विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

तमिलनाडु उपचुनाव: टीवीके की दोनों सीटों पर जीत, एआईएडीएमके और डीएमके को बड़ा झटका

Published: Sat, 10 Oct 2026 02:00 AM (IST)

मुख्यमंत्री विजय ने परिणाम को महिलाओं को निशाना बनाने वाली अश्लील भाषा के खिलाफ जीत बताया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु ...और पढ़ें

तमिलनाडु उपचुनाव: टीवीके की दोनों सीटों पर जीत (फोटो- एक्स)

तमिलनाडु उपचुनाव: टीवीके की दोनों सीटों पर जीत (फोटो- एक्स)

HighLights

  1. विधानसभा में टीवीके की संख्या 107 से बढ़कर 109 हो गई है

  2. टीवीके बहुमत के आंकड़े 118 से अभी भी नौ सीटें कम हैं

डिजिटल डेस्क, चेन्नई। तमिलनाडु में हुए दोनों विधानसभा उपचुनावों में सत्ताधारी तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) ने जीत दर्ज की है। मादुरंताकम और धारापुरम सीटों पर टीवीके की जीत से मुख्यमंत्री विजय की स्थिति मजबूत हुई है, जबकि एआईएडीएमके को नया झटका लगा है।

ये सीटें एआईएडीएमके विधायकों मारागथम कुमारवेल और सत्यभामा के इस्तीफे के बाद खाली हुई थीं। दोनों ने विधानसभा चुनाव के कुछ हफ्तों बाद इस्तीफा देकर टीवीके में शामिल हो गए थे। टीवीके ने दोनों को फिर से मैदान में उतारा।

धारापुरम में सत्यभामा ने 66,841 वोट हासिल कर डीएमके उम्मीदवार को 9,471 वोटों से हराया। मादुरंताकम में मारागथम कुमारवेल ने 74,048 वोट लेकर डीएमके के परांथमन को 20,040 वोटों से मात दी। दोनों सीटों पर पांच कोने वाली लड़ाई हुई।

इस जीत से 234 सदस्यीय विधानसभा में टीवीके की संख्या 107 से बढ़कर 109 हो गई है। बहुमत के आंकड़े 118 से अभी भी नौ सीटें कम हैं। पार्टी अब पांच अन्य खाली सीटों पर नजर लगाए हुए है, जिनमें त्रिची ईस्ट भी शामिल है (जिसे विजय ने पेराम्बुर रखने के बाद खाली किया था)।

इन पांचों सीटों पर सफाया करने पर टीवीके की संख्या 114 हो जाएगी, जो बहुमत से चार कम होगी। सरकार अल्पमत में रहेगी, लेकिन सहयोगियों (कांग्रेस के पांच और वाम दलों के चार विधायक) पर निर्भरता कम हो सकती है।

मुख्यमंत्री विजय ने परिणाम को महिलाओं को निशाना बनाने वाली अश्लील भाषा के खिलाफ जीत बताया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु भ्रष्ट ताकतों का किला नहीं, बल्कि जनता की ताकत का किला है।

एआईएडीएमके को झटका

एआईएडीएमके के लिए यह बड़ा अपमान है। पार्टी ने कुछ महीने पहले ही जीती दोनों सीटें बरकरार नहीं रख सकी। छह विधायक पहले ही इस्तीफा देकर टीवीके में शामिल हो चुके हैं। जे. जयललिता की मृत्यु के बाद पार्टी लगातार चुनावी संघर्षों का सामना कर रही है। पार्टी प्रमुख एडप्पाडी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) पर दबाव बढ़ गया है।

डीएमके की स्थिति

डीएमके ने लंबे समय बाद बिना बड़े सहयोगियों के चुनाव लड़ा और दूसरी जगह बरकरार रखी। पार्टी प्रमुख एमके स्टालिन ने टीवीके की जीत को अंतरिम बताया और कहा कि विपक्षी वोटों को मिलाकर देखने पर सत्ताधारी दल को फिर बहुमत का समर्थन नहीं मिला।इन परिणामों ने विजय की स्थिति मजबूत की है, एआईएडीएमके नेतृत्व पर दबाव बढ़ाया है और तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरणों के सवाल खड़े किए हैं।