जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कोरोना के कारण उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में सभाओं और रैलियों पर 15 जनवरी तक तो पहले ही रोक लगा दी गई थी, अब इसे कुछ और बढ़ाने की तैयारी है। संभवत: तब तक जब तक कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी रुक न जाए। शनिवार को चुनाव आयोग की बैठक में इस पर फैसला होगा। इस बीच राजनीतिक दलों को आकाशवाणी और दूरदर्शन पर प्रचार करने के लिए दोगुना समय दिया गया है।

अब तक आकाशवाणी और दूरदर्शन पर प्रचार के लिए सभी राष्ट्रीय और राज्यों के मान्यता प्राप्त दलों को कम से कम 45 मिनट का समय दिया जाता था जिसे चुनाव आयोग ने इस बार बढ़ाकर कम से कम 90 मिनट कर दिया है। यानि हर पार्टी को कम से कम 90 मिनट का समय प्रचार के लिए जरूर मिलेगा। हालांकि उन दलों को ज्यादा समय मिला है जिनकी राजनीतिक हैसियत पिछले चुनाव में ज्यादा थी।

इस लिहाज से पंजाब में कांग्रेस को आकाशवाणी और दूरदर्शन दोनों पर अलग-अलग 456 मिनट का समय दिया गया है, वहीं आप को 315 मिनट और भाजपा को सिर्फ 141 मिनट का समय दिया गया है। इसी तरह उत्तर प्रदेश में भाजपा को दोनों ही माध्यमों पर अलग-अलग 478 मिनट का समय मिला है, जबकि कांग्रेस को 151 मिनट और सपा को 303 मिनट का समय दिया गया है। उत्तराखंड में भाजपा को 474 मिनट और कांग्रेस को 368 मिनट का समय दिया गया है।

अपनी बात लोगों तक पहुंचा सकेंगे राजनीतिक दल

आयोग का मानना है कि इसके जरिये सभी राजनीतिक दल अपनी बात लोगों तक पहुंचा सकेंगे। साथ ही रैलियों और सभाओं पर लगी रोक से कोई नुकसान भी नहीं होगा। आयोग के मुताबिक, राजनीतिक दल आकाशवाणी और दूरदर्शन पर प्रचार के लिए तय समय का इस्तेमाल नामांकन पत्र दाखिल होने की अंतिम तिथि से चुनाव प्रचार खत्म होने की समयसीमा तक कर सकेंगे।

इस दौरान वह अपनी बात आकाशवाणी और दूरदर्शन के स्थानीय चैनलों के जरिये प्रसारित करा सकेंगे। इसके लिए उन्हें अपनी स्क्रिप्ट पर आयोग से मंजूरी लेनी होगी। आयोग ने प्रसारित होने वाली सामग्री के लिए कड़े नियम तय किए हैं। इसमें ऐसी कोई सामग्री प्रसारित नहीं होगी जिसमें किसी देश की आलोचना होगी, जाति और धर्म के आधार पर कोई भी अपील या आलोचना होगी, कोई ऐसी बात जिससे ¨हसा या दंगा भड़कने की आशंका होगी या फिर आपत्तिजनक बयान आदि शामिल होंगे।