जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। पिछले पांच दिनों से भारत की यात्रा पर आये कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो की यात्रा रोजाना किसी न किसी नए विवाद में फंसती जा रही है। कूटनीतिक सर्किल में चर्चा यह है कि इस यात्रा के दौरान ट्रूडो ने जितने रंगबिरंग भारतीय पोशाक नहीं बदले हैं उससे ज्यादा विवादों को उन्होंने जन्म दिया है।

विवादों से भरा रहा ट्रूडो का दौरा खालिस्तानी आतंकी को रात्रिभोज निमंत्रण पर उपजा नया विवाद

इस क्रम में गुरुवार को एक नया विवाद यह सामने आ गया कि ट्रूडो के स्वागत के लिए मुंबई में कनाडा के उच्चायोग की तरफ से दिए गए रात्रिभोज में खालिस्तानी आतंकी जसपाल अटवाल को भी आमंत्रित किया गया था। इस पर भारतीय पक्ष की कड़ी आपत्ति के बाद कनाडा उच्चायोग ने फौरन इस निमंत्रण को रद्द कर दिया। हालात को संभालने की कोशिश स्वयं ट्रूडो के स्तर पर हुई और उन्होंने इसे गंभीर मसला बताते हुए कहा कि अटवाल को यह निमंत्रण नहीं मिलना चाहिए था।

आतंकी अटवाल को मिले वीजा की जांच विदेश मंत्रालय ने शुरु की

अटवाल किस तरह से भारत में प्रवेश किया इसको लेकर स्थिति अभी तक साफ नहीं हो पाई है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि अटवाल ने किस तरह से भारत में प्रवेश किया है, इसका पता लगाया जा रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार का कहना है कि कनाडा ने आधिकारिक तौर पर बताया है कि अटवाल को गलती से निमंत्रण चला गया और इसी वजह से बाद में इसे रद्द किया गया। उधर, गृह मंत्रालय की तरफ से यह स्पष्टीकरण दिया गया है कि अटवाल फिलहाल भारत की तरफ से जारी होने वाले प्रतिबंधित आतंकियों की सूची में नहीं है। अटवाल की गिरफ्तारी के एक सवाल पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि कुछ मामलों में वह सजा काट चुके हैं और इसकी जानकारी नहीं कि ऐसा कोई और केस चल रहा है या नहीं।

माना जा रहा है कि अटवाल को पीएम ट्रूडो के साथ किसी कनाडाई सांसद की सिफारिश पर भोज के लिए निमंत्रण दिया गया है। अटवाल ने स्वयं मीडिया को बताया है कि वह निजी दौरे पर भारत आये हैं। वैसे कनाडा के उच्चायोग और स्वयं पीएम ट्रूडो की सफाई के बावजूद दोनों देशों के रिश्तों में जो खटास पैदा हो रही थी वह जसपाल अटवाल की वजह से और गहरी हो गई है।

भारत की आपत्तियों के बाद कनाडा के उच्चायोग ने रद्द किया निमंत्रण

अटवाल अभी कनाडा में एक व्यवसायी है लेकिन उनके खालिस्तानी समर्थक संगठनों के साथ पुराने संबंध रहे हैं। अभी वह एक आन लाइन रेडियो स्टेशन चलाते हैं लेकिन पूर्व में उनके संबंध प्रतिबंधित आतंकी संगठन इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन (आइएसवाइएफ) के साथ रहे हैं। यह वही संगठन है जिसने वर्ष 1985 में एयर इंडिया के विमान में विस्फोट की साजिश रची थी। यह संगठन भारत के अलावा कनाडा, अमेरिका व ब्रिटेन में भी प्रतिबंधित है। पंजाब सरकार के मंत्री मलकियत सिंह सिद्धु पर कनाडा के शहर वैंकवूर में वर्ष 1986 में हमला करने की साजिश रचने के आरोप में अटवाल को गिरफ्तार किया गया था और उन्हें कैद की सजा भी सुनाई गई थी।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि यह साफ है कि अटवाल भारतीय नागरिक नहीं है तभी उन्हे वीजा दिया गया है। लेकिन यह पता लगाया जा रहा है कि उन्हें वीजा किस तरह से दिया गया है और क्या किसी नियम कानून की अनदेखी करके वीजा दिया गया है। क्या अटवाल को भारत में गिरफ्तार किया जाएगा, यह पूछे जाने पर कुमार ने कहा कि, वह अपने अपराध की सजा संभवत: काट चुके हैं। यह अभी साफ नहीं है कि उनके खिलाफ भारत में अभी कोई मामला लंबित है या नहीं।

पहले दिन से ही विवादित है यात्रा

ट्रूडो के सत्ता में आने के बाद से भारत के साथ कनाडा के रिश्तों को लेकर खींच तान चल रही है। इसके पीछे एक ही वजह है कि ट्रूडो की नीतियां कई बार खालिस्तान समर्थन में रही है। वैसे ट्रूडो ने इस यात्रा के दौरान यह सफाई दी है कि वह भारत की एकजुटता के पक्षधर हैं और यहां अनेकता में एकता के समर्थक हैं। लेकिन माना जा रहा है कि वर्ष 2019 में कनाडा में होने वाले आम चुनाव के मद्देनजर वह कई बार कूटनीति में राजनीति को घुसाने की कोशिश कर रहे हैं। कनाडा में गुजरात व पंजाब से गये लोगों की खासी संख्या है। पंजाब के पीएम अमरिंदर सिंह ने भी ट्रूडो के साथ मुलाकात में खालिस्तान आतंक का मुद्दा जोर शोर से उठाया है। शुक्रवार को पीएम नरेंद्र मोदी के साथ ट्रूडो की द्विपक्षीय संबंधों पर मुलाकात होगी।

 

Posted By: Kishor Joshi

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