माला दीक्षित, नई दिल्ली।  मुख्य न्यायाधीश (सीजेआइ) दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग नोटिस अस्वीकार करने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में हाइवोल्टेज ड्रामा हुआ। याचिकाकर्ता कांग्रेस सांसदों की ओर से वकील कपिल सिब्बल ने सुनवाई के लिए पांच न्यायाधीशों की पीठ बनाने पर सवाल उठाए। पीठ गठन का आदेश मुहैया कराने की मांग पर अड़े सिब्बल ने जब केस की मेरिट पर बहस करने से इन्कार कर दिया तो पीठ ने उनकी मंशा पर संदेह जताया। कहा- मामला कुछ और ही लगता है। बाद में सिब्बल के याचिका वापस ले लेने पर कोर्ट ने उसे वापस लिया मानकर खारिज कर दिया।

-सुप्रीम कोर्ट में चला हाई वोल्टेज ड्रामा, कांग्रेस ने वापस ली याचिका, पीठ ने खारिज माना

मुख्य न्यायाधीश को कठघरे में खड़ा करने की इस करतूत की कीमत कर्नाटक में कांग्रेसियों को तत्काल चुकानी होगी। जज लोया केस में कांग्रेस के झूठे प्रोपेगेंडा की पोल खुल गई है और उसी का बदला लेने के लिए महाभियोग पर यह सब किया जा रहा है- अरुण जेटली, वित्त मंत्री।

कांग्रेस के दो राज्यसभा सांसदों प्रताप सिंह बाजवा और अमी हर्षदराय याग्निक ने याचिका दाखिल कर सीजेआइ के खिलाफ महाभियोग नोटिस नामंजूर किये जाने के राज्यसभा सभापति वेंकैया नायडू के आदेश को चुनौती दी थी। एक दिन पहले यानी सात मई को सिब्बल ने दूसरे नंबर के वरिष्ठतम जज जस्टिस जे. चेलमेश्वर के कोर्ट में याचिका का जिक्र करते हुए उसे सुनवाई के लिए लिस्ट करने का आदेश मांगा। इस पर उनसे मंगलवार को आने को कहा गया था। इसी बीच शाम को जारी हुई सूची में याचिका आठ मई को पांच जजों की संविधान पीठ के सामने सुनवाई पर लगी थी। मंगलवार को न्यायमूर्ति एके सीकरी, एसए बोबडे, एनवी रमना, अरुण मिश्रा व आदर्श कुमार गोयल की पीठ ने जैसे ही सुनवाई शुरू की, तो कांग्रेस नेता और सांसद सिब्बल ने याचिका की मेरिट पर बहस से पहले पीठ गठन का प्रशासनिक आदेश मुहैया कराने की मांग रख दी।

पीठ में जस्टिस चेलमेश्वर, गोगोई, लोकुर और जोसेफ इसलिए नहीं :

कानूनविद मानते हैैं कि छह से दस क्रम के वरिष्ठता वाले जजों की पीठ का गठन इसलिए हुआ, क्योंकि यह मामला सीजेआइ से जुड़ा था। इसलिए उनकी ही पीठ सुनवाई नहीं कर सकती थी। वरिष्ठताक्रम में दो से पांच नंबर तक के न्यायाधीश जस्टिस जे. चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, मदन बी लोकुर और कुरियन जोसेफ हैं। ये वे हैैं जिन्होंने जनवरी में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सीजेआइ की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। महाभियोग नोटिस में पीठ गठन और कार्य आवंटन का मुद्दा भी शामिल है। इसलिए ये चार भी सुनवाई नहीं कर सकते थे। इसके बाद वरिष्ठता क्रम छठे नंबर के जज से ही शुरू हो सकता था।

45 मिनट तक ऐसे हुए कोर्ट में सवाल-जवाब

सिब्बल - हम पहले बता दें कि हम न तो किसी के खिलाफ हैं और न ही हमारा किसी से वैमनस्य है। हम सिर्फ चाहते हैं कि न्यायिक प्रक्रिया स्वच्छ हो और न्यायिक संप्रभुता कायम रहे।

सिब्बल - मुझे मालूम है कि मास्टर आफ रोस्टर चीफ जस्टिस होते हैं, लेकिन वे अपनी शक्ति का मनमाना इस्तेमाल नहीं कर सकते। इस अधिकार के इस्तेमाल मे एक अनुशासन होना चाहिए। कोर्ट को इस पहलू पर विचार करना होगा।

जस्टिस सीकरी - सीजेआई के मास्टर आफ रोस्टर के बारे में नियम तय करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही सुनवाई कर फैसला सुरक्षित रख चुका है। आप इस केस की मेरिट पर बहस करिये।

केके वेणुगोपाल - अटार्नी जनरल राज्यसभा सभापति की ओर से पेश हुए थे। याचिका की सुनवाई पर आपत्ति है। ये याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। इनकी बहस से पहले हमारी आपत्ति सुनी जाए।

सिब्बल - मामले की सुनवाई की पीठ गठन का आदेश किसने दिया है ये बताया जाए। ये आदेश प्रशासनिक है और सुप्रीम कोर्ट नियमों के मुताबिक सीजेआई मामला पांच जजों को भेजने का प्रशासनिक आदेश नहीं जारी कर सकते।

जस्टिस बोबडे - आप कह रहे हैं कि इस मामले की सुनवाई पांच जजों की पीठ नहीं कर सकती?

