लखनऊ, जेएनएन। CAA protest In UP : उत्तर प्रदेश में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में हुई हिंसा के पीछे पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की सुनियोजित भूमिका सामने आने के बाद अब पुलिस को कई सक्रिय सदस्यों के बैंक खातों में कुछ खास तारीखों में लेनदेन के सुराग भी मिले हैं। सूत्रों का कहना है कि कई खातों में दस हजार से अधिक की रकम का ट्रांजेक्शन होने की बात सामने आई है, जिनके बारे में और गहनता से छानबीन की जा रही है। पुलिस छानबीन में आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) की भी तकनीकी मदद ले रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी पीएफआइ की फंडिंग के तार खंगाल रही है।

यूपी में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में हुई हिंसा के मामलों में पुलिस विभिन्न जिलों में पीएफआई के करीब 150 सक्रिय सदस्यों को पकड़ चुकी है। इनमें सबसे अधिक मेरठ में 21, वाराणसी में 20, बहराइच में 16 और लखनऊ में 14 आरोपित दबोचे गए हैं। कुछ अन्य की भूमिका की गहनता से पड़ताल की जा रही है। पीएफआई के सदस्यों की हिंसा में सक्रियता व अन्य बिंदुओं की पड़ताल के लिए दूसरी जांच एजेंसियां भी सहयोग कर रही हैं।

पीएफआई के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष वसीम अहमद, प्रदेश कोषाध्यक्ष नदीम अहमद, डिवीजन इंचार्ज बहराइच/बाराबंकी मौलाना अशफाक, डिवीजन इंचार्ज वाराणसी रईस अहमद, एडहॉक कमेटी मेंबर नसीरुद्दीन समेत अन्य की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने हिंसा में फंडिंग के तार भी खंगालने शुरू किए थे। पीएफआई के सहयोगी संगठनों की भूमिका भी जांच के घेरे में रही है। अब तक की पड़ताल में सामने आया है कि पहले कुछ जिलों में सक्रिय पीएफआइ का विस्तार अब पूरे उत्तर प्रदेश में हो चुका है।

उत्तर प्रदेश के शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बिजनौर, लखनऊ, बाराबंकी, गोंडा, बहराइच, वाराणसी, आजमगढ़, कानपुर, गाजियाबाद व सीतापुर में पीएफआई की सक्रियता अधिक रही है। वर्ष 2001 में स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) संगठन पर को प्रतिबंधित किए जाने के बाद उसके कई सक्रिय सदस्य अब पीएफआइ के संचालन में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में 19 और 20 दिसंबर, 2019 को उत्तर प्रदेश के 22 जिलों में हिंसा हुई थी। इस दौरान 21 लोगों की मौत हुई थी। जांच के दौरान सीएए प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के लिए पीएफआई की भूमिका पाई गई थी। ईडी जैसी अन्य एजेंसियां इस जांच में शामिल हैं। वर्ष 2001 में स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद दक्षिण भारत के 3 संगठनों नेशनल डेवलपमेंट फ्रंट केरल, मनीथा निधि परसाई तमिलनाडु और कर्नाटका फॉर्म फॉर डिग्निटी कर्नाटका ने वर्ष 2006 में सम्मेलन कर केरल में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया नाम का नया संगठन बनाया था।

Posted By: Umesh Tiwari

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