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बंगाल में TMC और BJP की टक्कर, असम पर कांग्रेस की नजर; क्या दक्षिण में खुलेगा भाजपा का खाता?

Published: Sun, 15 Mar 2026 10:00 PM (IST)Updated: Mon, 16 Mar 2026 12:28 AM (IST)

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे राष्ट्रीय राजनीति की दशा तय करेंगे। पश्चिम बंगाल में टीएमसी और भाजपा के ...और पढ़ें

पांचों राज्यों में चुनावी मुद्दे भी अलग-अलग हैं और अलग-अलग पार्टियों और गठबंधनों के बीच मुकाबला भी है

पांचों राज्यों में चुनावी मुद्दे भी अलग-अलग हैं और अलग-अलग पार्टियों और गठबंधनों के बीच मुकाबला भी है

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नीलू रंजन, नई दिल्ली। पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के नतीजे आने वाले सालों में राष्ट्रीय राजनीति की दशा और दिशा तय कर सकते हैं। असम, पश्चिम बंगाल में भाजपा और तमिलनाडु में राजग की जीत केंद्र में मोदी सरकार की स्थिति और मजबूत करेगी, जबकि इन राज्यों में विपक्षी दलों की जीत विपक्ष का मनोबल को बढ़ाएगा।

केरल में भाजपा के सामने खाता खोलने की चुनौती बरकरार है, तो एलडीएफ की हार की स्थिति में भारत पहली बार ऐसा होगा जब किसी भी राज्य में वामपंथी सरकार नहीं होगी। वैसे तो पांचों राज्यों में चुनावी मुद्दे भी अलग-अलग हैं और अलग-अलग पार्टियों और गठबंधनों के बीच मुकाबला भी है।

तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच टक्कर

सबसे बड़ी टक्कर पश्चिम बंगाल तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच देखने को मिल सकती है। 2016 के तीन सीट से 2021 में 77 सीट तक छलांग लगाने वाली भाजपा की पूरी कोशिश ममता बनर्जी की लगातार तीसरी जीत के बाद चौथी में ब्रेक लगाने की है। वैसे 2021 में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के 77 सीटों के बीच अंतर काफी बड़ा है। लेकिन वोट शेयर के रूप में देखें को तृणमूल कांग्रेस के 47 फीसद के मुकाबले 39 फीसद वोट के साथ भाजपा बहुत ज्यादा पीछे नहीं है।

bengal election

पिछली बार गठबंधन में साथ लड़ने के बाद भी कांग्रेस और सीपीएम दोनों लगभग साढ़े चार फीसद तक सिमट गए थे। इस बार दोनों अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं। पिछली बार कांग्रेस-सीपीएम के गठबंधन में शामिल फुरफुरा शरीफ के इमाम मौलवी अब्बास सिद्दिकी तृणमूल के मुस्लिम वोटबैंक में सेंध लगाने में विफल रहे थे। इस बार तृणमूल कांग्रेस बाहर निकलकर बाबरी मस्जिद बनाने में जुटे हुमायूं कबीर कितना प्रभाव डाल पाते हैं, यह देखना होगा।

assam election

असम में कांग्रेस की चिंता

कभी कांग्रेस के गढ़ रहे असम में पिछले दो चुनाव से कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेता गौरव गोगोई पर भरोसा जताया है और 2021 में बदरूद्दीन अजमल की पार्टी एआईयूडीएफ के साथ समझौते की गलती नहीं दोहराने का फैसला किया है। लेकिन सीटों के परिसीमन ने चुनावी समीकरण को काफी हद तक बदल दिया है। तीन दर्जन से अधिक सीटों को प्रभावित करने वाले मुस्लिमों का प्रभाव अब दो दर्जन से कम सीटों तक सिमट गया है।

tamil nadu election

शायद यही कारण है कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा इस बार भाजपा को ऐतिहासिक सीटें मिलने का दावा कर रहे हैं। 10 सालों बाद भी सत्ता विरोधी लहर का नहीं होने का लाभ भाजपा को मिल सकता है। अंतिम बार दिसंबर 2023 में तेलंगाना में सरकार बनाने वाली कांग्रेस को सबसे अधिक उम्मीद केरल से है। लगातार दो बार से एलडीएफ के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर भी है और यह पिछले दिसंबर में स्थानीय चुनावों में भी देखने को मिला, जिनमें कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ को बड़ी सफलता मिली।

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वैसे कांग्रेसी नेताओं की आपसी लड़ाई से कांग्रेस की उम्मीदों पर पानी फिरने का खतरा भी है। तमिलनाडु में भाजपा ने एआईएडीएमके को राजग में लाकर 2024 के लोकसभा चुनाव की गलती को दुरूस्त कर लिया है। बारी-बारी से डीएमके और एनआईएडीएमके गठबंधन की सरकार बनाने वाले तमिलनाडु में इस बार अभिनेता विजय पुराने समीकरण बिगाड़ सकते हैं। पुडुचेरी में कमोवेश पड़ोसी तमिलनाडु के नतीजों की झलक देखने को मिलेगी।

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