नई दिल्ली [जेएनएन]। 'अर्बन नक्सल' के मामले में भाजपा और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।मंगलवार को एक बार फिर दोनों पार्टियों ने इस मुद्दे को लेकर एक-दूसरे पर वार-पलटवार किया। पहले भाजपा ने कांग्रेस पर हमला बोला और जवाब में कांग्रेस ने मित्र मीडिया के सहारे बगैर प्रमाणित तथ्यों के दुष्प्रचार करने का आरोप लगाया।

भाजपा ने शहरी नक्सलियों के पास मिले ईमेल में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के मोबाइल नंबर को सबूत के रूप में पेश किया और सफाई मांगी। भाजपा के अनुसार सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय सलाहकार समिति (एनएसी) में नक्सली समर्थकों को जगह दी गई थी।

नक्सलियों पर कांग्रेस का दोहरा रवैया
भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि कांग्रेस का नक्सलियों के साथ पुराना रिश्ता रहा है, इसी कारण सत्ता में रहते समय भी माओवाद को लेकर उसका दोहरा रवैया दिखता है। संप्रग सरकार के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत कई वरिष्ठ नेता लगातार नक्सलियों को देश की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताते रहे। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली सबसे ताकतवर राष्ट्रीय सलाहकार समिति में (एनएसी) नक्सलियों को जगह दी गई।


पात्रा के अनुसार वरिष्ठ नक्सली नेता की पत्नी को जेल से रिहाई के बाद एनएसी के सदस्य हर्ष मंदर के अनाथालय का प्रमुख बनाया गया था। 2011 में मलकानगिरी के कलेक्टर और एक जूनियर इंजीनियर को अगवा किया गया था। इसके बदले में 8 माओवादियों की रिहाई की मांग की गई थी। रिहा किए गए नक्सलियों में ए. पदमा भी शामिल थी। वह टॉप माओवादी ए. हरगोपाल उर्फ रामकृष्ण की पत्‍‌नी है। रिहाई के बाद ए. पदमा मंदर ने अपने अनाथालय की इंचार्ज बनाया था।

संबित पात्रा के अनुसार विनायक सेन के मामले में भी कांग्रेस के नक्सलियों के रिश्ते उजागर होते हैं। विनायक सेन को 2010 में देशद्रोह में अपराधी घोषित किया गया था। लेकिन इसके बाद उन्हें योजना आयोग की स्वास्थ्य समिति में सलाहकार बना दिया गया। पात्रा ने कहा कि इसी तरह पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश के भी महेश राउत के साथ नजदीकी संबंध रहे हैं। महेश राउत को भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में गिरफ्तार किया गया है। इसके पहले राउत को नक्सली संबंधों को लेकर यूपीए सरकार के दौर में भी गिरफ्तार किया गया था। लेकिन उस समय जयराम रमेश ने तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण को पत्र लिखकर महेश राउत को भला आदमी बताते हुए छोड़ने को कहा था।

दिग्विजय सिंह पर गंभीर आरोप
भाजपा नेता ने कांग्रेस पर पिछले साल दलितों को भाजपा के खिलाफ भड़काने के लिए नक्सलियों के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया। इसके लिए कामरेड प्रकाश और कामरेड सुरेंद्र के बीच 25 सितंबर 2017 को हुए पत्र व्यवहार का हवाला दिया।
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मीडिया के सामने पत्र पेश करते हुए संबित पात्रा ने कहा कि इसमें हर तरह की मदद के लिए एक मोबाइल नंबर दिया गया है। यह मोबाइल नंबर दिया गया है। यह मोबाइल नंबर राहुल गांधी के राजनीतिक गुरू और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का है। पात्रा ने आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह का देश विरोधी ताकतों के साथ नजदीकी रिश्ते का पुराना इतिहास है। बाटला हाऊस से लेकर मुंबई हमले पर सवाल उठाकर वे आतंकियों को बचाने की कोशिश करते रहे हैं।

दिग्विजय सिंह बोले- तो गिरफ्तार करे सरकार
भाजपा प्रवक्ता की ओर से लगाए नक्सलियों के साथ संबंध के गंभीर आरोपों पर दिग्विजय सिंह ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा है (नक्सलियों से संबंध हैं) तो सरकार मुझे गिरफ्तार करे। उन्होंने कहा कि पहले देशद्रोही, अब नक्सली (का आरोप) तो इसीलिए सरकार मुझे यहीं से गिरफ्तार करे।

कांग्रेस का पलटवार

कांग्रेस ने नक्सलियों के साथ कथित तौर पर मदद पहुंचाने के भाजपा के दावों को बकवास और दुष्प्रचार करार देते हुए उल्टे भाजपा और पुलिस को कठघरे में खड़ा किया है। पार्टी ने कहा है कि भाजपा तथाकथित दस्तावेजों के सहारे सरकार का ढिंढोरा पीटने वाले मीडिया संगठनों के सहारे दुष्प्रचार में जुटी है। भाजपा के साथ पुलिस को आड़े हाथों लेते हुए कांग्रेस ने कहा कि जांच तो इस बात की होनी चाहिए कि अदालत की चार्जशीट में तथाकथित सबूत दाखिल किये बिना यह भाजपा को कैसे मिल रहे हैं।

दुष्प्रचार के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रही सरकार
पार्टी प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि भाजपा अब जांच एजेंसी का भी काम करने लगी है। उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि पुणे पुलिस का यह कथित सबूत अदालत की चार्जशीट से पहले भाजपा के पास कैसे पहुंच गया। यह कागज सही है या गलत यह प्रमाणित हुए बिना भाजपा के हाथ में आने का मकसद साफ है कि दुष्प्रचार के लिए ऐसे कागजातों को सत्ताधारी पार्टी को मुहैया कराया जा रहा है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि यह बेहद गंभीर मसला है क्योंकि भाजपा अपने दुष्प्रचार के लिए पुलिस, सरकार और राजनीतिक पार्टी की सीमा रेखा की एक मान्य दीवार को ध्वस्त कर रही है। इसके लिए सारी मर्यादाएं और नियमों को ताक पर रखा जा रहा है।

मित्र मीडिया के जरिए मनगढ़ंत ख़बरें फैला रही भाजपा
मनीष तिवारी ने कहा कि भाजपा और सरकार अपने मित्र मीडिया चैनलों के जरिये इस तरह की मनगढ़ंत खबरें प्रसारित-प्रकाशित करा रहे हैं जो बेहद गंभीर मामला है। इसीलिए पांच गिरफ्तार वामपंथी बुद्धिजीवियों से जुड़े कथित दस्तावेजों के अदालत के सामने जाने से पहले भाजपा और उसके सहयोगी मीडिया चैनलों के दुष्प्रचार के लिए मुहैया कराये जाने की अदालती जांच होनी चाहिए। तिवारी ने कहा कि कांग्रेस इसकी अदालत की निगरानी में जांच की मांग करती है।

Posted By: Vikas Jangra