सिब्बल - नहीं, हमारा कहना है कि संविधान का अनुच्छेद 145(3) संविधान का महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल होने पर मामले को कम से कम पांच जजों की पीठ को सुनवाई के लिए भेजने की बात कहता है, लेकिन ऐसा न्यायिक आदेश के जरिये हो सकता है। इस मामले में पांच जज की पीठ गठित करने का कोई न्यायिक आदेश नहीं है।

जस्टिस बोबडे - क्या इस बारे मे कोई अर्जी दी है।

सिब्बल - हम अर्जी दाखिल करेंगे।

जस्टिस गोयल - क्या ये कोई नियम है कि सीजेआई फलां केस के लिए फलां पीठ गठित करेंगे।

जस्टिस सीकरी - क्या आप गंभीरता से कह रहे हैं कि ये पांच जज की पीठ मामले की सुनवाई नहीं कर सकती।

सिब्बल - नहीं। हम सिर्फ ये कह रहे हैं कि प्रशासनिक आदेश के जरिये पांच जजों की पीठ गठित नहीं हो सकती। ऐसा सिर्फ न्यायिक आदेश के जरिये हो सकता है।

सिब्बल - पीठ गठित करने का प्रशासनिक आदेश हमे मुहैय्या कराया जाए अगर ये आदेश सीजेआई ने जारी किया है जिन्हे पद से हटाने का महाभियोग नोटिस से संबंधित ये मामला है तो हम उस आदेश को कोर्ट मे चुनौती देंगे।

जस्टिस सीकरी - इसका नतीजा क्या निकलेगा।

सिब्बल - सवाल तो ये भी उठता है कि ऐसे मामले हम किस पीठ के सामने मेंशन करें।

जस्टिस सीकरी - अगर इस मामले पर सीजेआई सुनवाई नहीं कर सकते तो बाकी के चार जजों पर भी नोट है।

सिब्बल - केस लिस्ट करने का तरीका देखा जाए। दिन में जस्टिस चेलमेश्वर की पीठ हमें अगले दिन आने को कहती है और शाम को मामला पांच जजों के सामने सुनवाई सूची पर लगा जाता है। रात में 10.29 पर एओआर वकील को रजिस्ट्री से फोन आता है कि उनका केस सुनवाई के लिए लगा है वे तैयार रहें। ऐसे नहीं होता जैसा हुआ है।

सिब्बल - अभी तक कोर्ट ने न तो याचिका स्वीकार की है और न ही उस पर विचार का कानून प्रश्न तय हुआ है तो फिर इससे पहले मामला पांच जजों के कैसे जा सकता है।

जस्टिस गोयल - क्या ऐसी कोई रोक है कि मामला सीधे संविधान पीठ को नहीं जाएगा।

अटार्नी जनरल - सीजेआई को न्यायिक और प्रशासनिक दोनों तरह से मामला सीधे पांच जजों को भेजने का अधिकार है।

जस्टिस सीकरी - मामला किसने लिस्ट करने का आदेश दिया इसके पचड़े में पड़ने के बजाए याचिका की मेरिट पर बहस की जाए।

जस्टिस अरुण मिश्रा - अगर जस्टिस चेलमेश्वर इस संस्था से जुड़ा मामला होने के कारण केस को सीधे पांच जजों की पीठ को भेज सकते हैं तो फिर ये मामला भी तो संस्था से जुड़ा है इसे क्यों नहीं सीधे पांच जजों को भेजा जा सकता।

सिब्बल - सीजेआई का आदेश है तो हम उसे चुनौती दे सकते हैं। हमे आदेश मुहैय्या कराया जाए। हम उसे चुनौती देंगे।

जस्टिस सीकरी - शुरुआत मे आपने कहा था कि आपकी किसी से कोई खिलाफत नहीं है। आपकी मंशा ठीक है।

सिब्बल - इससे न्यायपालिका पर असर नहीं पड़ेगा।

सिब्बल - सीजेआई का आदेश कोई ऐसा गोपनीय दस्तावेज नहीं है जो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हो और मुहैय्या न कराया जा सके।

जस्टिस सीकरी - इसका मतलब तो कुछ लगता है।

जस्टिस सीकरी- केस की मेरिट पर बहस करो।

सिब्बल - नहीं अगर प्रशासनिक आदेश नहीं बताया जाता तो वे अपनी याचिका वापस ले लेंगे।

अटार्नी जनरल सिब्बल से - मेरी आपत्ति का तो जवाब दो। 64 सांसदों के हस्ताक्षरित नोटिस को नामंजूर करने वाले आदेश को एक पार्टी के दो सांसद कैसे चुनौती दे सकते हैं।

सिब्बल - अगली बार 60 सांसदों के हस्ताक्षर लाऊंगा तो क्या आप याचिका स्वीकार कर लेंगे।

सिब्बल - मै याचिका वापस लेता हूं।

जस्टिस सीकरी - याचिका वापस लेने के कारण खारिज की जाती है।

Posted By: Bhupendra Singh