मामले की सुनवाई 31 अगस्त तक पूरी करनी है। इसी कारण कोर्ट रोजाना काम कर रही है। इससे पहले 29 जून को सीबीआई की विशेष अदालत में साध्वी ऋतंभरा गवाही के लिए पेश हुई थीं।

सामाजिक संतुलन का ध्यान रखना चाहिए था : मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल विस्तार में सामाजिक संतुलन का ध्यान रखने का जाने का मुद्दा उठाते पूर्व मुख्यमंत्री साध्वी उमा भारती ने कहा कि इससे आने वाले दिनों में भाजपा को अधिक लाभ मिलता। उन्होंने अपनी इस भावना से मोबाइल मैसेज द्वारा पार्टी नेतृत्व को भी अवगत करा दिया है। उनका कहना था कि प्रदेश में उपचुनावों के बदले आमचुनाव कराए जाते तो ज्यादा बेहतर होता। गुरुवार को यहां बाबरी विध्वंस प्रकरण में बयान दर्ज कराने आयी पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती वीवीआईपी गेस्ट हाउस में शिवराज मंत्रिमंडल को लेकर पूरी सर्तकता से अपनी प्रतिक्रिया दी। वह दोहराती रहीं कि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर वो कतई असंतुष्ट नहीं है, लेकिन पार्टी के लिए दूरगामी हितों को ध्यान में रखते हुए कुछ सुझाव पहले भी दिए थे और उन पर आज भी कायम हूं। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की राजनीति में पिछड़ों व दलितों की सबसे अहम भूमिका है इसलिए जातीय संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।

 

Posted By: Dharmendra Pandey

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