जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। राम मंदिर निर्माण का अब खुलकर समर्थन कर रही कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की ओर से भगवान राम की महानता के गुणगान का सिलसिला भूमि पूजन के मौके पर भी जारी रहा। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भगवान श्रीराम के गुणों को स्मरण करते हुए कहा कि राम मानवता की गहराइयों में बसी मूल भावना हैं।

प्रियंका गांधी के बाद राहुल गांधी ने भी किया भगवान राम का गुणगान

भूमि पूजन से ठीक एक दिन पहले पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने कांग्रेस की ओर से राम मंदिर निर्माण के पक्ष में स्पष्ट बयान जारी करते हुए इसका समर्थन किया था। जबकि राहुल ने अयोध्या में बुधवार को हुए मंदिर के भूमि पूजन के वक्त ही ट्विटर पर राम मंदिर निर्माण को लेकर अपनी सद्भावना व्यक्त की।

राहुल ने कहा- मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम, सर्वोत्तम मानवीय गुणों का स्वरूप हैं

भगवान राम की महिमा का उल्लेख करते हुए राहुल ने कहा 'मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम, सर्वोत्तम मानवीय गुणों का स्वरूप हैं। वे हमारे मन की गहराइयों में बसी मानवता की भूल भावना हैं। राम प्रेम हैं। वे कभी घृणा में प्रकट नहीं हो सकते। राम करुणा हैं। वे कभी क्रूरता में प्रकट नहीं हो सकते। राम न्याय हैं वे कभी अन्याय में प्रकट नहीं हो सकते।'

राहुल ने की भगवान राम के स्वरूपों की व्याख्या

प्रियंका गांधी के बयान के साथ ही मंगलवार को पार्टी ने अपने नेताओं के लिए राम मंदिर पर किसी तरह के वाद-विवाद का रास्ता बंद कर दिया था। भूमि पूजन के मौके पर राहुल ने भगवान राम के स्वरूपों की व्याख्या कर ऐसी किसी रही सही गुंजाइश भी खत्म कर दी।

भगवान राम सबके, यह अवसर ऐतिहासिक : मनीष तिवारी

उधर कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने लगातार दूसरे दिन सोशल मीडिया पर राम मंदिर निर्माण को लेकर अपनी खुशी का इजहार करते हुए कहा कि यह भारत के लोगों के लिए ऐतिहासिक अवसर है। लोगों को भगवान राम के दिखाए मार्ग को अपनाना चाहिए।

मनीष तिवारी ने कहा- मानवता की मूल भावना की गहराइयों में बसते हैं राम

महात्मा गांधी के प्रिय भजन 'रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीता राम' गुनगुनाते हुए मनीष तिवारी ने कहा कि भगवान राम हर भारतवासी के दिल में बसते हैं और वे सबके हैं।

मनीष तिवारी ने कहा- देश के लोग न्यायिक प्रणाली पर विश्वास रखते हैं

कांग्रेस नेता ने कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण ने यह भी साफ कर दिया है कि इस देश के लिए लोग अभी भी न्यायिक प्रणाली पर विश्वास रखते हैं। मंदिर का निर्माण सिर्फ सुप्रीम कोर्ट द्वारा विवाद के निपटारे के बाद ही मुमकिन हो सका है जिसे सभी पक्षों द्वारा मंजूर किया गया।

Posted By: Bhupendra Singh

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