जागरण संवाददाता, कोलकाता। लोकसभा चुनाव में बंगाल में भाजपा को मिली शानदार सफलता के बाद भगवा दल से निपटने के लिए तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी के चुनावी मैनेजमेंट की कमान प्रशांत किशोर को सौंप दी है।

चुनावी रणनीति बनाने के माहिर खिलाड़ी प्रशांत ने शुक्रवार को तृणमूल सांसदों, विधायकों व वरिष्ठ नेताओं के साथ पहली बार बैठक कर गुरुमंत्र और कई महत्वपूर्ण सुझाव दिया था। अब खबर है कि उनके सुझाव पर अमल करते हुए तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व ने हर मुद्दे पर भाजपा को नहीं घेरने का फैसला किया है।

सूत्रों के अनुसार, छोटे-छोटे मुद्दों पर भाजपा को अब घेरने से पार्टी बचेगी, क्योंकि इसका लाभ लेने में भाजपा सफल रही है। हालांकि, राष्ट्रीय मुद्दों पर तृणमूल जनता के हित में भाजपा के खिलाफ आवाज बुलंद करती रहेगी। दूसरी ओर, तृणमूल सूत्रों का कहना है कि लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन की समीक्षा में यह सामने आया है कि राज्य में अन्य विपक्षी दलों वाममोर्चा और कांग्रेस की कमजोर स्थिति का लाभ सीधे तौर पर भाजपा को मिला है।

भाजपा राज्य में तृणमूल विरोधी पार्टियों के वोटों को एकजुट करने में सफल रहीं, जिसका लाभ उसे मिला। इसी का परिणाम है कि वाममोर्चा और कांग्रेस के वोट बैंक में भारी गिरावट आई है और इसका लाभ भाजपा को मिला। एक वरिष्ठ तृणमूल नेता ने कहा कि इसके अलावा भाजपा की जीत में सांप्रदायिक धु्रवीकरण भी प्रमुख कारण था, जिसके कारण वह 18 सीटें जीतने में कामयाब रहीं।

तृणमूल सूत्रों ने आगे बताया कि लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन की समीक्षा के दौरान प्रशांत किशोर की टीम द्वारा किए गए सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि 22 में से आठ लोकसभा सीटों पर तृणमूल की जीत के पीछे प्रमुख कारण लेफ्ट फ्रंट द्वारा अपने वोट शेयर को बनाए रखना है।

समीक्षा में इस बात पर जोर दिया गया है कि बंगाल में भाजपा का उदय मुख्य रूप से गैर भाजपा दलों वाममोर्चा और कांग्रेस के कमजोर पड़ने के कारण हुआ है। इसलिए तृणमूल अब वाममोर्चा व कांग्रेस के खिलाफ भी पहले की तरह आक्रामक रूख नहीं अपनाएगी।

इससे पहले पिछले महीने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में भाजपा से मुकाबले के लिए सभी गैर भाजपा दलों को साथ आने का न्योता दिया था। ममता ने विधानसभा में कहा था कि भाजपा को हराने के लिए सभी विपक्षी दलों को साथ आना होगा। गौरतलब है कि राज्य में 2021 में विधानसभा के चुनाव होंगे। इस बार तृणमूल व भाजपा के बीच सीधा मुकाबला होने की संभावना है।

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