नई दिल्ली, [स्पेशल डेस्क]। Upper Caste Reservation Bill संसद के दोनों सदनों से पास हो चुका है और अब राष्ट्रपति की मुहर लगने के साथ ही अगड़ी जातियों के गरीबों को भी 10 फीसद आरक्षण मिलने लगेगा। इसी के साथ संसद के शीतकालीन सत्र की कार्यवाही पूरी हुई और अब सबकी निगाहें 31 जनवरी से 13 फरवरी तक होने वाले बजट सत्र पर हैं। यह भी गौर करने लायक बात है कि इस बार पूर्ण बजट पेश नहीं होगा, बल्कि आगामी लोकसभा चुनाव के चलते 'वोट ऑन अकाउंट' पेश होगा। यानि चुनाव के बाद 17वीं लोकसभा के गठन तक खर्चे चलाने के लिए सरकार लेखानुदान की मांग करेगी। इस सत्र के लिए 14 दिन का समय रखे जाने का स्पष्ट संदेश यही है कि सरकार Upper Caste Reservation Bill की ही तरह कोई बड़ा धमाका अगले महीने भी कर सकती है।

क्या होता है वोट ऑन अकाउंट
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 के तहत सरकार को हर साल संसद में एक वार्षिक वित्तीय विवरण पेश करना होता है। इसमें सालाना आय-व्यय का लेखा-जोखा होता है। इसे ही बजट कहते हैं। पिछले कुछ समय से लोकसभा के चुनाव अप्रैल-मई में होते आए हैं, ऐसे में सरकार उस समय पूर्ण बजट पेश करने की स्थिति में नहीं होती, मगर सरकारी खर्चों को पूरा करने के लिए उसे इंतजाम जरूर करना पड़ता है, ताकि नई सरकार के आने तक सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से चलती रहें। इसके राजनीतिक एवं नैतिक निहितार्थ भी हैं। क्योंकि जिस सरकार के पास पूरे साल शासन चलाने का जनादेश नहीं है, उसे पूरे साल का वित्तीय विवरण पेश करने से भी बचना होता है। ऐसी ही स्थिति में सरकार पूर्ण बजट पेश करने के बजाय कुछ महीनों का खर्च चलाने के लिए वोट ऑन अकाउंट पेश करती है। इसे लेखानुदान मांग, अंतरिम बजट और आम भाषा में मिनी बजट भी कहा जाता है।

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14 दिन के बजट सत्र की क्या जरूरत
मिनी बजट या 'वोट ऑन अकाउंट' 1 फरवरी को पेश किया जाएगा। जानकारों की मानें तो 'वोट ऑन अकाउंट' के लिए सिर्फ दो दिन ही काफी हैं। केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद एक बदलाव यह भी हुआ है कि अलग से रेल बजट पेश नहीं किया जाता। ऐसे में सिर्फ आम बजट पेश किया जाता है और इस बार तो सिर्फ दो महीने के लिए लेखानुदान मांग की जानी है, जो दो दिन में भी हो सकता है। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि फिर 14 दिन के सत्र की क्या जरूरत है। इस प्रश्न का उत्तर शायद अगले पैराग्राफ में मिल जाए।  

पास कराने हैं कई विधेयक
पिछले कई सत्रों से लगातार दोनों सदनों में हंगामा जारी है। शीतकालीन सत्र में भी कई दिन हंगामे की भेंट चढ़ गए। बजट सत्र के लिए सरकार के पास कई ऐसे विधेयक भी हैं, जो लंबे वक्त से कानून बनने का इंतजार कर रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि 14 दिन के बजट सत्र में सरकार राज्यसभा से सिटिजन अमेंडमेंट बिल को पास कराने की पूरी कोशिश करेगी। यह बिल लोकसभा में पास हो चुका है और कानून बन जाने पर पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार आदि देशों से भागकर आने वाले धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिकता का अधिकार देगा। किसानों के मुद्दे पर विपक्ष और खासकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पीएम मोदी और उनकी सरकार को कटघरे में खड़ा करते रहे हैं। ऐसे में बजट सत्र के दौरान किसानों की आय बढ़ाने या उन्हें आर्थिक मदद देने से संबंधित कोई विधेयक आ सकता है। 

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तीन तलाक बिल पर भी लगानी है मुहर
मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक के खौफ से मुक्ति दिलाने के लिए सरकार मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक लेकर आयी है। इसे तीन तलाक बिल भी कहा जाता है। लोकसभा में सरकार के पास बहुमत है और निचले सदन ने इसे पास भी कर दिया है। अब बारी राज्यसभा की है। सरकार इसी बजट सत्र में तीन तलाक बिल को पास कराने की भी भरपूर कोशिश करेगी। अगर राज्यसभा से तीन तलाक बिल पास हो जाता है तो एक साथ तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) अपराध होगा और इसमें पति को गिरफ्तार किया जा सकता है। जानकारों की मानें तो इस विधेयक के पास होने से मुस्लिम महिलाओं को बल मिलेगा और मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण को रोकने में भी मदद मिलेगी।

विपक्ष को कटघरे में खड़ा करेगी सरकार
आगामी लोकसभा चुनाव से ठीक पहले होने वाले इस बजट सत्र को लेकर सरकार को काफी उम्मीदें हैं। 14 दिन के इस सत्र में सरकार आधार एक्ट में बदलावों से संबंधित विधेयक को भी राज्यसभा से पास करवाने की कोशिश करेगी। बता दें कि यह बिल लोकसभा से पहले ही पास हो चुका है। इसके अलावा भी कई ऐसे विधेयक सरकार बजट सत्र में ला सकती है, जो विपक्ष के लिए मुसीबत खड़ी करेंगे। इन संभावित विधेयकों के संबंध में कहा जा रहा है कि विपक्ष असमंजस की स्थिति में होगा कि इनका समर्थन किया जाए या नहीं। ऐसे संभावित विधेयकों का विरोध करने पर सरकार आम चुनाव से ठीक पहले विपक्ष को कटघरे में खड़ा करेगी।

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राम मंदिर पर नहीं आएगा विधेयक!
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए विधेयक लाने के बारे में पिछले काफी समय से मांग हो रही है। हालांकि, स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह स्पष्ट कर चुके हैं कि ऐसा कोई विधेयक नहीं लाया जाएगा। उन्होंने हाल ही में कहा था कि यह विषय सुप्रीम कोर्ट में है और उसी के फैसले पर अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होगा। राम मंदिर के लिए कोई विधेयक लाए जाने की उम्मीद नहीं है, जैसा कि विश्व हिंदू परिषद के साथ ही कई अन्य संगठन व लोग मांग कर रहे हैं। राम मंदिर के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार से सुनवाई शुरू होने जा रही है और अभी यह भी नहीं कहा जा सकता कि आम चुनाव से पहले कोई फैसला आएगा या नहीं।

Posted By: Digpal Singh

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