[राजीव चंद्रशेखर]। साल 2013 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने 30 जुलाई को मानव तस्करी निषेध दिवस घोषित किया ताकि मानव तस्करी के शिकार लोगों के बीच जागरूकता आ सके। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक साल 2016 में मानव तस्करी के मामलों में 20 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। एक अंदाज के मुताबिक करीब 8 हजार मानव तस्करी के मामले सामने आए, वहीं करीब 23 हजार पीड़ितों को छुड़ाया गया, जिनमें 61 फीसदी के करीब बच्चे शामिल हैं। मानव तस्करी भारत के लिए इतनी बड़ी समस्या बन चुकी है कि इस संबंध में अमेरिका की वार्षिक रिपोर्ट में भारत को टियर-2 में रखा गया है।

भाजपा विधायक राजीव चंद्रशेखर लिखते हैं कि भारत के मामले में फिलहाल इस दिशा में कदम उठाना और भी जरूरी हो जाता है क्योंकि ऐसे वक्त में जब पड़ोसी देश इस समस्या से सख्ती से निपट रहे हैं तो भारत में कमजोर कानूनी प्रावधानों और इच्छाशक्ति की कमी इसे आसान बनाते हैं। इसके अलावा भारत में कमजोर सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि के लोग आसानी से शिकार बन रहे हैं, क्योंकि उनके माता पिता अक्सर अपने बच्चों को बेहतर जीवनयापन के अवसरों की तलाश में 'भेज' या 'बेच' दे रहे हैं। इसके बाद बच्चों से जबरदस्ती निर्माण कार्यों, ईंट भट्ठों और अन्य जगहों पर काम लिया जाता है। इनमें से बहुत से बच्चों को देह व्यापार में भी धकेला जाता है। चंद्रशेखर के मुताबिक यह हैरान कर देने वाला है कि 10-10 साल के मासूम बच्चों तक को वेश्यावृत्ति में धकेला जाता है।

चंद्रशेखर के मुताबिक कानून के अलावा एक समग्र रिसर्च की भी जरूरत है जो कि इस समस्या से निपटने में आ रही बाधाओं की पहचान करे सके। इसके अलावा जिला बाल संरक्षण अधिकारी, जुवेनाइल जस्टिस सिस्टम, पुलिस और एनजीओ के बीच भी एक ऐसी व्यवस्था बनानी होगी जो कि तस्करी रोकने के अलावा छुड़ाए गए बच्चों के पुनर्वास में भी सहयोग करे। सांसद राजीव लिखते हैं कि मई में बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के करीब 500 बच्चों को केरल से छुड़ाया गया। वे कहते हैं कि ऐसे संवेदनशील मामलों पर राज्य सरकारों की चुप्पी उन्हें हैरान करती है। राजीव कहते हैं कि वे समय-समय पर इस मुद्दे को लोकसभा में उठाते रहे हैं।

जून 2017 में टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान की ओर से एक सेमिनार का आयोजन किया गया, ताकि इस समस्या से निपटने के लिए राष्ट्र स्तरीय एक्शन प्लान बन सके। इस दौरान सांसद राजीव चंद्रशेखर ने भी कुछ सुझाव दिए। जो कि निम्नलिखित हैं-
1. सक्रिय पुलिसिंग की मांग- जिसमें 'ग्राहकों' की पहचान करना और उनका नाम उजागर करना ताकि समाज में हतोत्साहित किया जा सके
2. प्रोसिक्यूशन मॉडर्नाइजेशन- इसके तहत बच्चों को बचाना प्राथमिकता में शामिल करना और तकनीक मुहैया करवाना
3. इस अवैध कारोबार के ग्राहकों का डाटाबेस तैयार करना
4. 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे अभियानों में बच्चों की सुरक्षा और उनके यौन शोषण जैसे मुद्दों को भी शामिल करना
5. पहले सभी बड़े शहरों और धीरे-धीरे बाकी जगहों पर भी इन मामलों से निपटने के लिए स्पेशल कोर्ट बनाई जाए
6. ऐसे गिरोहों को पकड़ने के लिए छुड़ाए गए बच्चों से भी मदद ली जाए ताकि गिराहों पर काबू पाने में महत्वपूर्ण जानकारी हाथ लग सके।
7. मीडिया के माध्यम से जागरूकता पैदा करना।

Posted By: Vikas Jangra