पुणे, प्रेट्र। महिलाओं के विरुद्ध हो रहे अपराधों पर लगाम के लिए केवल नए कानून पर्याप्त नहीं हो सकते हैं। इस सामाजिक बुराई के खात्मे के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिक कौशल जरूरी है। हाल में हैदराबाद और उन्नाव में हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने रविवार को एक कार्यक्रम में यह बात कही।

नायडू ने कहा कि भारतीय संस्कृति में हम महिला को मां एवं बहन की तरह सम्मान देते हैं। लेकिन हाल के दिनों में कुछ स्थानों पर जो घटनाएं हुई हैं, वे शर्मनाक हैं और हम सबके लिए चुनौती हैं। हमें शपथ लेनी चाहिए कि ऐसी घटनाओं पर तत्काल लगाम लगेगी।

देश में दो-तीन और सुप्रीम कोर्ट होने चाहिए: वेंकैया

वहीं, देश की न्याय प्रणाली व्यवस्था पर बोलते हुए उप राष्ट्रपति ने कहा कि अभी देश के दूर-दराज के भागों से लोग न्याय के लिए दिल्ली आते हैं। उन्हें कई-कई दिन दिल्ली में रुकना पड़ता है जिसमें बहुत खर्चा आता है। इसलिए मेरी राय में सुप्रीम कोर्ट की दो-तीन बेंच देश के अन्य भागों में भी खुलनी चाहिए। जिससे हर आदमी आसानी से न्याय मिल सके।

संस्कृति और जड़ों की ओर लौटना होगा : वेंकैया

उप राष्ट्रपति ने कहा कि निर्भया कानून लाया गया था, लेकिन उससे क्या हुआ? क्या समस्याएं समाप्त हो गई? वह आगे बोले, 'मैं किसी विधेयक या नए कानून के खिलाफ नहीं हूं, लेकिन मुझे हमेशा लगता है कि इस सामाजिक बुराई को खत्म करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिक कौशल की जरूरत है। मानसिकता में बदलाव समय की आवश्यकता है। हमें अपनी संस्कृति और जड़ों की ओर लौटना होगा।

नायडू ने कहा कि ऐसी घटनाओं को धर्म के चश्मे से देखने से असल मुद्दा गुम हो जाता है। इस मुद्दे पर होने वाली राजनीति पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि इससे देश की छवि धूमिल होती है। कुछ लोग कह रहे हैं कि भारत ऐसी घटनाओं की राजधानी बन गया है। मैं इस सब में नहीं पड़ना चाहता। हमें अपने देश का अपमान नहीं करना चाहिए और ऐसी नृशंस घटनाओं पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। उप राष्ट्रपति ने कहा कि अध्यापकों की जिम्मेदारी है कि छात्रों को सही मूल्य सिखाएं और उन्हें सही पथ दिखाएं।

Posted By: Dhyanendra Singh

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