लखनऊ, जेएनएन। कांग्रेस की ओर से बसपा पर भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के आरोप से तिलमिलाई बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने दोनों दलों के साथ मिलकर कहीं भी कोई छोटा या बड़ा चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा की। रविवार को जारी बयान में उन्होंने कांग्रेस और भाजपा को जातिवादी व पूंजीवादी मानसिकता वाली पार्टियां बताते हुए उन पर घिनौनी राजनीति करने का आरोप लगाया। प्रवासी श्रमिकों व कामगारों के मुद्दे पर केंद्र और प्रदेश सरकारों को घेरा।

बीएसपी चीफ मायावती ने कहा कि देश की वर्तमान खराब हालत के लिए केंद्र व राज्यों की भाजपा सरकारें जितनी जिम्मेदार हैं, उससे कहीं अधिक कांग्रेस है। मेरी सत्य परंतु कड़वी बात को भी राजनीतिक रंग देकर स्वार्थ की पूॢत करने की कोशिश की गई। यह अफवाह उड़ाई गई है कि हम लोग बीजेपी से मिल गए हैं। मेरा आज फिर से स्पष्ट कहना है कि बसपा कांग्रेस और भाजपा जैसी पार्टियों की तरह धन्नासेठों के स्वार्थ व गरीब विरोधी राजनीति नहीं करती है। वैसे भी बसपा का रिकार्ड है कि उसने आज तक कभी भाजपा के साथ मिलकर चुनाव नहीं लड़ा है। भाजपा व कांग्रेस आदि की गलत नीतियों के कारण ही आज भी गरीबों, दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों व अपर कास्ट समाज के गरीबों का जीवन नारकीय बना हुआ है।

बसपा प्रमुख मायावती ने आरोप लगाया कि लॉकडाउन के 61वें दिन भी सरकार प्रवासी लोगों की समस्या का समाधान नहीं कर पाई है। इन बेसहारा मजलूम व मजबूर प्रवासी श्रमिकों के साथ खासकर कांग्रेस व भाजपा सरकारों का रवैया आज भी उपेक्षा व तिरस्कार का ही बना हुआ है। 

बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि कोरोना संक्रमण फैलाने के लिए प्रवासी श्रमिक कतई जिम्मेदार नहीं हैं। वास्तव में इसके लिए संबंधित राज्य सरकारें जिम्मेदार हैं। उन्होंने प्रवासी मजदूरों को अपने गांव पहुंचने पर 14 दिन के लिए अलग-थलग रखने पर भी एतराज जताया। उनका कहना है कि जिन हालातों में वह घर वापसी कर रहे हैं, उनमें तो अच्छा खासा आदमी भी बीमार हो जाएगा। 

बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि लॉकडाउन के कारण बेरोजगार और बेआसरा हो गए करोड़ों प्रवासी श्रमिक परिवारों की दुखद एवं शर्मनाक दुर्दशा हर जगह देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद केंद्र और राज्यों में लंबे समय तक शासन करने वाली कांग्रेस ने अगर गांव व शहरों में लोगों की रोजी-रोटी की सही व्यवस्था की होती तो इन्हें दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर नहीं होना पड़ता।

Posted By: Umesh Tiwari

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