जयपुर, जेएनएन। Rajasthan Local Body Chairman Election Result 2019. राजस्थान सहित पूरे देश में मंगलवार को वैसे तो संविधान दिवस मनाया गया, लेकिन संयोग से इसी दिन राजस्थान में निकाय अध्यक्षों के चुनाव भी हुए और ज्यादा से ज्यादा बोर्ड अपने कब्जे में करने के लिए कांग्रेस और भाजपा दोनों ने ही जम कर जोड़-तोड़ की। यही कारण रहा कि पार्षदों के चुनाव परिणाम में 20 ही जगह स्पष्ट बहुमत के बावजूद कांग्रेस 35 जगह अपनी बोर्ड बनाने में सफल रही, वहीं भाजपा छह जगह ही स्पष्ट बहुमत होने के बाद भी 13 निकायों में बोर्ड बना गई। एक जगह निर्दलीय अध्यक्ष बने, हालांकि वो भी जीत के बाद कांग्रेस में शामिल हो गए। दो जगह लाॅटरी से भी फैसला हुआ।

राजस्थान में गत 16 नवंबर को 49 निकायों में स्थानीय सरकार के लिए चुनाव हुए थे। इस चुनाव की मतगणना गत 19 नवंबर को हुई थी और इसके परिणाम में कांग्रेस को 20 स्पष्ट और नौ निकायों में भाजपा से बढ़त हासिल थी, वहीं भाजपा को छह निकायों में स्पष्ट बहुमत और नौ निकायों में कांग्रेस के मुकाबले बढ़त हासिल थी। वहीं, पांच निकाय ऐसे थे, जहां निर्दलियों को या तो बढ़त थी। इस तरह 23 निकायों में निर्दलियों पर सब कुछ निर्भर था। मंगलवार को निकाय अध्यक्ष का चुनाव हुआ और संयोग से आज ही के दिन संविधान दिवस भी था। इस दिन अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव ने यह स्पष्ट कर दिया कि दोनों ही प्रमुख दलों ने जम कर जोड़तोड़ की राजनीति की।

भरतपुर में भाजपा के पास कांग्रेस के मुकाबले ज्यादा पार्षद थे, लेकिन महापौर कांग्रेस का बन गया। यहां 51 वोट लेकर कांग्रेस के अभिजीत कुमार ने महापौर बने, जबकि कांग्रेस के पास सिर्फ 18 पार्षद थे, भाजपा के 22 और निर्दलीय भी 22 थे। ऐसे में निर्दलियों और भाजपा के भी कई पार्षदों की क्राॅस वोटिंग से कांग्रेस ने यहां अपना बोर्ड बना लिया। कुछ ऐसा ही हनुमानगढ़ में हुआ जहां भाजपा स्पष्ट बहुमत के बावजूद अपना मेयर नहीं बनवा पाई। इससे पहले रूपवास में निर्विरोध चुनाव हुआ था और भाजपा के सिम्बल पर अध्यक्ष बनी पार्षद जीत के तुरंत बाद कांग्रेस में चली गई थी।

शह और मात के इस खेल में भाजपा हालांकि कुछ पीछे रही, लेकिन जहां दांव लगा वहां कोशिश इसने भी नहीं छोडी। छबडा नगरीय निकाय में कांग्रेस के पास भाजपा से लगभग दोगुने पार्षद थे, लेकिन अध्यक्ष भाजपा का बना। हालांकि यहां लाॅटरी से फैसला करना पडा, क्योंकि दोनों दलों को बराबर वोट मिले थे। नसीराबाद में कांग्रेस का बोर्ड बना, लेकिन यहां भी लाॅटरी से फैसला हुआ। भाजपा के लिए संतोष की बात यह रही कि पार्टी तीन में से दो निगमों उदयुपर और बीकानेर में एक बार फिर अपना बोर्ड बनाने में सफल रही। उदयुपर में पार्टी के पास स्पष्ट बहुमत था और वहां जीएस टांक महापौर बने और बीकानेर में पार्टी के पास बढ़त थी और वहां सुशीला कंवर महापौर बनने में सफल रहीं।

खूब चली घेराबंदी

इस चुनाव के लिए जीते हुए पार्षदों क घेराबंदी खूब चली। मतदान के बाद से ही जीत की सम्भावना वाले पार्षदों को पार्टियों ने पूरे दस दिन तक होटलों में रिसोर्ट में रख कर “खातिरदारी“ की। चंूंकि लगभग आधे निकायों में बाजी निर्दलिय पार्षदों के हाथ में थी, इसलिए वहां भी जोड तोड खूब चली। मंगलवार को मतदान के दिन दल अपने अपने खेमे के पार्षदों को एक साथ लाए और वोट डलवा कर वापस ले गए। दरअसल अब बुधवार को उपाध्यक्ष का भी चुनाव होना है। ऐसे में उस पद पर कब्जे के लिए भी खींचतान होनी है।

