नई दिल्ली, प्रेट्र। तत्काल तीन तलाक विधेयक को लोकसभा से पारित किए जाने की कई महिला संगठनों और कार्यकर्ताओं ने आलोचना की है। विधेयक को राजनीति से प्रेरित बताते हुए उन्होंने कहा कि इसका मकसद लोकसभा चुनाव से पहले देश में ध्रुवीकरण करना है।

ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव वूमेंस एसोसिएशन की सचिव कविता कृष्णन ने कहा कि गैर-मुस्लिम पुरुष द्वारा यही जुर्म करने पर दीवानी मामला होता है, लेकिन अगर मुस्लिम पुरुष करे तो उसे आपराधिक कृत्य बनाया जा रहा है। माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य बृंदा करात ने कहा, 'तत्काल तीन तलाक और मनमानी खत्म करने के लिए मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन करती हूं, लेकिन कोर्ट ने कहीं भी इसे आपराधिक बनाने की स्वीकृति नहीं दी थी।'

नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन वूमेन की महासचिव ऐनी राजा ने इस विधेयक को धोखाधड़ी करार देते हुए कहा कि पति के जेल जाने के बाद महिलाओं और बच्चों के भरण-पोषण से जुड़े मसले का विधेयक में कोई जवाब नहीं है। महिला अधिकार कार्यकर्ता शबनम हाशमी ने कहा कि विधेयक को व्यापक चर्चा के लिए प्रवर समिति को भेजा जाना चाहिए।

जकिया सोमन ने सराहा
भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की सदस्य जकिया सोमन ने विधेयक का स्वागत करते हुए मांग की कि हिंदू विवाह अधिनियम की तर्ज पर मुस्लिम विवाह अधिनियम भी लाया जाए।

राष्ट्रीय महिला आयोग ने किया स्वागत
राष्ट्रीय महिला आयोग ने तत्काल तीन तलाक विधेयक पारित किए जाने का स्वागत किया है। आयोग की चेयरपर्सन रेखा शर्मा ने कहा कि इस कानून के अभाव में उन्होंने मुस्लिम महिलाओं को परेशान होते हुए देखा है। उन्होंने बताया कि महिला आयोग द्वारा चलाए गए हस्ताक्षर अभियान में करीब 10 हजार मुस्लिम महिलाओं ने इस विधेयक को जल्द पारित किए जाने का समर्थन किया था।

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