अयोध्या, जेएनएन। राम मंदिर निर्माण को लेकर ट्रस्ट गठन से पहले श्रीरामजन्मभूमि न्यास अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सरकार की ओर उन्हें जेड श्रेणी की सुरक्षा प्रदान कर दी गई है। जेड श्रेणी की सुरक्षा मिलने के बाद अब महंत नृत्यगोपालदास के इर्द-गिर्द सुरक्षा घेरा और सख्त हो जाएगा। किसी स्थान पर उनके पहुंचने से पहले सुरक्षा दस्ते में तैनात पुलिस अधिकारी वहां पहुंच कर जायजा लेंगे तथा स्थानीय जिम्मेदार अधिकारियों से समन्वय बना कर उनकी सुरक्षा को पुख्ता करेंगे। उनके आश्रम की सुरक्षा और हमराह के लिए अलग-अलग सुरक्षा दस्ते होंगे।

जेड श्रेणी की सुरक्षा प्रदान करना यह दर्शाता है कि सरकार महंत नृत्यगोपालदास की सुरक्षा को लेकर बहुत गंभीर है। सुप्रीम कोर्ट ने राममंदिर निर्माण के लिए नौ फरवरी तक ट्रस्ट गठन कर लेने का निर्देश केंद्र सरकार को दिया है। इससे पहले 20 जनवरी को प्रयागराज में विहिप के मार्गदर्शक मंडल के संतों की बैठक है, जिसमें महंत नृत्यगोपालदास का शामिल होना तय माना जा रहा है। ट्रस्ट गठन में संतों की भूमिका और मंदिर निर्माण दोनों ही मुद्दों को लेकर यह बैठक काफी अहम है। संभावना है कि ट्रस्ट गठन में महंत नृत्यगोपालदास की अहम भूमिका हो सकती है, जिससे पहले सरकार उन्हें पुख्ता सुरक्षा से लैस करना चाहती है। जेड सुरक्षा को उच्चश्रेणी की सुरक्षा मानी जाती है। यह उस वीआइपी को प्रदान की जाती है, जिसके साथ हुई अनहोनी से सामाजिक तानाबाना बिगड़ सकता है। सुरक्षा बढ़ाए जाने संबंधी सूचना एसएसपी आशीष तिवारी को प्राप्त हो चुकी है। महंत नृत्यगोपालदास की सुरक्षा अभी वाई श्रेणी की है, जिसमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवान तैनात हैं। 

सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े जानकारों की मानें तो वाई श्रेणी की सुरक्षा में 11 जवानों का सुरक्षा कवच होता है, जिसमें एक से दो कमांडो होते हैं और पुलिस अधिकारी होते हैं, जबकि जेड श्रेणी की सुरक्षा में जवानों एवं कमांडो दोनों की संख्या वाई श्रेणी से कहीं अधिक होती है। एसएसपी आशीष तिवारी ने बताया कि न्यास अध्यक्ष को जेड श्रेणी की सुरक्षा देने से संबंधित निर्देश प्राप्त हो चुका है। स्थानीय स्तर से वाहन और वॉचर उन्हें मुहैया कराया जा रहा है। सुरक्षा श्रेणी के मानक गोपनीय रखे गए हैं। 

राम मंदिर ट्रस्ट में सबसे आगे चल रहा नाम

राम मंदिर निर्माण के लिए न्यास में शामिल होने के दावेदारों में सबसे पहला नाम रामनगरी की शीर्ष पीठ मणिरामदास जी की छावनी के महंत नृत्यगोपालदास का चल रहा है। मंदिर आंदोलन के पर्याय रहे दिगंबर अखाड़ा के महंत रामचंद्रदास परमहंस के साकेतवास के बाद 2003 से ही रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष का दायित्व संभालने वाले महंत नृत्यगोपालदास 1984 में शुरुआत के साथ ही मंदिर आंदोलन के संरक्षकों में शुमार रहे हैं। मंदिर आंदोलन के फलक पर उनकी गणना महंत रामचंद्रदास एवं गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ जैसे आला किरदारों के साथ त्रिमूर्ति के तौर पर होती रही। 2003 में परमहंस एवं 2014 में महंत अवेद्यनाथ के साकेतवास के बाद वे निर्विवाद तौर पर मंदिर आंदोलन के सर्वाधिक वरिष्ठ प्रतिनिधि रहे हैं। शांत-संयत और अल्पभाषी नृत्यगोपालदास की राममंदिर को लेकर परिकल्पित किसी भी इकाई में सबसे पहले गणना होती है।

Posted By: Umesh Tiwari

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