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कांग्रेस की बुलाई विपक्षी पार्टियों की बैठक को टीएमसी ने कहा 'न', जानें- इसके पीछे क्‍या है वजह

टीएमसी और कांग्रेस के बीच बीते कुछ समय से कुछ भी अच्‍छा नहीं चल रहा है। यही वजह है कि कांग्रेस की बुलाई विपक्षी पार्टियों की बैठक में टीएमसी ने जाने से इनकार कर दिया। ये केवल एक मामला नहीं है।

By Kamal VermaEdited By: Published: Sun, 28 Nov 2021 12:53 PM (IST)Updated: Sun, 28 Nov 2021 03:32 PM (IST)
टीएमसी और कांग्रेस में कुछ भी नहीं ठीक

नई दिल्‍ली (एएनआई/जेएनएन)। संसद के शीतकालीन सत्र से पहले कांग्रेस को टीएमसी ने एक और झटका दिया है। दरअसल, इस सत्र से पहले विपक्ष की रणनीति तय करने के मकसद से कांग्रेस ने सभी विपक्षी पार्टियों की एक बैठक बुलाई थी, जिससे तृणमूल कांग्रेस ने किनारा कर कांग्रेस को झटका देने का काम किया है। कांग्रेस की इस बैठक से पहले ही टीएमसी नेता सुदीप बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी इसमें शामिल नहीं होने वाली है। 

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आपको बता दें कि कुछ समय से तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस में जमकर खींचतान चल रही है। इस खींचतान को हालिया कुछ घटनाओं ने और हवा दी है। दरअसल, कुछ ही दिन पहले मेघालय में कांग्रेस के 17 में 12 विधायक टीएमसी में शामिल हुए हैं। इनमें राज्‍य के पूर्व सीएम मुकुल संगमा भी शामिल हैं। ये सभी कुछ ऐसे समय में हुआ जब टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी दिल्‍ली में डेरा डाले हुए थीं। कहा जा रहा था‍ कि वो कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी से भी मुलाकात कर सकती हैं। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। वहीं इसी दिन कीर्ति आजाद ने थामा था।  

कांग्रेस और टीएमसी में दूरी की केवल यही वजह नहीं है बल्कि इसके पीछे कुछ और भी वजह हैं। इसमें एक बड़ी वजह कांग्रेस का वो आरोप भी है जिसमें कहा गया था कि कांग्रेस ने किसानों के साथ मिलकर आंदोलन को जीत की कगार पर पहुंचाने का काम किया और अब टीएमसी झूठे ही उसका श्रेय लेने की कोशिश कर रही है।

नवंबर की शुरुआत में ही टीएमसी और कांग्रेस के बीच उस वक्‍त तीखी बयानबाजी सामने आई थी जब खुद टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने कांग्रेस पर भाजपा की मदद करने का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि कांग्रेस ने कभी भाजपा के खिलाफ लड़ाई की ही नहीं। इसी वजह से उन्‍होंने कांग्रेस को छोड़ा था। इसके जवाब में कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने ममता को राजनीतिक गद्दार तक बता दिया था। बता दें कि टीएमसी लगातार अपना राजनीतिक विस्‍तार कर रही है। इसके तहत उसने गोवा, त्रिपुरा, असम, मेघालय, हरियाणा आदि शुरुआत भी कर दी है। 


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