भाजपा का आरोप कांग्रेस का असली चेहरा सामने आ गया- निकाय चुनाव के परिणाम पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व और मुददाविहीन है। देश ने कांग्रेस के विचार को नकारा है। इस चुनाव में राज्य सरकार की बडी भूमिका होती है और जनता के मानस सत्ताधारी दल के साथ होता है, लेकिन इस चुनाव में कांग्रेस बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई। परिणाम के बाद सत्तारूढ दल ने अलवर, रूपवास और अन्य कई स्थानों पर इस चुनाव को पार्षदों की खरीद मंडी बना दिया। हिंसा भी हुई सरकार का और कांग्रेस का असली चेहरा सामने आ गया।

चुनाव के परिणाम

निकाय क्षेत्र जीते

ब्यावर नगर पालिका नरेश कुमार (भाजपा)

पुष्कर नगर पालिका कमल किशोर (भाजपा)

अलवर नगर परिषद बीना गुप्ता (कांग्रेस)

भिवाड़ी नगर परिषद शीशराम तंवर (कांग्रेस)

बांसवाड़ा नगर परिषद जैनेंद्र त्रिवेदी (कांग्रेस)

छबड़ा नगर पालिका कैलाश चंद जैन (भाजपा)

मांगरोल नगर पालिका कौशल किशोर सुमन (कांग्रेस)

बाड़मेर नगर परिषद दिलीप (कांग्रेस)

बालोतरा नगर परिषद सुमित्रा देवी (भाजपा)

भरतपुर नगर निगम अभिजीत कुमार (कांग्रेस)

बीकानेर नगर निगम सुशीला कंवर (भाजपा)

चित्तौड़गढ़ नगर परिषद संदीप शर्मा (कांग्रेस)

निंबाहेड़ा नगर पालिका सुभाष चन्द्र शारदा (कांग्रेस)

रावतभाटा नगर पालिका दीपिका तिल्लानी (कांग्रेस)

चूरू नगर परिषद पायल सैनी (कांग्रेस)

राजगढ़ नगर पालिका रजिया (कांग्रेस)

गंगानगर नगर परिषद करुणा चांडक (कांग्रेस)

सूरतगढ़ नगर पालिका ओमप्रकाश (कांग्रेस)

हनुमानगढ़ नगर परिषद गणेशराज बंसल (कांग्रेस)

जैसलमेर नगर परिशद हरिवल्लभ कल्ला (निर्दलीय)

भीनमाल नगर पालिका विमला (कांग्रेस)

जालौर नगर परिषद गोविन्द (भाजपा)

बिसाऊ नगर पालिका मुश्ताक अली (कांग्रेस)

झुंझुनूं नगर परिषद नगमा बानो (कांग्रेस)

पिलानी नगर पालिका हीरालाल नायक (कांग्रेस)

फलौदी नगर पालिका पन्नालाल व्यास (कांग्रेस)

कैथून नगर पालिका आइना महक (कांग्रेस)

सांगोद नगर पालिका कविता सुमन (कांग्रेस)

डीडवाणा नगर पालिका रचना (कांग्रेस)

मकराना नगर परिषद समरीन (कांग्रेस)

पाली नगर परिषद रेखा भाटी (भाजपा)

सुमेरपुर नगर पालिका उषा कंवर (भाजपा)

नीमकाथाना नगर पालिका सरिता दीवान (कांग्रेस)

सीकर नगर परिषद जीवन खान (कांग्रेस)

माउंट आबू नगर पालिका जीतू राणा (कांग्रेस)

पिंडवाड़ा नगर पालिका जितेन्द्र कुमार (भाजपा)

शिवगंज नगर पालिका वजींगराम घांची (कांग्रेस)

सिरोही नगर परिषद महेन्द्र कुमार मेवाड़ा (कांग्रेस)

आमेट नगर पालिका कैलाश मेवाड़ा (कांग्रेस)

नाथद्वारा नगर पालिका मनीष राठी (कांग्रेस)

टोंक नगर परिषद अली अहमद (कांग्रेस)

कानौद नगर पालिका चन्दा देवी मीणा (कांग्रेस)

उदयपुर नगर पालिका गोविन्द सिंह टांक (भाजपा)

नसीराबाद नगर पालिका शारदा मित्तलवाल (कांग्रेस)

थानागाजी नगर पालिका चैथमल सैनी (कांग्रेस)

प्रतापपुर गांधीनगर पालिका दिलीप कुमार परमार (भाजपा)

रूपवास नगर पालिका - बबीता ( भाजपा )

महुआ नगर पालिका नर्मदा देवी (कांग्रेस)

खाटूश्याम जी नगर पालिका ममता मुंडोतिया (भाजपा)

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Posted By: Sachin Mishra

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